बेतला नेशनल पार्क में बाघ देखने वाले पर्यटकों का नाम अब डिस्प्ले बोर्ड पर होगा दर्ज, वन विभाग की नई पहल से बढ़ेगा रोमांच और संरक्षण

बेतला नेशनल पार्क में बाघ देखने वाले पर्यटकों का नाम अब डिस्प्ले बोर्ड पर होगा दर्ज, वन विभाग की नई पहल से बढ़ेगा रोमांच और संरक्षण

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #बेतलानेशनलपार्क : बाघ देखने वाले पर्यटकों को मिलेगा सार्वजनिक सम्मान।

बरवाडीह स्थित बेतला नेशनल पार्क में बाघों की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब सफारी के दौरान बाघ देखने वाले पर्यटकों के नाम पार्क परिसर में लगे डिस्प्ले बोर्ड पर दर्ज किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना है।

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  • बेतला नेशनल पार्क, बरवाडीह में बाघ देखने वालों का नाम डिस्प्ले बोर्ड पर दर्ज होगा।
  • पहल की घोषणा पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा।
  • डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने जारी किए दिशा-निर्देश।
  • रांची के पर्यटक मेहताब अहमद और जैनब फलक ने हाल में देखे बाघ।
  • कैमरा ट्रैप और ड्रोन से बाघ की निगरानी तेज।

लातेहार जिले के बरवाडीह स्थित बेतला नेशनल पार्क में बाघों की सक्रियता सामने आने के बाद वन विभाग ने एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। अब जंगल सफारी के दौरान बाघ देखने वाले पर्यटकों को विशेष सम्मान दिया जाएगा। उनके नाम पार्क परिसर में लगाए गए सूचना पट्ट यानी डिस्प्ले बोर्ड पर अंकित किए जाएंगे। इस कदम से जहां पर्यटकों में उत्साह बढ़ेगा, वहीं बाघों की उपस्थिति का सार्वजनिक रिकॉर्ड भी तैयार होगा।

पर्यटन और संरक्षण को साथ लेकर नई पहल

यह पहल पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से शुरू की गई है। डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने बेतला के प्रभारी वनपाल संतोष कुमार सिंह को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए इस व्यवस्था को लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने वनकर्मियों को जंगल की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने को कहा है।

वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश कुमार दुबे ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रचार-प्रसार नहीं है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है।

उमेश कुमार दुबे ने कहा, “हम चाहते हैं कि लोग केवल दर्शक बनकर न आएं, बल्कि संरक्षण की इस प्रक्रिया का हिस्सा बनें। बाघ देखने वालों का नाम दर्ज करना एक सकारात्मक प्रोत्साहन है।”

रांची के पर्यटकों ने की थी पुष्टि

हाल ही में रांची से आए पर्यटक मेहताब अहमद और जैनब फलक ने जंगल सफारी के दौरान बाघ देखे जाने की पुष्टि की थी। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों—फोटो और वीडियो—की जांच के बाद पार्क प्रबंधन ने बाघ की गतिविधि को प्रमाणित माना। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में बाघ देखने वाले सभी पर्यटकों का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि बाघ की गतिविधियों का समय-समय पर दस्तावेजीकरण होता रहे और पर्यटन के लिहाज से बेतला की पहचान और मजबूत हो।

बढ़ाई गई गश्ती और निगरानी

बाघ की सक्रियता सामने आने के बाद पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने जंगल क्षेत्र में गश्ती बढ़ा दी है। कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और ड्रोन तकनीक की मदद से निगरानी की जा रही है। इससे बाघ की लोकेशन, मूवमेंट और सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

वन विभाग का मानना है कि तकनीक के उपयोग से न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अवैध गतिविधियों पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। पर्यटकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है ताकि सफारी के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।

पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

बेतला नेशनल पार्क पहले से ही झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। अब बाघ की सक्रिय उपस्थिति और इस नई पहल से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। डिस्प्ले बोर्ड पर नाम दर्ज होने से पर्यटकों को एक विशेष अनुभव मिलेगा और वे इसे गर्व के साथ साझा भी कर सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से ‘वाइल्डलाइफ ट्रॉफी मोमेंट’ का अनुभव मिलेगा, जो लोगों को दोबारा आने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि बेतला का जंगल बाघों के लिए सुरक्षित और सक्रिय आवास बना हुआ है।

न्यूज़ देखो: संरक्षण और पर्यटन का संतुलन जरूरी

बेतला में शुरू की गई यह पहल दिखाती है कि यदि संरक्षण और पर्यटन को संतुलित तरीके से जोड़ा जाए, तो दोनों को लाभ हो सकता है। सार्वजनिक रिकॉर्ड से पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों में जिम्मेदारी का भाव भी आएगा। बाघ जैसे दुर्लभ वन्यजीव की उपस्थिति पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बाघ बचेंगे तो जंगल बचेगा, जंगल बचेगा तो जीवन बचेगा

वन्यजीव केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति का अमूल्य धरोहर हैं। आइए हम सभी बाघ संरक्षण के प्रयासों में सहयोग करें। जंगल में नियमों का पालन करें और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनें।

आप इस पहल पर अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें। खबर को शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग संरक्षण की इस सकारात्मक पहल से जुड़ सकें।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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