
#नगरनिकायचुनाव #चुनावी_प्रचार : चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद नगर परिषद क्षेत्रों में प्रचार गतिविधियां तेज होंगी।
नगर परिषद चुनाव के योग्य उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह मिलने के बाद औपचारिक रूप से चुनाव प्रचार की शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही उम्मीदवार, उनके कार्यकर्ता और समर्थक बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान में जुटेंगे। चुनावी माहौल में उत्साह स्वाभाविक है, लेकिन नियमों और आचार संहिता का पालन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है। प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और मर्यादित प्रचार पर विशेष जोर दिया है।
- चुनाव चिन्ह आवंटन के साथ ही प्रचार गतिविधियों में तेजी।
- उम्मीदवार, कार्यकर्ता और समर्थक वार्डों में सक्रिय।
- आदर्श आचार संहिता के पालन पर प्रशासन की सख्त नजर।
- जुलूस, सभाएं और ध्वनि विस्तारक के लिए अनुमति अनिवार्य।
- धर्म, जाति और भ्रामक प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध।
- उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी।
नगर परिषद चुनाव के तहत जैसे ही योग्य उम्मीदवारों को उनके चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे, वैसे ही पूरे नगर क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां तेज हो जाएंगी। प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों में घर-घर संपर्क, जनसभाएं, बैठकें और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम करेंगे। चुनावी माहौल में उत्साह, नारेबाजी और समर्थकों की सक्रियता देखने को मिलेगी, लेकिन इसके साथ ही यह समय अनुशासन और जिम्मेदारी का भी होगा।
प्रचार की शुरुआत से बदलेगा नगर का माहौल
चुनाव चिन्ह मिलने के बाद प्रचार का विधिवत आगाज माना जाता है। इसके बाद उम्मीदवारों के पोस्टर, बैनर, प्रचार वाहन और समर्थकों की आवाजाही बढ़ जाती है। हर प्रत्याशी अपने विकास कार्यों, योजनाओं और वादों को जनता के सामने रखने का प्रयास करता है। नगर परिषद चुनाव स्थानीय स्तर से जुड़े मुद्दों पर आधारित होते हैं, इसलिए सड़क, नाली, जलापूर्ति, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, रोजगार और पारदर्शिता जैसे विषय प्रचार के केंद्र में रहते हैं।
उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं की बढ़ेगी जिम्मेदारी
प्रचार अभियान के दौरान उम्मीदवारों के साथ-साथ उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भूमिका भी अहम हो जाती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता का उल्लंघन केवल उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि उनके समर्थकों द्वारा किए गए कार्यों पर भी लागू होगा। इसलिए सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रचार के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था, विवाद या कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति उत्पन्न न हो।
आदर्श आचार संहिता का सख्त पालन जरूरी
नगर निकाय चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरी तरह प्रभावी रहती है। इसके तहत किसी भी तरह का भड़काऊ भाषण, व्यक्तिगत आरोप, असत्यापित जानकारी या अफवाह फैलाने पर रोक है। धर्म, जाति, संप्रदाय या समुदाय के नाम पर वोट मांगना पूरी तरह प्रतिबंधित है। प्रशासन का कहना है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा मुद्दों और विकास के विजन पर आधारित होनी चाहिए, न कि नकारात्मक प्रचार पर।
जुलूस, सभाएं और ध्वनि विस्तारक के नियम
चुनावी प्रचार के दौरान जुलूस निकालने, सभा करने या ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग करने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा के बाहर लाउडस्पीकर या डीजे का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। सार्वजनिक सड़कों, सरकारी भवनों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाने के नियम भी तय हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया प्रचार भी निगरानी में
इस बार सोशल मीडिया भी चुनाव प्रचार का बड़ा माध्यम बना रहेगा। प्रशासन और निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भी आचार संहिता लागू होगी। भ्रामक वीडियो, आपत्तिजनक पोस्ट, झूठे आरोप या किसी की छवि खराब करने वाली सामग्री पर कड़ी नजर रखी जाएगी। शिकायत मिलने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई संभव है।
प्रशासन की तैयारी और निगरानी
चुनाव प्रचार के दौरान प्रशासन द्वारा विशेष निगरानी दल, फ्लाइंग स्क्वायड और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे। इनका उद्देश्य प्रचार गतिविधियों पर नजर रखना, शिकायतों का त्वरित निपटारा करना और निष्पक्ष माहौल बनाए रखना होगा। प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मतदाताओं की भी अहम भूमिका
चुनाव केवल उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि मतदाताओं का भी पर्व है। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह के प्रलोभन, दबाव या अफवाह से प्रभावित न हों। उम्मीदवारों के वादों, कार्यों और व्यवहार का आकलन कर सोच-समझकर मतदान करें। जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतंत्र की नींव होते हैं।
न्यूज़ देखो: चुनावी जोश में संयम ही लोकतंत्र की असली कसौटी
चुनाव प्रचार लोकतंत्र की जीवंतता को दर्शाता है, लेकिन यही समय सबसे अधिक संयम और जिम्मेदारी की मांग करता है। नियमों का पालन कर किया गया प्रचार न केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है, बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत करता है। अब देखना होगा कि उम्मीदवार चुनावी जोश में कितनी मर्यादा और जिम्मेदारी का परिचय देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जिम्मेदार प्रचार से ही बनेगा भरोसेमंद नेतृत्व
चुनाव का उत्साह लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन नियमों की अनदेखी इसकी कमजोर कड़ी बन सकती है। उम्मीदवार हों या समर्थक, सभी का दायित्व है कि प्रचार को सकारात्मक और मुद्दा आधारित रखें। नागरिक भी सजग रहें, सवाल पूछें और सही उम्मीदवार चुनें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और जिम्मेदार मतदान के लिए दूसरों को भी प्रेरित करें।







