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डुमरी (गुमला)। स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सहिया, सहिया साथी और बीटीटी पिछले कई महीनों से आर्थिक बदहाली का सामना कर रही हैं। 4 से 5 महीने से मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं होने के कारण इनके परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसी को लेकर सहिया एवं सामुदायिक प्रशिक्षक संघ, झारखंड की गुमला जिला इकाई ने चिकित्सा पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की है।
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- 4–5 महीने से सहियाओं का मानदेय और प्रोत्साहन राशि लंबित
- भुगतान प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाने का आरोप
- सहिया ऐप और नेटवर्क समस्या के बावजूद निजी मोबाइल से कार्य
- सहिया रेस्ट रूम को जिला व प्रखंड स्तर पर क्रियाशील करने की मांग
- शीघ्र भुगतान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
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मांग पत्र में सहिया संघ ने बताया कि लगातार कई महीनों से भुगतान नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं के लिए घर-परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। दैनिक जरूरतों की पूर्ति तक में परेशानी हो रही है, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।
सहियाओं का कहना है कि मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को अत्यधिक जटिल बना दिया गया है। सहिया ऐप में तकनीकी खामियों, डेटा एंट्री की समस्याओं और कमजोर नेटवर्क के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन इसका खामियाजा कार्यकर्ताओं को भुगतान रोककर भुगतना पड़ रहा है।
संघ ने यह भी बताया कि विभाग की ओर से न तो मोबाइल और न ही टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद सहिया अपने निजी मोबाइल और संसाधनों से सरकारी कार्यों को पूरा कर रही हैं, फिर भी उन्हें समय पर मेहनताना नहीं मिल पा रहा है।
इसके साथ ही जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक सहिया रेस्ट रूम को क्रियाशील करने की मांग की गई है, ताकि कार्यकर्ताओं को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और उन्हें बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।
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सहिया, सहिया साथी और बीटीटी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं। टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं की जानकारी और क्रियान्वयन में इनकी भूमिका अहम है। लंबे समय तक मानदेय नहीं मिलने से न केवल इनका मनोबल टूट रहा है, बल्कि इसका सीधा असर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था को और प्रभावित कर सकती है।
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सहिया संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए लंबित राशि का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराकर सहियाओं को सम्मानजनक कार्य वातावरण दिया जाए, ताकि वे पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।





