
#गिरिडीह #संगठनात्मक_विस्तार : सर्वसम्मति से हुई नियुक्ति से मजदूर किसान आंदोलन को मिलेगी नई मजबूती।
गिरिडीह में झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन ने संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अहम फैसला लिया है। यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो ने अशोक कुमार महतो को सर्वसम्मति से केंद्रीय सचिव नियुक्त किया। यह निर्णय मजदूरों, किसानों और प्रवासी श्रमिकों के हितों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। संगठन का मानना है कि इस नियुक्ति से जमीनी स्तर पर संघर्ष को नई गति मिलेगी।
- अशोक कुमार महतो को झाएकिमयू का केंद्रीय सचिव नियुक्त किया गया।
- नियुक्ति पत्र केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो ने सौंपा।
- खैंरा टुंडा, तेलियां टुंडा निवासी हैं नवनियुक्त पदाधिकारी।
- वर्तमान पता धामनकर नाका, भिवंडी, जिला ठाणे बताया गया।
- प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई।
- संगठन में इस निर्णय को दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।
झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन (झाएकिमयू) ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। गिरिडीह से जुड़ी इस घोषणा में यूनियन नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में मजदूर और किसान मुद्दों पर संघर्ष और संवाद दोनों को समान महत्व दिया जाएगा। सर्वसम्मति से हुई इस नियुक्ति को संगठन के भीतर सकारात्मक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। यूनियन का फोकस अब झारखंड से लेकर देश के औद्योगिक शहरों तक फैले श्रमिक समुदाय पर और मजबूत होगा।
संगठनात्मक मजबूती की दिशा में अहम निर्णय
यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष श्री गंगाधर महतो ने खैंरा टुंडा, तेलियां टुंडा निवासी अशोक कुमार महतो को केंद्रीय सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी। नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उन्होंने संगठन के प्रति निष्ठा, अनुशासन और सक्रियता पर विशेष जोर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि यह पद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संघर्ष और समन्वय दोनों की बड़ी जिम्मेदारी है।
गंगाधर महतो ने कहा: “अशोक कुमार महतो एक जमीनी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें मजदूरों और किसानों की समस्याओं की गहरी समझ है। हमें विश्वास है कि उनकी सक्रिय भूमिका से संगठन को नई मजबूती मिलेगी और मजदूर–किसान हितों की लड़ाई और प्रभावी होगी।”
यूनियन के नियम और सिद्धांतों के पालन पर जोर
नियुक्ति के साथ ही केंद्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट निर्देश दिया कि केंद्रीय सचिव के रूप में अशोक कुमार महतो को यूनियन के नियमों, सिद्धांतों और अनुशासन का पूरी निष्ठा से पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों की समस्याओं का समाधान आंदोलन के साथ-साथ संवाद के माध्यम से किया जाए।
औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधन और प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर शांतिपूर्ण और प्रभावी समाधान निकालने की रणनीति अपनाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही औद्योगिक विकास के साथ मजदूरों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न करने की बात कही गई।
प्रवासी मजदूरों के हित में विशेष जिम्मेदारी
इस नियुक्ति के साथ अशोक कुमार महतो को झारखंड के प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुंबई, भिवंडी, डोंबिवली, उल्हासनगर, पुणे सहित देश के कई औद्योगिक और महानगर क्षेत्रों में हजारों झारखंडी मजदूर कार्यरत हैं। ये मजदूर मजदूरी, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आवास और सम्मान से जुड़ी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
यूनियन का मानना है कि प्रवासी मजदूरों की समस्याएं केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की चिंता का विषय हैं। ऐसे में केंद्रीय सचिव की भूमिका इन मुद्दों को एकजुट कर मजबूत मंच देने में अहम होगी।
नवनियुक्त केंद्रीय सचिव की प्रतिक्रिया
पदभार ग्रहण करने के बाद अशोक कुमार महतो ने केंद्रीय अध्यक्ष और संगठन के सभी पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस जिम्मेदारी को सम्मान के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण बताया।
अशोक कुमार महतो ने कहा: “यह पद मेरे लिए सम्मान है, लेकिन उससे बड़ी जिम्मेदारी भी है। मैं मजदूरों, किसानों और प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाऊंगा और संगठन को गांव-गांव से लेकर उद्योग–कल कारखानों तक मजबूत करूंगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूनियन का उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं है, बल्कि संवाद, समाधान और सम्मान के जरिए मजदूर–किसान हितों की रक्षा करना है। इसके लिए प्रशासन, औद्योगिक प्रबंधन और समाज के सभी वर्गों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
संगठन के भविष्य को लेकर उम्मीदें
अशोक कुमार महतो की केंद्रीय सचिव के रूप में नियुक्ति को झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के लिए सकारात्मक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि उनके अनुभव और जमीनी जुड़ाव से यूनियन की गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी।
झारखंड सहित देशभर में मजदूर–किसान आंदोलन को मजबूत करने, प्रवासी श्रमिकों की आवाज बुलंद करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए यह नियुक्ति मील का पत्थर साबित हो सकती है।
न्यूज़ देखो: मजदूर किसान संगठन में नेतृत्व का सशक्त विस्तार
यह खबर दिखाती है कि झारखंड में मजदूर–किसान संगठनों के भीतर नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास हो रहे हैं। जमीनी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देना संगठन की दूरदर्शिता को दर्शाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रवासी मजदूरों के मुद्दों पर ठोस पहल कितनी तेजी से होती है। संगठन और प्रशासन के बीच संवाद की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी नजर रहेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संगठित संघर्ष से ही सुरक्षित भविष्य की राह
मजदूर और किसान किसी भी समाज की रीढ़ होते हैं। जब संगठन मजबूत होते हैं, तो आवाज भी मजबूत होती है। यह नियुक्ति केवल एक पद नहीं, बल्कि हजारों श्रमिकों की उम्मीदों से जुड़ा कदम है।
अब समय है सजग रहने का, संगठित होने का और अधिकारों के प्रति जागरूक बनने का।
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