#लावालौंग #शिक्षक_आंदोलन : प्रखंड बैठक में रणनीति—मुख्यमंत्री आवास घेराव की तैयारी।
चतरा के लावालौंग प्रखंड में सहायक शिक्षकों की बैठक आयोजित कर आंदोलन की रणनीति बनाई गई। शिक्षकों ने सरकार पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। बैठक में 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास घेराव का निर्णय लिया गया। बड़ी संख्या में शिक्षकों से रांची पहुंचने की अपील की गई।
- सहायक शिक्षकों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
- लावालौंग प्रखंड में बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनी।
- 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास घेराव का निर्णय।
- शिक्षकों से रांची पहुंचने की अपील।
- कई शिक्षक नेताओं की बैठक में भागीदारी।
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड में सहायक शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। झारखंड आकलन पास और प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघ के बैनर तले आयोजित इस बैठक में शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 18 अप्रैल को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
बैठक में उभरा शिक्षकों का आक्रोश
बैठक में मौजूद शिक्षकों ने कहा कि वर्तमान सरकार ने चुनाव के दौरान पारा शिक्षकों को स्थायी करने और वेतनमान देने का वादा किया था, लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हुआ।
जागेश्वर महतो ने कहा: “सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है, जिससे शिक्षक निराश हैं।”
मानदेय बढ़ोतरी का मुद्दा
शिक्षकों ने बताया कि वार्ता के दौरान मानदेय बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अशोक ठाकुर ने कहा: “सरकार के झूठे वादों से शिक्षक अब आंदोलन के लिए मजबूर हैं।”
राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी
संघ के अनुसार, राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों में बैठक कर आंदोलन की तैयारी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक इसमें शामिल हो सकें।
18 अप्रैल को घेराव का निर्णय
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 18 अप्रैल को रांची में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
शिक्षकों ने कहा: “यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं।”
शिक्षकों से भागीदारी की अपील
संघ के नेताओं ने सभी सहायक शिक्षकों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में रांची पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएं।
बैठक में शामिल शिक्षक
इस बैठक में ब्रजेश यादव, संजय साव, संतोष पांडेय, रंजन यादव, सतेंद्र राम, दिलीप साव, साबित गंझु सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।
सरकार और शिक्षकों के बीच बढ़ता तनाव
इस मुद्दे को लेकर सरकार और शिक्षकों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना है।
न्यूज़ देखो: वादों पर खड़ा होना जरूरी
लावालौंग की यह बैठक दिखाती है कि जब वादे पूरे नहीं होते, तो असंतोष बढ़ता है। अब सवाल यह है कि सरकार इस मुद्दे को कैसे संभालेगी और क्या कोई समाधान निकलेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपने अधिकार के लिए आवाज उठाएं
शिक्षा समाज की नींव है, और शिक्षक उसका आधार।
जरूरी है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए।
अगर कहीं अन्याय हो रहा है, तो आवाज उठाना जरूरी है।
आइए, हम सभी मिलकर न्याय और अधिकार की बात करें।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाएं।
