
#लावालौंग #बालविवाहजागरूकता : ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया।
चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड क्षेत्र में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया गया। विभिन्न पंचायतों में आयोजित ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को बाल विवाह के सामाजिक, शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई। हेडुम पंचायत सचिवालय में आयोजित सभा में पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मियों और ग्रामीणों ने भाग लेकर बाल विवाह समाप्त करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाकर बच्चों के सुरक्षित और बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करना था।
- लावालौंग प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में ग्राम सभा के माध्यम से चलाया गया बाल विवाह विरोधी अभियान।
- हेडुम पंचायत सचिवालय में आयोजित ग्राम सभा में ग्रामीणों को बाल विवाह के दुष्परिणामों से किया गया अवगत।
- मुखिया संतोष राम ने बाल विवाह को समाज के विकास में बड़ी बाधा बताते हुए इसे रोकने की अपील की।
- पंचायत सचिव रामानुज संतोष ने सरकार के कानून और योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को दी।
- ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों ने मिलकर बाल विवाह समाप्त करने का सामूहिक संकल्प लिया।
लावालौंग प्रखंड क्षेत्र में समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में विभिन्न पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन कर ग्रामीणों को इस गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति जागरूक किया गया। हेडुम पंचायत सचिवालय में आयोजित ग्राम सभा में पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने समाज से इस कुप्रथा को समाप्त करने का सामूहिक संकल्प भी लिया।
ग्राम सभा में जागरूकता अभियान
लावालौंग प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में आयोजित ग्राम सभाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करना था। हेडुम पंचायत सचिवालय में आयोजित सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने बाल विवाह के कारण होने वाले सामाजिक और व्यक्तिगत नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम उम्र में शादी होने से बच्चों की शिक्षा अधूरी रह जाती है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही बाल विवाह से बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।
सभा में मौजूद लोगों को यह भी बताया गया कि सरकार द्वारा बाल विवाह रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं और यदि कहीं इस तरह की घटना की जानकारी मिलती है तो तुरंत प्रशासन को सूचना देना जरूरी है।
बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा
ग्राम सभा के दौरान वक्ताओं ने बाल विवाह के सामाजिक, शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाल विवाह से बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट जाती है, जिससे वे अपने जीवन में आगे बढ़ने के अवसर खो देते हैं।
इसके अलावा कम उम्र में विवाह होने से विशेषकर लड़कियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। कम उम्र में गर्भधारण से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी कारण सरकार और सामाजिक संस्थाएं लगातार बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही हैं।
समाज के सहयोग से ही संभव है रोकथाम
ग्राम सभा में पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि बाल विवाह को रोकने के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है।
मुखिया संतोष राम ने कहा:
संतोष राम ने कहा: “बाल विवाह समाज के विकास में बड़ी बाधा है। इसे रोकने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा और अगर कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत प्रशासन को जानकारी देनी चाहिए।”
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने बच्चों की शादी केवल कानूनी उम्र के बाद ही करें और उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दें।
सरकार की योजनाओं की दी गई जानकारी
ग्राम सभा में पंचायत सचिव रामानुज संतोष ने भी ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सरकार की ओर से चलाए जा रहे कानून और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना और उन्हें बेहतर जीवन देना है।
रामानुज संतोष ने कहा: “सरकार द्वारा बाल विवाह रोकने के लिए कई कानून और योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करना है और समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करना है।”
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वयं भी जागरूक रहें और आसपास के लोगों को भी इस विषय में जागरूक करें, ताकि समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
ग्राम सभा में लिया गया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों ने बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक संकल्प लिया। सभी ने यह वादा किया कि वे अपने परिवार और समाज में बाल विवाह नहीं होने देंगे और यदि कहीं इस तरह की घटना की जानकारी मिलेगी तो तुरंत प्रशासन को सूचित करेंगे।
इस अवसर पर पंचायत के अन्य कर्मी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित रहे। ग्राम सभा के माध्यम से लोगों में जागरूकता बढ़ाने की यह पहल ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
न्यूज़ देखो: जागरूक समाज ही रोक सकता है बाल विवाह
लावालौंग प्रखंड में ग्राम सभाओं के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ चलाया गया यह अभियान ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जब पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण मिलकर किसी सामाजिक बुराई के खिलाफ संकल्प लेते हैं तो उसका प्रभाव दूर तक दिखाई देता है। बाल विवाह केवल एक परिवार की समस्या नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास में बाधा है। ऐसे अभियानों की निरंतरता ही इस कुप्रथा को समाप्त करने का रास्ता दिखा सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक समाज ही सुरक्षित भविष्य की पहचान
बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब परिवार अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देते हैं, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।
यदि हम सचमुच एक स्वस्थ और शिक्षित समाज बनाना चाहते हैं तो हमें बाल विवाह जैसी परंपराओं को छोड़कर बच्चों को बेहतर अवसर देने होंगे।






