धान अधिप्राप्ति योजना के तहत सिमडेगा में जागरुकता रथ रवाना, खरीफ विपणन मौसम 2025-26 की जानकारी पहुंचेगी गांव-गांव

धान अधिप्राप्ति योजना के तहत सिमडेगा में जागरुकता रथ रवाना, खरीफ विपणन मौसम 2025-26 की जानकारी पहुंचेगी गांव-गांव

author Birendra Tiwari
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#सिमडेगा #कृषि_योजना : उपायुक्त ने धान अधिप्राप्ति योजना की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
  • उपायुक्त कंचन सिंह ने समाहरणालय परिसर से जागरुकता रथ को किया रवाना।
  • खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत जिले में चल रहे धान खरीद अभियान की दी जाएगी जानकारी।
  • किसानों को एमएसपी ₹2369 और राज्य सरकार का ₹81 प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा।
  • कुल ₹2450 प्रति क्विंटल का भुगतान एकमुश्त और समय पर किए जाने की व्यवस्था।
  • सिमडेगा जिले में 16 सरकारी धान अधिप्राप्ति केंद्र स्थापित।
  • ई-उपार्जन मोबाइल ऐप और 4G ई-पॉस मशीन से सुरक्षित व पारदर्शी खरीद प्रक्रिया।

सिमडेगा जिले में धान अधिप्राप्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों को खरीफ विपणन मौसम वर्ष 2025-26 की पूरी जानकारी देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उपायुक्त कंचन सिंह ने समाहरणालय परिसर से जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरुकता रथ जिले के सुदूरवर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों को सरकारी धान खरीद प्रक्रिया, मूल्य, पंजीकरण और भुगतान व्यवस्था की जानकारी देगा। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने अभियान को और अधिक गंभीरता प्रदान की।

जागरुकता रथ से किसानों तक पहुंचेगी सरकारी योजना की जानकारी

धान अधिप्राप्ति योजना के अंतर्गत रवाना किया गया यह जागरुकता रथ खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के दौरान जिले भर में भ्रमण करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को यह बताना है कि वे किस प्रकार सरकारी अधिप्राप्ति केंद्रों पर अपना धान बेचकर न्यूनतम समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे बोनस का पूरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि जानकारी के अभाव में कई किसान बिचौलियों के चंगुल में फंस जाते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

15 दिसंबर से शुरू हुई धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया

उपायुक्त ने जानकारी दी कि सिमडेगा जिले में धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया 15 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हो चुकी है। इस अभियान के तहत किसानों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2369 प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से ₹81 प्रति क्विंटल बोनस भी प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार किसानों को कुल ₹2450 प्रति क्विंटल का भुगतान सुनिश्चित किया गया है, जिसे एकमुश्त और समय पर उनके खाते में भेजा जाएगा।

जिले में 16 अधिप्राप्ति केंद्र, तकनीक से होगी पारदर्शिता

धान खरीद को सुचारु और पारदर्शी बनाने के लिए सिमडेगा जिले में कुल 16 सरकारी अधिप्राप्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। उपायुक्त ने बताया कि किसान ई-उपार्जन मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं। इसी ऐप के जरिए स्लॉट बुकिंग और भुगतान की स्थिति की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।

सभी अधिप्राप्ति केंद्रों पर 4G ई-पॉस मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे लेन-देन पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी रहेगा।

किसानों से बिचौलियों से बचने की अपील

जागरुकता रथ को रवाना करते समय उपायुक्त कंचन सिंह ने किसानों से विशेष अपील की:

उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा: “किसान अपना धान सीधे सरकारी अधिप्राप्ति केंद्रों पर ही बेचें, ताकि उन्हें एमएसपी और बोनस का पूरा लाभ मिल सके और वे बिचौलियों से बच सकें।”

उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन किसानों की सुविधा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रशासनिक अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर अपर समाहर्ता ज्ञानेन्द्र, जिला आपूर्ति पदाधिकारी नरेश रजक और जिला पंचायती राज पदाधिकारी दयानंद कार्जी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने जागरुकता अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने की बात कही।

न्यूज़ देखो: किसानों के हित में प्रशासन की सक्रिय पहल

यह खबर दर्शाती है कि सिमडेगा जिला प्रशासन किसानों को उनके अधिकार और लाभ से जोड़ने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है। जागरुकता रथ के माध्यम से जानकारी का सीधा प्रसार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। यदि किसान सरकारी व्यवस्था से जुड़ेंगे तो पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका स्वतः समाप्त होगी। अब जरूरत है कि इस अभियान का लाभ हर किसान तक पहुंचे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक किसान ही सशक्त खेती की पहचान

जब किसान सही जानकारी से लैस होते हैं, तभी खेती लाभ का सौदा बनती है। सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ लेने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। सिमडेगा का यह प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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सिमडेगा

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