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मानव-वन्यजीव संघर्ष पर ग्राम पिंजरा डिपा में जागरूकता कार्यक्रम, निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी से ग्रामीण हुए जागरूक

#पालकोट #गुमला #मानववन्यजीव_संघर्ष : ग्राम पिंजरा डिपा में विधिक जागरूकता व संरक्षण पर विशेष कार्यक्रम आयोजित।

गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत बाघिमा पंचायत के ग्राम पिंजरा डिपा में मानव-वन्यजीव संघर्ष विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला द्वारा संचालित हुआ। इसमें ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण, संघर्ष के कारण और निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजागरूकता बढ़ाकर मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन स्थापित करना रहा।

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  • ग्राम पिंजरा डिपा, बाघिमा पंचायत में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
  • कार्यक्रम NALSA नई दिल्ली एवं JHALSA रांची के दिशा-निर्देशन में संपन्न।
  • DLSA गुमला के तत्वावधान में ग्रामीणों को कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी।
  • पीएलवी राजू साहू ने संघर्ष के कारण, दुष्परिणाम और बचाव उपाय समझाए।
  • ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए ऐसे कार्यक्रम जारी रखने की मांग की।

गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की बाघिमा पंचायत स्थित ग्राम पिंजरा डिपा में रविवार को मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली तथा झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA), रांची के दिशा-निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गुमला के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के कारणों, प्रभावों और कानूनी उपायों के प्रति जागरूक करना था।

विधिक प्राधिकार के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

यह जागरूकता कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला के अध्यक्ष श्री ध्रुव चंद्र मिश्रा एवं सचिव श्री रामकुमार लाल गुप्ता के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का विषय ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है और इस पर जागरूकता की अत्यधिक आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान विधिक सेवा से जुड़े प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को बताया कि वन क्षेत्रों से सटे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक दृष्टि से गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों पर विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम में पीएलवी राजू साहू ने ग्रामीणों को मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों और उसके दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का अर्थ मनुष्यों और जंगली जानवरों के बीच होने वाली नकारात्मक अंतःक्रियाओं से है, जो मुख्य रूप से वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, आवास के नुकसान तथा प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण उत्पन्न होती हैं।

राजू साहू ने कहा:

मानव-वन्यजीव संघर्ष से जन-धन की हानि, फसलों का नुकसान, स्वास्थ्य जोखिम और वन्यजीवों की प्रतिशोधात्मक हत्या जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि जंगलों के सिकुड़ते क्षेत्र और बढ़ती मानव गतिविधियों के कारण वन्यजीवों का गांवों की ओर रुख बढ़ रहा है, जिससे संघर्ष की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं।

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ग्रामीणों को संरक्षण और समन्वय का संदेश

जागरूकता सत्र के दौरान ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि दोनों ही पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं।

ग्रामीणों को यह भी सलाह दी गई कि जंगली जानवरों की गतिविधि वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतें, रात में अनावश्यक रूप से जंगल या सुनसान क्षेत्रों में न जाएं तथा सामूहिक रूप से सुरक्षा उपाय अपनाएं। साथ ही, वन विभाग और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर किसी भी घटना की सूचना तुरंत देने पर जोर दिया गया।

निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गुमला द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी देना भी रहा। ग्रामीणों को बताया गया कि जरूरतमंद, गरीब और वंचित वर्ग के लोग विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

अधिकारियों ने समझाया कि वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी घटनाओं में मुआवजा, शिकायत और कानूनी प्रक्रिया के लिए भी विधिक सहायता उपलब्ध है, जिसका लाभ ग्रामीण आसानी से उठा सकते हैं। इससे ग्रामीणों में कानूनी जागरूकता बढ़ी और उन्होंने इन सेवाओं के प्रति सकारात्मक रुचि दिखाई।

सक्रिय भागीदारी से सफल रहा कार्यक्रम

कार्यक्रम में ग्राम पिंजरा डिपा के ग्रामीणों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। संवादात्मक वातावरण के कारण ग्रामीणों ने खुलकर प्रश्न पूछे और समाधान से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।

ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि लोगों में निरंतर जागरूकता बनी रहे और भविष्य में संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।

पर्यावरण और समाज के लिए महत्वपूर्ण पहल

यह कार्यक्रम न केवल विधिक जागरूकता बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि समय रहते जागरूकता और समन्वय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़े सामाजिक और पारिस्थितिक संकट का रूप ले सकता है।

इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा, जागरूकता और कानूनी समझ को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है और वन्यजीवों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

न्यूज़ देखो: जागरूकता से ही कम होगा मानव-वन्यजीव संघर्ष

ग्राम पिंजरा डिपा में आयोजित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष केवल वन विभाग का विषय नहीं, बल्कि सामुदायिक जागरूकता का भी प्रश्न है। विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा कानूनी सहायता और जागरूकता का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अत्यंत सराहनीय पहल है। अब जरूरी है कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं और स्थानीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति और मानव के संतुलन की जिम्मेदारी हम सभी की

वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव जीवन की सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
जागरूकता ही वह माध्यम है जिससे संघर्ष को रोका जा सकता है और सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकता है।
आइए, पर्यावरण संरक्षण और कानूनी जागरूकता को अपनी आदत बनाएं और गांव स्तर पर संवाद को मजबूत करें।
ऐसी सकारात्मक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए जागरूक बनें, दूसरों को भी प्रेरित करें और समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और जागरूक समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

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Rohit Kumar Sahu

पालकोट, गुमला

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