
#गुमला #राष्ट्रीयबालिकादिवस : सेमरा गांव में विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में जागरूकता अभियान आयोजित।
राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत सेमरा गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन नालसा नई दिल्ली और झालसा रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को बालिकाओं के अधिकार, उनके संरक्षण से जुड़े कानून और सामाजिक कुरीतियों के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान पीएलवी द्वारा कानूनी जानकारी देकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने पर बल दिया गया।
- राष्ट्रीय बालिका दिवस पर सेमरा ग्राम, कोलेंग पंचायत में जागरूकता कार्यक्रम।
- आयोजन नालसा और झालसा के निर्देश पर डालसा गुमला के तत्वावधान में।
- पीएलवी राजू साहू ने बालिका अधिकारों व कानूनों की दी जानकारी।
- लिंग जांच, भ्रूण हत्या और बाल विवाह को बताया दंडनीय अपराध।
- डालसा गुमला की ओर से निशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी साझा।
राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर पालकोट प्रखंड के सेमरा गांव में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने ग्रामीणों को बालिकाओं के अधिकारों और कानूनों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। कोलेंग पंचायत अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और विषय को गंभीरता से सुना। आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए कानूनी जानकारी को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
नालसा और झालसा के निर्देश पर हुआ आयोजन
यह जागरूकता कार्यक्रम नालसा, नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के दिशा-निर्देशन में तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गुमला के तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन डालसा गुमला के अध्यक्ष माननीय श्री ध्रुव चंद्र मिश्रा एवं सचिव श्री रामकुमार लाल गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। उनके निर्देशन में जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक कानूनी जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
बालिकाओं के अधिकारों पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान पीएलवी (पैरालीगल वॉलंटियर) श्री राजू साहू ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बालिकाओं के अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान और कानून में बालिकाओं को समान अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार दिया गया है। समाज की जिम्मेदारी है कि इन अधिकारों की रक्षा की जाए और किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त किया जाए।
लिंग जांच और भ्रूण हत्या पर सख्त कानून
पीएलवी राजू साहू ने ग्रामीणों को लिंग जांच और भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक अपराधों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि ये दोनों कृत्य कानूनन अपराध हैं और इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।
उन्होंने कहा:
“लिंग जांच और भ्रूण हत्या न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के भविष्य के लिए भी घातक है।”
ग्रामीणों को बताया गया कि इन अपराधों के कारण समाज में लैंगिक असंतुलन पैदा होता है, जिसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ता है।
बाल विवाह रोकथाम कानून की जानकारी
कार्यक्रम में बाल विवाह रोकथाम अधिनियम पर भी विशेष चर्चा की गई। पीएलवी ने बताया कि कम उम्र में विवाह करना दंडनीय अपराध है और इसमें शामिल सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा और भविष्य को प्राथमिकता दें तथा कानून का पालन करें।
निशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी
ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गुमला द्वारा गरीब, असहाय, महिलाओं, बच्चों और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या होने पर लोग डालसा गुमला से संपर्क कर मुफ्त कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इस जानकारी से ग्रामीणों में कानूनी संस्थाओं के प्रति भरोसा बढ़ा।
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने पूरे ध्यान से जानकारी सुनी और सवाल भी पूछे। कई ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि उन्हें पहले इन कानूनों की पूरी जानकारी नहीं थी। जागरूकता कार्यक्रम की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन गांव-गांव में होने चाहिए, ताकि समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर किया जा सके।
सामाजिक सोच बदलने की पहल
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज में बालिकाओं के प्रति सोच बदलना भी रहा। वक्ताओं ने कहा कि जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक कानून का पूर्ण प्रभाव नहीं दिखेगा। बालिकाओं को समान अवसर, शिक्षा और सम्मान देना ही सशक्त समाज की पहचान है।
न्यूज़ देखो: कानून से जागरूकता, सोच से बदलाव
सेमरा गांव में आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि जमीनी स्तर पर कानूनी जागरूकता कितनी जरूरी है। नालसा और डालसा जैसी संस्थाओं की पहल से ग्रामीण समाज में कानून के प्रति भरोसा बढ़ रहा है। बालिकाओं के अधिकारों पर केंद्रित ऐसे आयोजन सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रखते हैं। क्या ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता से सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बेटियों के अधिकार, समाज की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि बेटियों का सम्मान और संरक्षण केवल कानून की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है। जागरूक बनें, गलत परंपराओं का विरोध करें और कानून का साथ दें।
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