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21 साल बाद लौटे अयोध्या सिंह, मानसिक रूप से कमजोर होने का फायदा उठाकर काम कराए जाने की दर्दनाक कहानी सामने आई

#गढ़वा #समाजऔरमानवता : डंडई प्रखंड के रारो गांव में 21 साल बाद लौटे अयोध्या सिंह ने बताई आपबीती, परिवार और गांव में खुशी की लहर
  • अयोध्या सिंह 2004 में घर से मजदूरी के लिए निकले थे और 21 साल तक लापता रहे।
  • उनके मानसिक असंतुलन का फायदा उठाकर कई जगहों पर बिना मजदूरी काम कराया गया।
  • पिछले छह साल तक वे कोलकाता में रहे और हाल ही में एक ट्रक ड्राइवर की मदद से घर लौटे।
  • रारो गांव में लौटने की खबर से पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल फैल गया।
  • उनके परिवार में पत्नी और बच्चे सहित ग्रामीणों ने लौटकर आने की खुशी में आँसू बहाए।

2004 में अयोध्या सिंह अपने कुछ साथियों के साथ मजदूरी के लिए घर से निकले थे, लेकिन बिहार के डेहरी में उनके साथी से बिछड़ जाने के कारण उनका संपर्क टूट गया। उनके पास न मोबाइल था, न कोई पहचान पत्र, जिससे आधुनिक दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया। परिजन और गांववालों ने हर संभव खोजबीन की, लेकिन किसी भी तरह की जानकारी नहीं मिल सकी।

गांव लौटने की खुशी और पहचान में कठिनाई

अयोध्या सिंह के घर लौटने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और पूरा गांव उन्हें देखने उमड़ पड़ा। 21 साल के लंबे अंतराल के कारण वे न तो गांववालों को पहचान पाए और न ही लोग उन्हें। इस मिलन ने परिजनों और गांववालों को भावुक कर दिया। परिजन अपने बेटे को देखकर फफक-फफक कर रो पड़े, जबकि ग्रामीणों की आंखों में भी आँसू थे।

21 साल की दर्दनाक आपबीती

अयोध्या सिंह ने बताया कि बिछड़ने के बाद उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो गया था। पेट भरने के लिए उन्होंने कई जगहों पर मजदूरी की, लेकिन कई जगहों पर लोग उन्हें बंधक बनाकर काम कराते थे। मजदूरी नहीं दी जाती थी, केवल खाना दिया जाता था। उन्होंने बताया कि नाम और पता बताने के बावजूद किसी ने उन्हें घर पहुँचाने में मदद नहीं की।

अयोध्या सिंह ने कहा: “जहां भी मैं काम करता था, लोग मुझे वहीं रख लेते थे और जाने नहीं देते थे। मैं भागने की कई कोशिशें की, लेकिन न मोबाइल था, न पैसे।”

इंसानियत की मिसाल

पिछले छह साल से वे कोलकाता के डायमंड हार्बर, मदर हाट ब्रिज के नीचे स्थित माँ काली होटल में रहते और काम करते रहे। कुछ दिन पहले उनकी मुलाकात बिहार के एक ट्रक ड्राइवर से हुई, जिसने उनकी कहानी सुनी और इंसानियत दिखाते हुए उन्हें ट्रक से घर तक पहुंचाया। इसी कारण अयोध्या सिंह आखिरकार 21 साल बाद अपने गांव रारो, चिनुखरा टोला लौट आए।

न्यूज़ देखो: लापता व्यक्तियों की वापसी में समुदाय और इंसानियत की अहमियत

अयोध्या सिंह की कहानी बताती है कि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों का फायदा उठाना कितना दर्दनाक हो सकता है। वहीं, इंसानियत दिखाने वाले एक ट्रक ड्राइवर की मदद ने उनके परिवार और गांव को पुनः मिलन की खुशी दी। प्रशासन और समाज को ऐसे मामलों में सतर्क रहना चाहिए और हानि पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

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Shashi Bhushan Mehta

डंडई, गढ़वा

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