बाबा बंशीधर महोत्सव में अश्लीलता से हिंदू आस्था का अपमान हुआ है: रितेश चौबे

बाबा बंशीधर महोत्सव में अश्लीलता से हिंदू आस्था का अपमान हुआ है: रितेश चौबे

author News देखो Team
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  • बाबा बंशीधर महोत्सव को लेकर झामुमो सरकार पर भाजपा का हमला
  • रंगारंग आर्केस्ट्रा प्रोग्राम में अश्लील गानों का आरोप
  • हिन्दू समाज की आस्था से खिलवाड़ करने का आरोप
  • सरकारी बजट के दुरुपयोग का भी लगाया आरोप
  • मौके पर विधायक प्रतिनिधि डॉ. लाल मोहन रूपु महतो और कई कार्यकर्ता उपस्थित

झामुमो सरकार पर गंभीर आरोप

गढ़वा जिला भाजपा मीडिया प्रभारी रितेश चौबे ने झामुमो सरकार पर बाबा बंशीधर महोत्सव के नाम पर हिन्दू आस्था का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि झामुमो सरकार ने बाबा बंशीधर महोत्सव को झामुमो महोत्सव बना दिया, जिसमें धार्मिक कार्यक्रम के बजाय अश्लील गानों से भरा रंगारंग आर्केस्ट्रा प्रोग्राम कराया गया।

रितेश चौबे ने कहा, “जहां भगवान का उत्सव होता है, वहां धार्मिक आयोजन होना चाहिए, लेकिन झामुमो सरकार ने आस्था का मजाक बनाया है।

भाजपा शासनकाल के कार्यक्रम की तुलना

रितेश चौबे ने याद दिलाया कि 2017 में भाजपा सरकार के दौरान बाबा बंशीधर महोत्सव का आयोजन भव्य और दिव्य रूप से हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय कम बजट में भी शानदार कार्यक्रम हुआ था, लेकिन आज जब राजकीय महोत्सव का दर्जा मिल चुका है और अधिक राशि भी उपलब्ध है, तब भी कार्यक्रम में केवल खानापूर्ति हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि, “सरकारी राशि के बंदरबांट के कारण आयोजन का स्वरूप बिगड़ गया है।

जनता में नाराजगी

रितेश चौबे ने बताया कि महोत्सव स्थल पर अश्लील गीतों के कारण हंगामा हुआ और पुलिस बल को लाठीचार्ज तक करना पड़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार ने बाबा बंशीधर का गुणगान नहीं किया, जिससे आम जनता और हिन्दू समाज आहत है।

चौबे ने कहा, “झामुमो सरकार में बैठे लोग इस महोत्सव को अपना पार्टी कार्यक्रम समझ बैठे हैं, जिससे आम जनमानस में निराशा है।

मौके पर उपस्थित लोग

इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर विधायक प्रतिनिधि डॉ. लाल मोहन रूपु महतो, मनोज जायसवाल सहित कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस कृत्य की आलोचना की और भविष्य में धार्मिक आयोजनों को पारंपरिक और गरिमामय रूप में आयोजित करने की मांग की।

बाबा बंशीधर महोत्सव को लेकर उठे सवाल प्रशासन और सरकार के लिए एक गंभीर संदेश हैं। क्या धार्मिक आयोजनों में आस्था का सम्मान और पारंपरिक संस्कारों का पालन नहीं होना चाहिए? क्या बजट बढ़ने के बाद भी सांस्कृतिक गरिमा की रक्षा नहीं हो पा रही है? न्यूज़ देखो इन सवालों को आपके सामने लाता रहेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नज़र!

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