
#विश्रामपुर #पलामू #गणतंत्रदिवस : विश्वविद्यालय परिसर में ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान और विचारपूर्ण संबोधनों से गूंजा वातावरण।
पलामू जिले के विश्रामपुर स्थित बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समारोह में मुख्य अतिथि गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ. जे. एफ. केन्डी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और संबद्ध संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन के माध्यम से संविधान के मूल्यों, नागरिक कर्तव्यों और राष्ट्रनिर्माण में शिक्षा की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
- बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, विश्रामपुर में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन।
- मुख्य अतिथि डॉ. जे. एफ. केन्डी, सिविल सर्जन गढ़वा द्वारा ध्वजारोहण।
- कुलाधिपति दिनेश प्रसाद सिंह और कुलपति प्रो. एम. के. सिंह की सक्रिय सहभागिता।
- संविधान, कर्तव्य और राष्ट्रनिर्माण पर विचारोत्तेजक संबोधन।
- शिक्षकों, छात्रों और ट्रस्ट पदाधिकारियों की व्यापक उपस्थिति।
पलामू जिले के विश्रामपुर स्थित बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय परिसर में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन पूरे उल्लास, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के साथ किया गया। सुबह ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन ने वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। विश्वविद्यालय परिसर में उपस्थित प्रत्येक वर्ग ने इस राष्ट्रीय पर्व को संविधान के प्रति सम्मान और कर्तव्यों के संकल्प के रूप में मनाया।
मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण और संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. जे. एफ. केन्डी, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं सिविल सर्जन, गढ़वा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के पश्चात उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
डॉ. जे. एफ. केन्डी ने कहा: “गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें हमारे अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी निरंतर याद दिलाता है। संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता और न्याय तभी सार्थक हैं, जब हम ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व निभाएं।”
उन्होंने विश्वविद्यालय एवं ट्रस्ट द्वारा संचालित महाविद्यालयों के शैक्षणिक एवं सामाजिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थान राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला होते हैं।
विश्वविद्यालय प्रबंधन की सहभागिता
इस गरिमामय अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं ट्रस्ट के संस्थापक व अध्यक्ष श्री दिनेश प्रसाद सिंह तथा कुलपति प्रो. एम. के. सिंह ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम में सहभागिता निभाई। कुलपति प्रो. एम. के. सिंह ने मुख्य अतिथि, कुलाधिपति, ट्रस्ट पदाधिकारियों, विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्षों, संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं तथा रेहला प्रेरणा परमार्थ आश्रम से पधारे परमार्थियों का स्वागत किया।
उन्होंने सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता पर बल दिया।
कुलाधिपति का आह्वान
श्री दिनेश प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय एवं ट्रस्ट परिवार के सभी सदस्यों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि:
“हम सभी का दायित्व है कि हम अपने संस्थागत और सामाजिक दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करें तथा राष्ट्रहित में सेवा और समर्पण की भावना के साथ कार्य करें।”
उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय सहभागिता और शिक्षा के माध्यम से समाज के उत्थान पर विशेष जोर दिया।
कुलपति का विचारोत्तेजक संबोधन
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एम. के. सिंह ने अपने संबोधन में देश की आज़ादी के लिए बलिदान देने वाले सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ ही भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
प्रो. एम. के. सिंह ने कहा: “यह दिवस हमें संविधान निर्माताओं, विशेषकर डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के अमूल्य योगदान को स्मरण करने का अवसर देता है। आज भारत शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है।”
उन्होंने डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत @2047 जैसे राष्ट्रीय संकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति में युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अजय भूषण प्रसाद, सीईओ श्री सुभाष कुमार, सहायक कुलसचिव, विभिन्न महाविद्यालयों एवं विभागों के प्राचार्यगण—डॉ. मनीष दुबे, डॉ. पी. डी. तिवारी, डॉ. पंकज कुमार सहित अनेक प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त प्रवीण कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, पंकज कुमार सिन्हा, अभिषेक सिंह नायर, एन. के. प्रसाद सहित विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं समारोह का हिस्सा बने।
कार्यक्रम का संचालन
पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ. पी. डी. तिवारी द्वारा किया गया, जिन्होंने मंच संचालन के माध्यम से कार्यक्रम को गरिमामय और अनुशासित रूप प्रदान किया।

न्यूज़ देखो: शिक्षा संस्थानों में संविधान चेतना का सशक्त उदाहरण
बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह यह दर्शाता है कि उच्च शिक्षा संस्थान केवल अकादमिक केंद्र नहीं, बल्कि संविधानिक मूल्यों के संवाहक भी हैं। विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और छात्रों की सक्रिय भागीदारी सराहनीय रही। ऐसे आयोजन युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करते हैं। शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संविधान से संकल्प तक, युवाओं की भूमिका निर्णायक
गणतंत्र दिवस हमें अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।
शिक्षा, अनुशासन और सेवा से ही राष्ट्र सशक्त बनता है।
युवा शक्ति देश का भविष्य है, जिसकी दिशा आज तय हो रही है।
संविधान के मूल्यों को जीवन में उतारना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस संदेश को आगे बढ़ाएं, अपनी राय साझा करें और राष्ट्रनिर्माण की चर्चा को मजबूत करें।







