
#कोलेबिरा #मंदिर_संरक्षण : सड़क चौड़ीकरण की जद में आए बजरंगबली मंदिर को बचाने के लिए सर्वसम्मत पहल की गई।
कोलेबिरा प्रखंड के रण बहादुर सिंह चौक स्थित बजरंगबली मंदिर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के कारण अस्तित्व संकट का सामना कर रहा है। मनोहरपुर हाट–गम्हरिया मुख्य सड़क के विस्तार के दायरे में आने पर मंदिर को तोड़ने का नोटिस मिला है, जिससे क्षेत्र के सनातनी समाज में गहरी चिंता व्याप्त है। इसी को लेकर मंदिर प्रांगण में एक आवश्यक बैठक आयोजित कर मंदिर प्रबंधन समिति सह संघर्ष समिति का गठन किया गया। बैठक में प्रशासन से वैकल्पिक समाधान की मांग करते हुए मंदिर को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया।
- रण बहादुर सिंह चौक स्थित बजरंगबली मंदिर को मिला तोड़ने का नोटिस।
- मनोहरपुर हाट–गम्हरिया सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में मंदिर।
- मंदिर प्रांगण में आवश्यक बैठक कर समिति का गठन।
- उपेंद्र प्रसाद अध्यक्ष, धनंजय प्रसाद सचिव, चंदन कुमार कोषाध्यक्ष निर्वाचित।
- 11 सदस्यीय कमेटी का सर्वसम्मति से गठन।
- जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर वैकल्पिक समाधान की मांग का निर्णय।
कोलेबिरा प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र में स्थित रण बहादुर सिंह चौक का बजरंगबली मंदिर वर्षों से स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। हाल ही में मनोहरपुर हाट–गम्हरिया सड़क के चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान यह मंदिर परियोजना की जद में आ गया है। प्रशासन की ओर से मंदिर को तोड़ने का नोटिस मिलने के बाद क्षेत्र में धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और लोगों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए मंदिर प्रांगण में स्थानीय धर्मप्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य मंदिर को टूटने से बचाने के लिए संगठित प्रयास करना और प्रशासन के समक्ष एकजुट होकर अपनी बात रखना था। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि लाखों सनातनी हिंदू माता-बहनों की आस्था, विश्वास और परंपरा का प्रतीक है।
मंदिर प्रबंधन समिति सह संघर्ष समिति का गठन
बैठक में सर्वसम्मति से मंदिर प्रबंधन समिति सह संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति के गठन का उद्देश्य प्रशासन से संवाद स्थापित करना, वैकल्पिक समाधान सुझाना और आवश्यकता पड़ने पर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना है। सर्वसम्मति से उपेंद्र प्रसाद को समिति का अध्यक्ष, धनंजय प्रसाद को सचिव तथा चंदन कुमार को कोषाध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही 11 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया, जिसमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है ताकि निर्णय सामूहिक और संतुलित रूप से लिए जा सकें।
प्रशासन से संवाद की रणनीति
समिति की पहली प्राथमिकता प्रशासन से सीधे संवाद स्थापित करना तय किया गया है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि समिति का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही जिला उपायुक्त महोदय से मुलाकात कर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से यह अपील की जाएगी कि स्थानीय जनता की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिर को न तोड़ा जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सड़क निर्माण एक आवश्यक विकास कार्य है, लेकिन इसके लिए ऐसा विकल्प खोजा जाए जिससे मंदिर सुरक्षित रह सके।
वैकल्पिक समाधान पर जोर
बैठक में मौजूद लोगों ने सुझाव दिया कि यदि सड़क चौड़ीकरण अपरिहार्य है, तो उसके लिए वैकल्पिक मार्ग या डिज़ाइन पर विचार किया जा सकता है। विशेष रूप से यह प्रस्ताव रखा गया कि सड़क को डाक बंगला की ओर थोड़ा स्थानांतरित कर दिया जाए, जिससे सड़क निर्माण भी हो सके और मंदिर को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। समिति ने यह भी कहा कि मंदिर समिति प्रशासन द्वारा सुझाए गए अन्य व्यावहारिक विकल्पों में सहयोग करने को तैयार है, बशर्ते मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
आस्था और परंपराओं से जुड़ा है मंदिर
रण बहादुर सिंह चौक स्थित बजरंगबली मंदिर केवल दैनिक पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र रहता है। यहां रामनवमी का जलसा, अखंड हरी कीर्तन, भंडारा, दुर्गा पूजा सहित अनेक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते हैं। इन आयोजनों में कोलेबिरा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में मंदिर को तोड़ने की संभावना ने लोगों की भावनाओं को गहराई से प्रभावित किया है।
शांतिपूर्ण विरोध का निर्णय
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि प्रशासन द्वारा कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकाला जाता है, तो समिति और स्थानीय लोग पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे। समिति ने दो टूक कहा कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद और समाधान है। फिर भी, मंदिर की रक्षा के लिए अपनी मांग सरकार के सामने मजबूती से रखी जाएगी।
न्यूज़ देखो: विकास और आस्था के बीच संतुलन की चुनौती
कोलेबिरा की यह घटना एक बार फिर विकास परियोजनाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करती है। सड़क चौड़ीकरण जैसे कार्य क्षेत्रीय विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन इन्हें लागू करते समय स्थानीय समाज की आस्था और भावनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। प्रशासन के सामने यह अवसर है कि वह संवाद और संवेदनशीलता के साथ ऐसा समाधान निकाले जो विकास और विश्वास दोनों को सुरक्षित रखे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था की रक्षा में एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत
बजरंगबली मंदिर को बचाने की यह पहल बताती है कि जब समाज संगठित होता है, तो उसकी आवाज़ मजबूत बनती है। विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। शांतिपूर्ण संवाद, सकारात्मक सुझाव और सामूहिक प्रयास ही किसी भी समस्या का स्थायी समाधान निकाल सकते हैं।
अब समय है कि नागरिक सजग रहें, मुद्दों को समझें और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखें





