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बालमुकुंद फैक्ट्री जीएम पर फर्जी मुकदमे का आरोप, माले नेता राजेश सिन्हा ने मुफस्सिल थाना में दिया लिखित आवेदन

#गिरिडीह #श्रमिक_संघर्ष : बालमुकुंद फैक्ट्री से जुड़े केस 20/26 की निष्पक्ष जांच की मांग तेज।

गिरिडीह में बालमुकुंद स्पांज आयरन फैक्ट्री से जुड़े कथित फर्जी मुकदमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने फैक्ट्री के जीएम के विरुद्ध मुफस्सिल थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपा है। आवेदन में केस नंबर 20/26 के सभी आरोपों को फर्जी बताते हुए सीसीटीवी फुटेज से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस मामले ने श्रमिक आंदोलन, प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी विरोध कार्यक्रमों को लेकर क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक माहौल को और सक्रिय कर दिया है।

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  • भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने मुफस्सिल थाना प्रभारी को सौंपा लिखित आवेदन।
  • केस नंबर 20/26 के सभी आरोपों को बताया गया फर्जी
  • घटना की सीसीटीवी जांच कराने की लिखित मांग।
  • 17 फरवरी को विरोध मार्च और जनसभा की घोषणा।
  • 12 फरवरी भारत बंद में किसानों के समर्थन में माले के खड़े रहने की जानकारी।

गिरिडीह जिले में औद्योगिक इकाइयों और स्थानीय जनता के बीच चल रहे विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बालमुकुंद स्पांज आयरन फैक्ट्री के जीएम पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाते हुए भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने मुफस्सिल थाना प्रभारी को लिखित आवेदन दिया है। इस आवेदन के माध्यम से उन्होंने न केवल केस नंबर 20/26 की निष्पक्ष जांच की मांग की, बल्कि फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

लिखित आवेदन में क्या कहा गया

माले नेता राजेश सिन्हा द्वारा दिए गए लिखित आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि केस नंबर 20/26 में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह फर्जी हैं। आवेदन में मांग की गई है कि पूरे घटनाक्रम की जांच सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

आवेदन में यह भी बताया गया कि संबंधित दिन पिकेट पुलिस मौके पर पहुंची थी, लेकिन उसका उद्देश्य केवल वार्ता के लिए उपस्थित लोगों के नाम एकत्र करना था। राजेश सिन्हा के अनुसार:

राजेश सिन्हा ने कहा: “हम लोगों ने लिखित रूप में अपना पक्ष दिया था। जब फैक्ट्री के जीएम ने सुबह दस बजे आने की बात कहकर भी मुलाकात नहीं की, तो हम लोग वहां से अपने घरों की ओर लौट गए।”

कई स्तरों पर दिया गया आवेदन

राजेश सिन्हा ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने केवल थाना तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने बताया कि यह लिखित आवेदन श्रम कार्यालय, फैक्ट्री प्रबंधन और उपायुक्त गिरिडीह को भी सौंपा गया है।

इसके अलावा वे गिरिडीह अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय भी पहुंचे थे। वहां शाम के समय गोपनीय शाखा द्वारा आवेदन देने को कहा गया, लेकिन आवेदक का घर लगभग 10 किलोमीटर दूर होने के कारण वह दोबारा आवेदन नहीं दे सके।

आंदोलन ही एकमात्र सहारा

माले नेता ने अपने आवेदन और बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वे जनता के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने कहा:

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राजेश सिन्हा ने कहा: “हम लोग जनता के काम के लिए जाने जाते हैं। इसके बावजूद अगर फैक्ट्री प्रबंधन बार-बार हमारे खिलाफ फर्जी मुकदमे करता है, तो आंदोलन ही एकमात्र सहारा बचता है। प्रशासन और न्यायालय पर हमें भरोसा है, और आंदोलन हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अब फर्जी मुकदमों के जवाब में प्रदूषण के मामलों को लेकर आम जनता की ओर से मुकदमे कराए जाएंगे।

पहले भी लगे हैं फर्जी मुकदमे के आरोप

राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि बालमुकुंद फैक्ट्री के जीएम द्वारा लगातार ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं। हाल के दिनों में भी ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज होने की बात कही गई है, जिससे इलाके में आक्रोश व्याप्त है।

इन्हीं आरोपों के विरोध में 17 फरवरी 2026 को बालमुकुंद फैक्ट्री के खिलाफ विरोध मार्च और जनसभा आयोजित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि 12 फरवरी 2026 को भारत बंद के दौरान भाकपा माले किसानों के समर्थन में मजबूती से खड़ी रहेगी। इन सभी कार्यक्रमों की जानकारी लिखित रूप में जिला प्रशासन को दिए जाने की बात कही गई है।

पुलिस प्रशासन का पक्ष

इस पूरे मामले पर मुफस्सिल थाना प्रभारी ने भी अपना पक्ष रखा है। थाना प्रभारी ने कहा:

मुफस्सिल थाना प्रभारी ने कहा: “मामले की बारीकियों की जांच सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से कराई जाएगी।”

उन्होंने बताया कि मुफस्सिल थाना परिसर के अंदर ही पिकेट थाना स्थित है। जांच के आदेश के लिए उन्होंने पिकेट प्रभारी को लिखित लेटर सौंप दिया है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

आगे क्या होगा

अब यह मामला पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और जन आंदोलन—तीनों स्तरों पर आगे बढ़ता दिख रहा है। जहां एक ओर माले आंदोलन और विरोध मार्च की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन सीसीटीवी जांच के माध्यम से तथ्यों को स्पष्ट करने की बात कर रहा है।

न्यूज़ देखो: फर्जी मुकदमे बनाम लोकतांत्रिक आंदोलन

बालमुकुंद फैक्ट्री से जुड़ा यह विवाद स्थानीय उद्योगों और जनता के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है। यदि आरोप सही हैं, तो फर्जी मुकदमे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का माध्यम बनते जा रहे हैं। वहीं प्रशासन द्वारा सीसीटीवी जांच का फैसला पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच और आंदोलन दोनों के परिणाम इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

न्याय, पारदर्शिता और लोकतंत्र की परीक्षा

लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन जनता का अधिकार है, लेकिन न्याय तभी संभव है जब जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो। गिरिडीह का यह मामला प्रशासन, उद्योग और जनता—तीनों के लिए एक कसौटी है।
अब देखना है कि सच सामने आता है या नहीं और जनता को न्याय मिलता है या नहीं।
आप इस पूरे घटनाक्रम को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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