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5-डे बैंकिंग की मांग को लेकर गढ़वा में बैंककर्मियों का जोरदार आंदोलन, पैदल मार्च के साथ एकदिवसीय हड़ताल

#गढ़वा #बैंकिंग_हड़ताल : पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग पर बैंककर्मियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया।

गढ़वा जिले में मंगलवार को देशव्यापी आह्वान के तहत बैंककर्मियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर एकदिवसीय हड़ताल की। हड़ताल के दौरान जिले की अधिकांश बैंक शाखाएं बंद रहीं और बैंककर्मियों ने रंका मोड़ से पैदल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में जिले की 86 बैंक शाखाओं के कर्मियों ने भाग लिया, जिससे बैंकिंग कार्य प्रभावित हुआ। बैंक यूनियनों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

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  • गढ़वा जिले में 5-डे बैंकिंग की मांग को लेकर एकदिवसीय हड़ताल।
  • रंका मोड़ से आईडीबीआई बैंक होते हुए निकाला गया पैदल मार्च।
  • आंदोलन में 86 बैंक शाखाओं के बैंककर्मी शामिल।
  • हड़ताल से करीब 300 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर।
  • एआईपीएनबीओएफ सहित विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारी रहे मौजूद।

देशभर में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था (5-डे बैंकिंग) लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को गढ़वा जिले में बैंककर्मियों ने एकदिवसीय हड़ताल कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही जिले की अधिकांश बैंक शाखाएं बंद रहीं, जिससे आम ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के समर्थन में बैंककर्मियों ने पैदल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

रंका मोड़ से निकला पैदल मार्च, गूंजे नारे

हड़ताल के दौरान बैंककर्मियों ने रंका मोड़ से एकजुट होकर पैदल मार्च की शुरुआत की। यह मार्च आईडीबीआई बैंक, मझिआंव मोड़ होते हुए पुनः रंका मोड़ पर आकर संपन्न हुआ। मार्च के दौरान बैंककर्मी हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और “इंकलाब जिंदाबाद”, “5-डे बैंकिंग लागू करो”, “बैंककर्मियों की मांगें पूरी करो” जैसे नारों के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे थे।

मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें बैंककर्मियों का आक्रोश और दृढ़ संकल्प साफ झलक रहा था। सड़क किनारे खड़े लोग भी इस प्रदर्शन को उत्सुकता से देखते नजर आए।

क्यों उठ रही है 5-डे बैंकिंग की मांग

बैंककर्मियों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), नाबार्ड, आईआरडीएआई और वित्त मंत्रालय सहित कई केंद्रीय संस्थानों में पहले से ही पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है। इसके बावजूद बैंकिंग सेक्टर में अब तक छह दिवसीय कार्य व्यवस्था जारी है।

बैंक यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में 5-डे बैंकिंग को लेकर संबंधित पक्षों के बीच एग्रीमेंट भी हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी भारत सरकार द्वारा इसे लागू करने में लगातार देरी की जा रही है। इस संबंध में प्रस्तावित फाइल अब भी वित्त मंत्रालय में लंबित बताई जा रही है।

एक बैंककर्मी ने कहा:

“जब अन्य केंद्रीय संस्थानों में पांच दिन काम हो सकता है, तो बैंकों में क्यों नहीं? हम भी इंसान हैं, हमें भी परिवार और समाज के लिए समय चाहिए।”

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86 शाखाएं बंद, 300 करोड़ के कारोबार पर असर

हड़ताल के कारण गढ़वा जिले की 86 बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बैंक यूनियनों के अनुसार इस एकदिवसीय हड़ताल से जिले में लगभग 300 करोड़ रुपये के बैंकिंग कारोबार पर असर पड़ा है।

बैंक बंद रहने के कारण खाताधारकों को नकद निकासी, जमा, चेक क्लियरेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि बैंककर्मियों ने ग्राहकों से असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यह आंदोलन उनकी जायज मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए जरूरी है।

बैंक यूनियनों का तर्क और चेतावनी

बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों ने कहा कि 5-डे बैंकिंग लागू होने से न केवल बैंककर्मियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा, बल्कि बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिसका सीधा लाभ ग्राहकों को भी मिलेगा।

यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

आंदोलन में ये प्रमुख चेहरे रहे शामिल

इस हड़ताल और पैदल मार्च में विभिन्न बैंकों और यूनियनों के पदाधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए। प्रमुख रूप से एआईपीएनबीओएफ के अध्यक्ष राहुल कांत तिवारी, आलोक कुमार सिंह, अल्फ्रेड फ्रांसिस मिंज, विकास शर्मा मौजूद रहे।

इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया से रमन कुमार सिंह, आबिद रजा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से अनुराग आनंद, सुमंत कुमार, रवि राज दान, संजय कुमार, पुष्कर केशरी, आशीष सोनी, सैलेंडर कुमार तिवारी, उत्तम सहित बड़ी संख्या में बैंककर्मियों ने आंदोलन में भाग लिया।

ग्राहकों और आम जनता की प्रतिक्रिया

बैंक बंद रहने से ग्राहकों को असुविधा जरूर हुई, लेकिन कई लोगों ने बैंककर्मियों की मांग को उचित बताया। कुछ ग्राहकों का कहना था कि यदि इससे बैंककर्मियों की कार्यक्षमता और सेवा गुणवत्ता बेहतर होती है, तो सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

न्यूज़ देखो: बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर सवाल

गढ़वा में बैंककर्मियों का यह आंदोलन देशभर में चल रही 5-डे बैंकिंग की मांग को मजबूती देता है। जब अन्य सरकारी और वित्तीय संस्थानों में यह व्यवस्था लागू है, तो बैंकों को इससे अलग रखना कई सवाल खड़े करता है। सरकार और वित्त मंत्रालय को इस लंबित मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लेना होगा। बैंकिंग सुधार तभी सार्थक होंगे, जब कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों के हितों का संतुलन बने। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बैंकिंग सुधार के लिए संवाद जरूरी

बैंक देश की आर्थिक रीढ़ हैं और बैंककर्मी उसका आधार।
उनकी कार्य परिस्थितियों का सीधा असर सेवा गुणवत्ता पर पड़ता है।
सरकार को संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
आप क्या सोचते हैं—5-डे बैंकिंग जरूरी है या नहीं?
कमेंट करें, खबर साझा करें और इस अहम मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाएं।

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Sonu Kumar

गढ़वा

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