
#बरवाडीह #जलसंकट : एक साल से खराब जलमीनार—पेयजल समस्या के बीच प्राथमिकताओं पर विवाद।
लातेहार के बरवाडीह पंचायत में जलमीनार पिछले एक वर्ष से बंद है, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत के बावजूद सुधार नहीं होने का आरोप लगाया है। इस बीच पंचायत सचिवालय की मरम्मत पर खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।
- शहीद भगत सिंह चौक के पास जलमीनार एक साल से खराब।
- ग्रामीणों ने मुखिया और बीडीओ से कई बार की शिकायत।
- गर्मी में पेयजल संकट गहराया।
- सचिवालय भवन की मरम्मत पर खर्च को लेकर सवाल।
- शशि भूषण तिवारी ने जांच और कार्रवाई की मांग की।
बरवाडीह पंचायत में पेयजल संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहीद भगत सिंह चौक के पास 15वें वित्त आयोग की योजना से बना जलमीनार पिछले एक साल से बंद पड़ा है, जिससे क्षेत्र के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि गर्मी के शुरुआती दिनों में ही लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
एक साल से बंद जलमीनार
स्थानीय लोगों के अनुसार, जलमीनार लंबे समय से खराब पड़ा है और उसकी मरम्मत नहीं की जा रही है। इससे आसपास के इलाके में पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
एक ग्रामीण ने कहा: “पानी के लिए हमें दूर-दूर जाना पड़ता है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।”
शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार मुखिया और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से इस समस्या की शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।
इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
गर्मी में बढ़ी परेशानी
गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए पानी जुटाने में कठिनाई हो रही है।
प्राथमिकताओं पर उठे सवाल
इस बीच पंचायत स्तर पर जलमीनार की मरम्मत के बजाय पंचायत सचिवालय भवन की मरम्मत को प्राथमिकता दी जा रही है। यह बात लोगों के बीच असंतोष का कारण बनी हुई है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी सचिवालय भवन की मरम्मत कराई जा चुकी है, ऐसे में दोबारा मरम्मत पर सवाल उठ रहे हैं।
धन के दुरुपयोग की आशंका
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि मरम्मत कार्यों में अक्सर धन के दुरुपयोग की संभावना रहती है। यही कारण है कि इन कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा: “जरूरी काम छोड़कर गैरजरूरी मरम्मत पर पैसा खर्च किया जा रहा है।”
जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
झामुमो प्रखंड अध्यक्ष शशि भूषण तिवारी ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा—
शशि भूषण तिवारी ने कहा: “जब हाल ही में सचिवालय की मरम्मत हुई थी, तो फिर से इसकी जरूरत क्यों पड़ी?”
उन्होंने पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उपायुक्त से जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिले के उपायुक्त से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि विकास योजनाओं की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
बढ़ता जनाक्रोश
इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोग अब खुलकर प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं और जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

न्यूज़ देखो: विकास या दिखावा
बरवाडीह का यह मामला दिखाता है कि जब बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर अन्य कार्यों पर ध्यान दिया जाता है, तो जनता का भरोसा कमजोर होता है। पानी जैसी जरूरत को प्राथमिकता न देना गंभीर प्रशासनिक चूक है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पानी है जीवन, इसे प्राथमिकता दें
पेयजल हर नागरिक का मूल अधिकार है।
जरूरी है कि प्रशासन इसे प्राथमिकता में रखे।
अगर समस्या हो तो आवाज उठाना भी जरूरी है।
जागरूक नागरिक ही बदलाव ला सकते हैं।
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