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BBMKU: महिला कॉलेज की प्रिंसिपल को शो-कॉज नोटिस, नामांकन में अनियमितता का आरोप

#धनबाद #महिलाकॉलेज #नामांकन_विवाद : चांसलर के आदेश पर बीबीएमकेयू प्रशासन ने की कार्रवाई — तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का निर्देश
  • बीएसएस महिला कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. करुणा को रजिस्ट्रार ने थमाया शो-कॉज नोटिस
  • संस्कृत विभाग प्रमुख की नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन का आरोप
  • शिक्षक प्रतिनिधि चुनाव में अनुचित प्रक्रिया की शिकायत
  • राजभवन ने रजिस्ट्रार को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का दिया था निर्देश
  • प्रिंसिपल पर मनमाने तरीके से गैर-अनुमोदित शिक्षक को नामांकित करने का आरोप

नियमों के उल्लंघन पर विश्वविद्यालय प्रशासन सख्त

बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (BBMKU) में चल रहे शिक्षक प्रतिनिधि नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर बीएसएस महिला कॉलेज, धनबाद की प्रिंसिपल डॉ. करुणा को कठघरे में खड़ा किया गया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. राधमोहन त्रिपाठी ने उन्हें एक शो-कॉज नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर औपचारिक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

यह कार्रवाई डॉ. विनय ठाकुर सहित कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षकों द्वारा राजभवन को भेजी गई शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रिंसिपल ने चुनाव में गैर-अनुमोदित तरीके से संस्कृत विभाग की प्रमुख डॉ. गौरी कुमारी मुंडा को प्रतिनिधि के रूप में नामांकित किया।

विश्वविद्यालय नियमों की अनदेखी?

डॉ. ठाकुर का आरोप है कि 29 मई को नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रिंसिपल ने विश्वविद्यालय के नियमों और चुनाव दिशानिर्देशों की अनदेखी करते हुए चयन किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ गैर-अधिकृत लोगों को भी मतदाता सूची में शामिल किया गया, जिससे पूरे चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायत के अनुसार: “चयन प्रक्रिया में केवल स्वीकृत पदधारी शिक्षक ही भाग ले सकते हैं, लेकिन नामांकन एक ऐसे शिक्षक के पक्ष में किया गया जो स्वीकृत पद पर नियुक्त नहीं हैं।”

चांसलर कार्यालय ने लिया संज्ञान

राजभवन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्रार को तत्काल जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। उसी के तहत डॉ. करुणा से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नामांकित प्रतिनिधि डॉ. गौरी कुमारी मुंडा की नियुक्ति विश्वविद्यालय की मंजूरी के अधीन थी या नहीं।

जवाब से बचती दिखीं प्रिंसिपल

इस मुद्दे पर प्रिंसिपल डॉ. करुणा से प्रतिक्रिया लेने के कई प्रयास विफल रहे। न तो फोन कॉल का जवाब मिला और न ही कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने आई है। इससे मामले में और संशय उत्पन्न हो रहा है।

न्यूज़ देखो: शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता पर बड़ा सवाल

शिक्षण संस्थानों में यदि नियमों की अनदेखी और प्रक्रियाओं में अनियमितता जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, तो यह सिर्फ संस्थान की प्रतिष्ठा को ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को भी प्रभावित करता है। न्यूज़ देखो का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाए — ताकि शैक्षणिक प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास कायम रह सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों का पालन आवश्यक है। यदि आप भी इस विषय में राय रखते हैं, तो कमेंट करें, अपनी बात साझा करें और इस खबर को उन लोगों तक पहुंचाएं, जिन्हें यह जानकारी जरूरी हो सकती है।

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