Palamau

मज़दूरों के हक़ पर भाजपा सरकार का सुनियोजित हमला: मनरेगा के नाम बदले जाने के विरोध में कांग्रेस ने खोला मोर्चा

#पलामू #मनरेगा : नाम परिवर्तन के विरोध में कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल सिंह का कड़ा प्रतिरोध।

पलामू कांग्रेस के जिला प्रवक्ता गोपाल सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कदम मजदूरों के रोज़गार अधिकारों को कमजोर करने की सुनियोजित साज़िश है। इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा बचाओ अभियान को और तेज करने की घोषणा की। यह मुद्दा ग्रामीण मजदूरों के हितों से सीधे जुड़ा हुआ है।

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  • कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल सिंह ने केंद्र सरकार पर मजदूर विरोधी नीति का आरोप लगाया।
  • मनरेगा का नाम बदलकर वी बी जी राम जी रखे जाने पर जताई नाराजगी।
  • नाम परिवर्तन को महात्मा गांधी की विचारधारा पर हमला बताया गया।
  • योजना के बजट में कटौती और भुगतान में देरी से मजदूर वर्ग प्रभावित।
  • कांग्रेस द्वारा राष्ट्रव्यापी स्तर पर मनरेगा बचाओ अभियान जारी।

पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल सिंह ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा के समान है। यह योजना केवल रोजगार देने का माध्यम नहीं, बल्कि गरीबों और मजदूरों के आत्मसम्मान की रक्षा करने वाली सबसे मजबूत सरकारी पहल रही है।

नाम बदलने के पीछे की राजनीति

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर “वी बी जी राम जी” कर दिया है। इसका पूरा नाम “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” रखा गया है। इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए गोपाल सिंह ने कहा:

“मनरेगा का नाम बदलना भाजपा सरकार की चालाक राजनीतिक साज़िश है। इसके माध्यम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम और उनके आदर्शों को योजनाबद्ध तरीके से मिटाने की कोशिश की जा रही है।”

उनका कहना था कि महात्मा गांधी का नाम हटाना केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि उस विचार पर हमला है जिसमें श्रम को सम्मान और रोजगार को अधिकार माना गया है। भाजपा सरकार गांधी के नाम से डरती है क्योंकि गांधी का आदर्श सत्ता की तानाशाही और सामाजिक अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ी आवाज रहा है।

बजट कटौती से बढ़ी परेशानियां

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर सरकार विकसित भारत की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। मजदूरी भुगतान में देरी हो रही है, जिससे ग्रामीण मजदूरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा:

“भाजपा सरकार मजदूर हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन व्यवहार में वह मजदूरों की सबसे बड़ी ढाल मनरेगा को कमजोर करने में लगी हुई है।”

योजना को कमजोर करने से गरीब, किसान और मजदूर वर्ग पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। इससे ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और पलायन का खतरा फिर से बढ़ सकता है।

कांग्रेस की आगे की रणनीति

गोपाल सिंह ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी इस साज़िश को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा:

“मनरेगा बचाओ अभियान सड़क से संसद तक जारी रहेगा। जब तक केंद्र सरकार अपने जनविरोधी फैसले वापस नहीं लेती, तब तक यह संघर्ष चलता रहेगा।”

उन्होंने ग्रामीण मजदूरों से अपील की कि वे जागरूक रहें और अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों।

न्यूज़ देखो: गांधी विचार और मजदूर अधिकार

यह खबर बताती है कि मनरेगा का नाम बदलने का मामला केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि गहरी राजनीतिक सोच से जुड़ा हुआ मुद्दा है। कांग्रेस ने इसे मजदूरों के हितों पर हमला बताया है और सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। अब देखना होगा कि इस प्रतिरोध के बीच केंद्र सरकार का अगला कदम क्या होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों के लिए सजग नागरिक बनें

मनरेगा जैसी योजनाएं आम जनता की ताकत हैं। अपने प्रमाण पत्रों और योजनाओं के लाभ के लिए जागरूक रहें। इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें। अपनी राय कमेंट में जरूर रखें और मजदूर अधिकारों के समर्थन में आवाज बनें। लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी ही सच्चा बदलाव लाती है।

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