
#सिमडेगा #विद्युतीकरण_मांग : बरटोली, मांझा घाट, तवा पानी सहित गांवों में बिजली पहुंचाने की उठी आवाज।
सिमडेगा प्रखंड के कुलुकेरा पंचायत अंतर्गत कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बिजली नहीं पहुंच पाने का मामला सामने आया है। इस गंभीर समस्या को लेकर भाजपा नेता श्रद्धानंद बेसरा ने विद्युत कार्यपालक अभियंता से मुलाकात कर शीघ्र विद्युतीकरण की मांग रखी। ग्रामीणों की पढ़ाई, सुरक्षा और दैनिक जीवन पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई। यह मुद्दा आदिवासी एवं दुर्गम क्षेत्रों के बुनियादी विकास से सीधे जुड़ा है।
- कुलुकेरा पंचायत के कई गांव आज भी बिजली से वंचित।
- श्रद्धानंद बेसरा ने विद्युत कार्यपालक अभियंता से की औपचारिक मुलाकात।
- बरटोली, मांझा घाट, तवा पानी सहित अन्य गांवों का मामला उठाया।
- ग्रामीणों की पढ़ाई, सुरक्षा और जीवन स्तर प्रभावित।
- विद्युत विभाग ने कार्रवाई का दिया आश्वासन।
सिमडेगा जिले के कुलुकेरा पंचायत अंतर्गत बरटोली, मांझा घाट, तवा पानी सहित अन्य ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अब तक बिजली नहीं पहुंच पाने से ग्रामीणों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। आज के डिजिटल और तकनीकी युग में भी इन गांवों का अंधेरे में डूबा रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इसी गंभीर जनसमस्या को लेकर भाजपा नेता श्रद्धानंद बेसरा ने सिमडेगा के विद्युत कार्यपालक अभियंता से औपचारिक मुलाकात कर ग्रामीणों की ओर से मांग पत्र सौंपा।
दुर्गम गांवों में आज भी अंधेरा
श्रद्धानंद बेसरा ने बताया कि कुलुकेरा पंचायत के कई टोले और बसावटें आज भी विद्युतीकरण से पूरी तरह वंचित हैं। बरटोली, मांझा घाट और तवा पानी जैसे गांवों में न तो घरेलू बिजली है और न ही सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था। इससे ग्रामीणों को रात के समय भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद असुरक्षित बन जाती है।
बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर असर
ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। अंधेरे में पढ़ाई करना न केवल कठिन है, बल्कि इससे बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। वहीं रात के समय गांवों में पूर्ण अंधेरा रहने से चोरी, जंगली जानवरों और अन्य असामाजिक गतिविधियों का खतरा भी बना रहता है।
स्थल भ्रमण के बाद उठाया मुद्दा
भाजपा नेता श्रद्धानंद बेसरा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में स्वयं इन दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों का भ्रमण किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं और बिजली जैसी बुनियादी सुविधा की मांग की। बेसरा ने कहा कि सरकार की कई योजनाओं के बावजूद यदि आज भी गांव बिजली से वंचित हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
मुलाकात के दौरान श्रद्धानंद बेसरा ने विद्युत कार्यपालक अभियंता को अवगत कराया कि कई गांवों का नाम सरकारी कागजों में विद्युतीकृत दर्शाया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम बताते हुए कहा कि बिना जमीनी सर्वे और निगरानी के योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
आवेदन पत्र सौंपकर की प्राथमिकता की मांग
इस अवसर पर ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षरित आवेदन पत्र भी विद्युत विभाग को सौंपे गए, जिसमें बरटोली, मांझा घाट, तवा पानी सहित अन्य गांवों में शीघ्र विद्युतीकरण की मांग दर्ज की गई है। श्रद्धानंद बेसरा ने इन क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
विभाग का आश्वासन
विद्युत कार्यपालक अभियंता ने आवेदन पत्र प्राप्त करते हुए मामले पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
श्रद्धानंद बेसरा ने कहा: “ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों का विकास भाजपा की प्राथमिकता है। जब तक इन गांवों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा नहीं पहुंचेगी, तब तक मैं ग्रामीणों की आवाज प्रशासन और सरकार तक पहुंचाता रहूंगा।”
ग्रामीण विकास से जुड़ा मुद्दा
बिजली केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ा एक अहम आधार है। इन गांवों में विद्युतीकरण होने से न केवल जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
न्यूज़ देखो: विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि कागजी योजनाओं और जमीनी सच्चाई के बीच कितना अंतर है। सवाल यह है कि कब तक दुर्गम गांव विकास की मुख्यधारा से कटे रहेंगे। विद्युत विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अंधेरे से उजाले की ओर सामूहिक पहल जरूरी
ग्रामीण विकास तभी संभव है जब बुनियादी सुविधाएं हर गांव तक पहुंचें। बिजली हर नागरिक का अधिकार है। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और उन गांवों की आवाज बनें, जो आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं।







