भंडरिया के जेनेवा गांव में सरसों फसल प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन, आदिवासी किसानों को मिली नई कृषि तकनीक की जानकारी

भंडरिया के जेनेवा गांव में सरसों फसल प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन, आदिवासी किसानों को मिली नई कृषि तकनीक की जानकारी

author News देखो Team
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#गढ़वा #कृषिप्रक्षेत्रदिवस : जेनेवा गांव में सरसों फसल प्रत्यक्षण से किसानों को मिला वैज्ञानिक खेती का मार्गदर्शन।

गढ़वा जिले के भंडरिया प्रखंड अंतर्गत जेनेवा गांव में सरसों फसल प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सरसों अनुसंधान निदेशालय भरतपुर राजस्थान द्वारा संपोषित तथा कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी किसानों को उन्नत बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती से जोड़ना था। इससे क्षेत्र में तिलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई।

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  • भंडरिया प्रखंड के जेनेवा गांव में आयोजित हुआ सरसों प्रक्षेत्र दिवस।
  • सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर द्वारा संपोषित कार्यक्रम।
  • बिरसा भाभा सरसों किस्म का प्रत्यक्षण किया गया।
  • कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा के वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी।
  • कुल 50 किसानों ने प्रत्यक्षण में लिया भाग।
  • कार्यक्रम में 107 किसान रहे उपस्थित।

गढ़वा जिले के भंडरिया प्रखंड अंतर्गत जेनेवा पंचायत के जेनेवा गांव में दिनांक 29 जनवरी 2026 को सरसों फसल प्रक्षेत्र दिवस का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर (राजस्थान) द्वारा संपोषित तथा कृषि विज्ञान केंद्र, गढ़वा के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आमदनी बढ़ाना था।

आदिवासी उपविकास योजना के तहत पहल

कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी उपविकास योजना के अंतर्गत किया गया, जिसमें सरसों की उन्नत किस्मों का प्रत्यक्षण कर किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित किया गया। इस योजना के तहत जेनेवा गांव के कुल 50 किसानों के खेतों में सरसों के उत्तम प्रभेद का प्रत्यक्षण किया गया, जिससे किसान वास्तविक खेतों में परिणाम देखकर सीख सकें।

उन्नत बीज और पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर

कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा के वरीय वैज्ञानिक महेश चन्द्र जराई ने कार्यक्रम के दौरान योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरसों की बेहतर उपज के लिए बिरसा भाभा सरसों जैसे उन्नत प्रभेद का चयन और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों को बताया कि समय पर बुआई, उचित दूरी और वैज्ञानिक विधि अपनाकर सरसों उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. बन्धनु उरांव ने किसानों को योजना का सही तरीके से लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सरसों जैसी तिलहन फसलों में सल्फर एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसका प्रयोग करने से तेल की मात्रा और उपज दोनों में वृद्धि होती है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सल्फर के उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।

प्रगतिशील किसानों का अनुभव साझा

कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान उपेंद्र सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों से आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान उन्नत बीज और सही तकनीक का उपयोग करें तो कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है। उन्होंने अन्य किसानों को भी नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रचार-प्रसार पर दिया गया जोर

कार्यक्रम का मंच संचालन कर रहे प्रगतिशील किसान ब्रजकिशोर महतो ने कहा कि अच्छे और उत्तम बीजों की जानकारी केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस तकनीक और बीजों का प्रचार-प्रसार आसपास के गांवों में भी करें, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

बड़ी संख्या में किसानों की सहभागिता

इस प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम में अनीता सिंह, सूरज मनिया देवी, दिलवासी देवी, किशोर सिंह, दशरथ सिंह सहित कुल 107 किसान उपस्थित रहे। किसानों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं साझा कीं और सरसों की खेती से जुड़े सवालों के समाधान प्राप्त किए। किसानों में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह और सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम

सरसों जैसी तिलहन फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस तरह के प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम न केवल किसानों को नई तकनीक से जोड़ते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर खेती की दिशा में भी मजबूत आधार तैयार करते हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ऐसी योजनाएं किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

न्यूज़ देखो: खेती में विज्ञान की मजबूत पकड़

जेनेवा गांव में आयोजित यह प्रक्षेत्र दिवस दर्शाता है कि यदि वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर काम करें, तो खेती लाभ का साधन बन सकती है। अब देखना होगा कि इस पहल का विस्तार अन्य गांवों तक कितनी तेजी से होता है और किसान इससे कितना लाभ उठा पाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेत से खुशहाली तक का सफर

उन्नत बीज, सही तकनीक और समय पर मार्गदर्शन ही किसानों की असली ताकत है। यदि आप भी खेती से जुड़े हैं, तो ऐसी पहल को अपनाएं और दूसरों तक जानकारी पहुंचाएं। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और कृषि विकास की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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