गुमला के बंदुआ गांव में टूटी सड़क बनी ग्रामीणों की मुसीबत: 1 साल से नहीं हुई मरम्मत, बरसात में हालात और भी बदतर

गुमला के बंदुआ गांव में टूटी सड़क बनी ग्रामीणों की मुसीबत: 1 साल से नहीं हुई मरम्मत, बरसात में हालात और भी बदतर

author News देखो Team
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#गुमला #सड़क_समस्या – बंदुआ गांव की नदी किनारे संपर्क सड़क पिछले एक साल से जर्जर
  • बंदुआ गांव की संपर्क सड़क एक साल से पूरी तरह टूटी हुई
  • बरसात में सड़क बन जाती है कीचड़ और गड्ढों का दलदल
  • बीमारों को ट्रैक्टर या पिकप से अस्पताल ले जाने की मजबूरी
  • जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की टीमों ने किया सिर्फ सर्वे
  • ग्रामीणों ने ब्लॉक और जिला मुख्यालय घेराव की चेतावनी दी

एक साल से टूटी पड़ी है ग्रामीणों की जीवनरेखा

गुमला जिले के डुमरी प्रखंड के बंदुआ गांव में नदी के पास की मुख्य संपर्क सड़क पिछले एक साल से जर्जर हालात में है, जिससे गांव के सैकड़ों लोग भारी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह सड़क गांव को बाजार, अस्पताल, स्कूल और ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ने का एकमात्र माध्यम है, और इसकी खराब हालत ने ग्रामीणों के दैनिक जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

बरसात में दलदल में तब्दील हो जाती है सड़क

यह संपर्क मार्ग नदी के किनारे से गुजरता हैबरसात में जलस्तर बढ़ने और गड्ढों में पानी भरने के कारण यह सड़क कीचड़युक्त दलदल बन जाती है। स्कूली बच्चों और मजदूरों को रास्ता पार करते वक्त बार-बार फिसलने, गिरने और चोट लगने की घटनाएं होती हैं

गांव की महिला मीना देवी ने बताया: “हम रोज़ नदी पार करके बच्चों को स्कूल छोड़ते हैं। कीचड़ में फिसल जाते हैं, कई बार चप्पल तक कीचड़ में फंस जाती है।”

बीमारों को अस्पताल पहुंचाना बनता है जोखिमभरा काम

गांव के लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस अक्सर सड़क में ही फंस जाती है, जिससे गंभीर मरीजों को खटारा ट्रैक्टर या पिकप गाड़ियों में अस्पताल ले जाना पड़ता है, जो बेहद खतरनाक होता है।

ग्रामीण राजू सिंह ने कहा: “एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती, इसलिए हम खटारा गाड़ियों में मरीज को अस्पताल ले जाते हैं।”

प्रशासन की चुप्पी और जनप्रतिनिधियों की बेबसी

जनप्रतिनिधि मुन्ना केसरी ने बताया कि उन्होंने कई बार PWD और अन्य विभागों को सूचना दी, लेकिन अब तक सिर्फ सर्वे कर कार्रवाई को टाल दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, टीमें आती हैं, फोटो खींचती हैं और लौट जाती हैं, जबकि सड़क जस की तस बनी रहती है।

जनप्रतिनिधि मुन्ना केसरी ने कहा: “कई बार टीम आई, सर्वे किया, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। हम गांववालों के साथ मिलकर दबाव बना रहे हैं।”

आंदोलन की चेतावनी से बढ़ा दबाव

सड़क की मरम्मत को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर जल्द से जल्द सड़क को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे ब्लॉक और जिला कार्यालय का घेराव करेंगे

न्यूज़ देखो: सड़क पर टूटी उम्मीदें और पस्त जन-आवाज

बंदुआ गांव की नदी किनारे की टूटी सड़क सिर्फ एक संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि सैकड़ों ग्रामीणों की जीवनरेखा है। बरसात के साथ यह हालत और बदतर हो जाएगी। अफसोस की बात है कि अधिकारियों ने अब तक सिर्फ आश्वासन दिए हैं, कार्रवाई नहीं
न्यूज़ देखो उन आवाज़ों को सामने लाता है जो विकास की घोषणाओं में दबा दी जाती हैं। ग्रामीणों की हकीकत और उनके संघर्ष की खबरें हमारा दायित्व हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मिलकर उठाएं आवाज, तभी बदलेगा हाल

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