#गिरिडीह #सीबीआई_कार्रवाई : घूसखोरी शिकायत के बाद केंद्रीय जीएसटी कार्यालय में छापेमारी से मचा हड़कंप।
गिरिडीह के सेंट्रल जीएसटी कार्यालय में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी मामले में जीएसटी विभाग के सुपरिटेंडेंट और इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बिरनी निवासी राजू अंसारी की शिकायत पर धनबाद से आई सीबीआई टीम द्वारा की गई। शिकायत में टैक्स नोटिस के बदले रिश्वत मांगने और मामले को सेटल करने का आरोप लगाया गया था। कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया, जबकि माले नेता राजेश सिन्हा ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी सफलता बताया।
- सीबीआई ने गिरिडीह जीएसटी कार्यालय में की बड़ी छापेमारी।
- सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी और इंस्पेक्टर बिरजू कुमार गिरफ्तार।
- बिरनी निवासी राजू अंसारी की शिकायत पर हुई कार्रवाई।
- रिश्वत के बदले 65 हजार रुपये में तय हुआ था सौदा।
- राजेश सिन्हा ने सीबीआई एसपी से संपर्क कर मामले में निभाई भूमिका।
- करीब 13 घंटे तक चली पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी।
गिरिडीह में बुधवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई से सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया। धनबाद से पहुंची सीबीआई टीम ने बजरंग चौक स्थित सेंट्रल जीएसटी कार्यालय में छापेमारी कर रिश्वतखोरी मामले में दो अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अधिकारियों में जीएसटी सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी और इंस्पेक्टर बिरजू कुमार शामिल हैं। यह कार्रवाई बिरनी प्रखंड के खाखीपीपर निवासी राजू अंसारी की शिकायत के आधार पर की गई।
95 लाख के नोटिस के बाद शुरू हुआ विवाद
शिकायतकर्ता राजू अंसारी के अनुसार वर्ष 2023 में उनके वेंडर अनीश कुमार सेठ और गिरिडीह जीएसटी कार्यालय में पदस्थापित अधिकारियों के बीच मिलीभगत से उन्हें 95 लाख रुपये के जीएसटी टैक्स का नोटिस भेजा गया था।
बताया गया कि विभाग की ओर से तीन बार नोटिस जारी किया गया। जब राजू अंसारी मामले की जानकारी लेने जीएसटी कार्यालय पहुंचे तो उन्हें पूरे प्रकरण में गड़बड़ी का संदेह हुआ। आरोप है कि इसके बाद अधिकारियों और सीए की ओर से मामले को “सेटल” करने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई।
माले नेता राजेश सिन्हा से किया संपर्क
मामले से परेशान होकर राजू अंसारी ने माले नेता राजेश सिन्हा से संपर्क किया। राजेश सिन्हा बिरनी थाना क्षेत्र के पोखरिया गांव के निवासी हैं, जबकि राजू अंसारी खाखीपीपर गांव के रहने वाले हैं।
राजेश सिन्हा ने बताया कि उन्होंने पहले संबंधित लोगों से बातचीत कर मामले को समझने का प्रयास किया, लेकिन संदेह बढ़ने पर सीधे सीबीआई अधिकारियों से संपर्क किया।
राजेश सिन्हा ने कहा: “जनता को तंग करने वाले विभाग और एजेंट को छोड़ना मतलब सांप को दूध पिलाने जैसा है। हमारा लक्ष्य घूसखोरों का मनोबल तोड़ना है।”
उन्होंने कहा कि सीबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और मीडिया को भी सीमित जानकारी दी गई।
सीबीआई एसपी से हुई बातचीत
जानकारी के अनुसार राजू अंसारी को धनबाद स्थित सीबीआई कार्यालय भेजा गया, जहां उन्होंने पूरे मामले की जानकारी सीबीआई एसपी भंवर लाल मीणा को दी। सीबीआई के निर्देश पर रिश्वत की रकम कम कराने के लिए बातचीत कराई गई।
बताया गया कि पहले 90 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में 65 हजार रुपये पर तय किया गया। योजना के तहत राजू अंसारी बुधवार को 50 हजार रुपये लेकर गिरिडीह जीएसटी कार्यालय पहुंचे।
केमिकल लगे नोटों के साथ हुआ ट्रैप
आरोप है कि अधिकारियों ने सीधे पैसे हाथ में लेने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से रकम मंगवाई और उसे सुपरिटेंडेंट के घर भिजवा दिया। इसकी जानकारी पहले ही सीबीआई टीम को दे दी गई थी।
सीबीआई द्वारा दिए गए नोटों पर विशेष केमिकल लगाया गया था। घूस की रकम स्वीकार किए जाने की पुष्टि मिलते ही सीबीआई इंस्पेक्टर रघुनाथ कुमार के नेतृत्व में टीम ने बुधवार सुबह करीब 11 बजे जीएसटी कार्यालय में दबिश दी।
इसके बाद अधिकारियों से करीब 13 घंटे तक पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान दबाव बढ़ने पर सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी के घर से घूस की रकम बरामद की गई।
केमिकल टेस्ट में पुष्टि के बाद गिरफ्तारी
सीबीआई द्वारा किए गए केमिकल टेस्ट में रिश्वत लेने की पुष्टि होने के बाद जीएसटी सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी और इंस्पेक्टर बिरजू कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
सूत्रों के अनुसार बुद्धेश्वर सुंडी के सेवानिवृत्ति से पहले जमशेदपुर में फेयरवेल कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन उससे पहले ही सीबीआई की कार्रवाई ने पूरे विभाग को सवालों के घेरे में ला दिया।
मीडिया और सीबीआई टीम को कहा धन्यवाद
राजेश सिन्हा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में सीबीआई टीम और मीडिया की भूमिका सराहनीय रही। उन्होंने सीबीआई एसपी भंवर लाल मीणा और पूरी टीम को धन्यवाद दिया।
राजेश सिन्हा ने कहा: “यदि राजू अंसारी जैसे और लोग सामने आएं तो गिरिडीह और झारखंड से घूसखोरी को खत्म किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आम लोगों को आगे आने की जरूरत है।
न्यूज़ देखो: भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से बढ़ी उम्मीद
गिरिडीह में सीबीआई की यह कार्रवाई सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश मानी जा रही है। रिश्वतखोरी और दबाव की शिकायतों से परेशान आम लोगों के लिए यह कार्रवाई राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है। हालांकि यह भी जरूरी है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल हो। यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रही तो व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हो सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना समाज की जिम्मेदारी
जब आम नागरिक अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होते हैं तभी व्यवस्था में बदलाव संभव होता है। रिश्वतखोरी केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि लोगों का भरोसा भी कमजोर करती है। इसलिए जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और गलत मांगों के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाएं।
प्रशासन और जांच एजेंसियों की जवाबदेही जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी समाज का सहयोग भी है। एक जागरूक नागरिक ही भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की नींव रख सकता है।
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