#जपला #संस्कार_समारोह : विद्यालय में आयोजन—अंबेडकर जयंती पर बुजुर्गों का सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।
पलामू के जपला स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में अंबेडकर जयंती पर दादा-दादी और नाना-नानी सम्मान समारोह हुआ। 86 बुजुर्गों को सम्मानित किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आयोजन में पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों का संदेश दिया गया।
- जपला विद्यालय में दादा-दादी व नाना-नानी सम्मान समारोह।
- 86 बुजुर्गों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
- बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
- चरण प्रक्षालन और आरती से भावुक हुआ माहौल।
- कुशजी पाण्डेय ने शिक्षा और संस्कार पर जोर दिया।
पलामू जिले के हुसैनाबाद (जपला) स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में अंबेडकर जयंती के अवसर पर दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं की अनूठी झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं और स्थानीय लोग शामिल हुए, जिससे पूरा विद्यालय परिसर उत्सव के माहौल में डूब गया।
दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन के साथ किया गया।
एक शिक्षक ने कहा: “इस तरह के आयोजन बच्चों में संस्कृति और संस्कारों के प्रति सम्मान बढ़ाते हैं।”
बच्चों ने प्रस्तुत किए प्रेरणादायक विचार
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने डॉ. अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
एक छात्र ने कहा: “शिक्षा ही समाज को बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है।”
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन
बच्चों ने गीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
एक अभिभावक ने कहा: “बच्चों की प्रस्तुति देखकर मन गर्व से भर गया।”
बुजुर्गों का सम्मान बना आकर्षण
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बुजुर्गों का सम्मान रहा, जिसमें करीब 86 दादा-दादी और नाना-नानी को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
एक बुजुर्ग ने कहा: “इस सम्मान से हम भावुक हो गए, यह हमारे लिए बहुत खास है।”
चरण प्रक्षालन और आरती
बच्चों ने बुजुर्गों के चरण प्रक्षालन, तिलक और आरती कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
एक शिक्षक ने कहा: “इस दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया।”
संस्कार और परिवार की सीख
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को परिवार और समाज के मूल्यों से जोड़ते हैं।
एक वक्ता ने कहा: “संस्कार ही बच्चों को अच्छा इंसान बनाते हैं।”
प्रधानाचार्य का संदेश
विद्यालय के प्रधानाचार्य कुशजी पाण्डेय ने कहा—
“डॉ. अंबेडकर ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताया है।”
उन्होंने कहा: “संस्कार और शिक्षा के समन्वय से ही समरस समाज का निर्माण संभव है।”
शिक्षकों का योगदान
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समाज के लिए प्रेरणादायक आयोजन
यह कार्यक्रम न केवल एक सम्मान समारोह था, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक सशक्त संदेश भी रहा।
न्यूज़ देखो: संस्कारों की पाठशाला
जपला का यह आयोजन दिखाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कारों से भी जुड़ी है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बुजुर्गों का सम्मान करें
बुजुर्ग हमारे अनुभव का खजाना हैं।
उनका सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है।
संस्कार ही समाज की असली पहचान हैं।
आइए, हम अपने परिवार और समाज में सम्मान की भावना बढ़ाएं।
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