उत्तरी कोयल नहर में पानी छोड़ने की मांग तेज, 12 हजार एकड़ खेतों को सिंचाई मिलने की उम्मीद

उत्तरी कोयल नहर में पानी छोड़ने की मांग तेज, 12 हजार एकड़ खेतों को सिंचाई मिलने की उम्मीद

author Yashwant Kumar
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#हुसैनाबाद #सिंचाई_मांग : खरीफ खेती की तैयारी के बीच किसानों ने नहर में जल्द पानी छोड़ने की उठाई मांग।

पलामू के हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में खरीफ खेती की तैयारी के बीच उत्तरी कोयल नहर में पानी छोड़ने की मांग तेज हो गई है। जिला परिषद उपाध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने जल संसाधन विभाग को पत्र भेजकर भीम बराज से जल्द पानी प्रवाहित करने की मांग की है। नहर में पानी आने से लगभग 12 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। किसानों का कहना है कि समय पर पानी मिलने से धान की नर्सरी और खेती की तैयारी आसान होगी।

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  • आलोक कुमार सिंह ने मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर नहर में पानी छोड़ने की मांग की।
  • उत्तरी कोयल नहर से लगभग 12 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है।
  • पानी मिलने से धान की नर्सरी और बिचड़ा तैयार करने में किसानों को सुविधा होगी।
  • हुसैनाबाद, मोहम्मदगंज और हैदरनगर के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ।
  • किसानों ने मानसून से पहले नहर में पानी प्रवाहित करने की अपील की।
  • जल संसाधन विभाग के निर्णय पर टिकी हैं हजारों किसानों की निगाहें।

खरीफ मौसम की शुरुआत से पहले पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में उत्तरी कोयल नहर में पानी छोड़ने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। किसान समय पर धान की खेती की तैयारी कर सकें, इसके लिए जनप्रतिनिधियों और किसानों ने जल संसाधन विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

जिला परिषद उपाध्यक्ष सह राष्ट्रीय जिला पंचायत एसोसिएशन झारखंड प्रदेश के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने इस संबंध में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, मेदिनीनगर को पत्र भेजकर भीम बराज, मोहम्मदगंज से उत्तरी कोयल नहर में शीघ्र पानी प्रवाहित करने का आग्रह किया है।

किसानों की खेती का मुख्य आधार है उत्तरी कोयल नहर

उत्तरी कोयल नहर परियोजना हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत मानी जाती है। हर वर्ष गर्मी और खरीफ मौसम की शुरुआत में नहर में पानी छोड़े जाने से किसान धान की नर्सरी, बिचड़ा निर्माण और खेतों की तैयारी समय पर कर पाते हैं।

इस बार भी किसानों को उम्मीद है कि विभाग जल्द पानी छोड़ेगा, जिससे खेती का काम प्रभावित नहीं होगा।

आलोक कुमार सिंह ने कहा: “हर वर्ष की तरह इस बार भी उत्तरी कोयल नहर में समय पर पानी छोड़ा जाना जरूरी है, ताकि किसानों को खेती की तैयारी में किसी प्रकार की परेशानी न हो।”

12 हजार एकड़ से अधिक भूमि को मिलेगा लाभ

जानकारी के अनुसार उत्तरी कोयल नहर परियोजना से हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र की लगभग 12 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई होती है। नहर में पानी छोड़े जाने से हुसैनाबाद, मोहम्मदगंज, हैदरनगर सहित आसपास के कई क्षेत्रों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

समय पर सिंचाई सुविधा मिलने से धान की खेती में तेजी आएगी और किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की उपलब्धता खेती की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

किसानों ने जताई चिंता

स्थानीय किसानों ने कहा कि यदि मानसून आने से पहले नहर में पानी छोड़ दिया जाए तो खेतों की तैयारी सुचारू रूप से हो सकेगी। बिचड़ा निर्माण और अन्य कृषि कार्यों में भी आसानी होगी।

किसानों का कहना है कि हर साल समय पर पानी मिलने से खेती प्रभावित नहीं होती, लेकिन देरी होने पर पूरी कृषि व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। ऐसे में विभाग को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

किसानों ने कहा: “नहर में समय पर पानी आ जाए तो धान की खेती की तैयारी आसानी से हो जाएगी और किसानों को काफी राहत मिलेगी।”

विभागीय निर्णय का इंतजार

अब क्षेत्र के किसानों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें जल संसाधन विभाग के निर्णय पर टिकी हुई हैं। किसानों को उम्मीद है कि विभाग जल्द सकारात्मक कदम उठाएगा और नहर में पानी प्रवाहित किया जाएगा।

ग्रामीणों का मानना है कि सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर होगी।

खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से खरीफ फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

उत्तरी कोयल नहर क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है और इसकी नियमित जलापूर्ति खेती की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।

न्यूज़ देखो: सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी तो किसान होगा आत्मनिर्भर

झारखंड और पलामू जैसे कृषि आधारित क्षेत्रों में समय पर सिंचाई व्यवस्था किसानों के लिए सबसे बड़ी जरूरत है। उत्तरी कोयल नहर में पानी छोड़ने की मांग केवल खेती तक सीमित नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा विषय है। यदि विभाग समय रहते पहल करता है, तो किसानों को खरीफ सीजन में बड़ी राहत मिल सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जल संसाधन विभाग किसानों की इस मांग पर कितनी तेजी से निर्णय लेता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

#पानीबचेगातोखेतीबढ़ेगी : किसान की मजबूती ही गांव की समृद्धि

खेती तभी मजबूत होगी जब समय पर पानी उपलब्ध होगा।
सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने से किसान आत्मनिर्भर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनती है।
जरूरी है कि जल संसाधनों का सही उपयोग और समय पर प्रबंधन किया जाए।
किसानों की मेहनत ही देश की खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है।
आप भी किसानों और सिंचाई से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक रहें।
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Written by

हुसैनाबाद, पलामू

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