छठी मैया की आराधना के साथ संपन्न हुआ चैती छठ, डुमरी में भक्तिमय माहौल

छठी मैया की आराधना के साथ संपन्न हुआ चैती छठ, डुमरी में भक्तिमय माहौल

author Aditya Kumar
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#डुमरी #चैती_छठ : बासा नदी घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने पूर्ण किया कठिन व्रत।

डुमरी प्रखंड में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ चार दिवसीय अनुष्ठान के बाद संपन्न हो गया। बासा नदी घाट पर व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया। सुबह से घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही और पूरा वातावरण भक्ति से सराबोर रहा। इस पर्व ने क्षेत्र में आस्था, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

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  • डुमरी प्रखंड के बासा नदी घाट पर चैती छठ का समापन।
  • व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया।
  • चार दिनों तक चला कठिन निर्जला व्रत और विधि-विधान
  • घाटों पर छठ गीत, मंत्रोच्चार और जयकारों से भक्तिमय माहौल।
  • परिवार की सुख-समृद्धि और संतान उन्नति की कामना की गई।
  • प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

डुमरी प्रखंड में चैती छठ महापर्व का समापन बुधवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हो गया। चार दिनों तक चले इस कठिन और पवित्र व्रत के दौरान व्रतियों ने पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना की। अंतिम दिन तड़के सुबह से ही बासा नदी घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां व्रतियों ने जल में खड़े होकर उषा अर्घ्य दिया और अपने व्रत का समापन किया।

बासा नदी घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

चैती छठ के चौथे दिन तड़के सुबह से ही डुमरी के बासा नदी घाट पर व्रतियों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगने लगा। महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में घाट पर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की।

व्रतियों ने नदी के जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और छठी मैया से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति और निरोग जीवन की कामना की। इस दौरान घाटों पर छठ गीतों और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

चार दिनों के कठिन व्रत का हुआ समापन

चैती छठ महापर्व चार दिनों तक चलने वाला कठिन व्रत है, जिसमें शुद्धता और नियमों का विशेष महत्व होता है। इस व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रती शुद्ध भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेते हैं।

इसके बाद दूसरे दिन खरना होता है, जिसमें व्रती प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला उपवास शुरू करते हैं। तीसरे दिन डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।

सूर्य उपासना और छठी मैया का महत्व

छठ पूजा में भगवान सूर्य की उपासना के साथ उनकी शक्तियों उषा और प्रत्यूषा की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के प्रमुख स्रोत हैं।

इसलिए उनकी आराधना से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। छठी मैया को संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण की देवी माना जाता है, जिनकी पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

चैती छठ महापर्व केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति सम्मान और अनुशासन का भी प्रतीक है। नदी, तालाब और अन्य जल स्रोतों के किनारे स्वच्छता के साथ पूजा-अर्चना कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाता है।

इस दौरान श्रद्धालु घाटों की सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं, जो समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम

चार दिनों तक चले इस पवित्र व्रत के समापन के बाद व्रतियों ने छठी मैया से अगले वर्ष पुनः इस पर्व को मनाने की कामना की। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।

इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि लोक आस्था के पर्व समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने का कार्य करते हैं।

न्यूज़ देखो: आस्था, अनुशासन और प्रकृति से जुड़ाव का अद्भुत पर्व

डुमरी में चैती छठ महापर्व ने यह दर्शाया कि भारतीय परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक अनुशासित पद्धति भी हैं। इस पर्व में स्वच्छता, संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान का जो संदेश मिलता है, वह आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे आयोजनों को और व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। क्या आने वाले समय में घाटों की सुविधाओं को और बेहतर किया जाएगा, यह देखना जरूरी होगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ स्वच्छता और जागरूकता का संकल्प लें

छठ महापर्व हमें सिखाता है कि श्रद्धा के साथ अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान भी जरूरी है। ऐसे पावन अवसर पर हमें अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए।

हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह अपने धार्मिक आयोजनों को जिम्मेदारी के साथ निभाए और समाज के लिए प्रेरणा बने।

आइए, हम सब मिलकर अपने क्षेत्र को स्वच्छ, सुरक्षित और सुंदर बनाएं।

आप अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को अपने दोस्तों और परिवार तक पहुंचाएं और जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Written by

डुमरी, गुमला

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