मैकलुस्कीगंज और खलारी में श्रद्धा से मन रहा चैती छठ महापर्व, खरना के साथ शुरू हुआ कठिन व्रत

मैकलुस्कीगंज और खलारी में श्रद्धा से मन रहा चैती छठ महापर्व, खरना के साथ शुरू हुआ कठिन व्रत

author Jitendra Giri
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#खलारी #चैती_छठ : दूसरे दिन खरना परंपरा के साथ व्रतियों ने शुरू किया 36 घंटे का निर्जला उपवास।

खलारी और मैकलुस्कीगंज क्षेत्र में चैती छठ महापर्व पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जा रहा है। चार दिवसीय इस पर्व के दूसरे दिन व्रतियों ने खरना की परंपरा निभाई। दिनभर निर्जला उपवास के बाद विधि-विधान से पूजा कर प्रसाद ग्रहण किया गया। इसके साथ ही कठिन 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत हो गई है।

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  • खलारी और मैकलुस्कीगंज में चैती छठ का उत्साहपूर्ण आयोजन।
  • दूसरे दिन व्रतियों ने किया खरना अनुष्ठान
  • निर्जला उपवास के बाद खीर-रोटी का प्रसाद अर्पित।
  • 36 घंटे के कठिन व्रत की शुरुआत
  • डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी

खलारी, मैकलुस्कीगंज और आसपास के कोयलांचल क्षेत्र में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दूसरे दिन सोमवार को व्रतियों ने खरना की परंपरा पूरी की, जिसे छठ पूजा का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

सुबह से ही व्रती नदी, तालाब और अन्य जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए छठी मैया की आराधना में लीन रहे। पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर व्रतियों ने कठिन तपस्या का पालन किया।

खरना अनुष्ठान का विशेष महत्व

छठ पूजा में खरना का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को विधि-विधान से पूजा करते हैं। व्रतियों ने गुड़, चावल और दूध से बनी खीर तथा रोटी तैयार कर छठी मैया को अर्पित किया।

पूजा संपन्न होने के बाद व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण किया और इसके साथ ही 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत हो गई। यह व्रत छठ पर्व की सबसे कठिन साधनाओं में से एक माना जाता है।

प्रसाद वितरण और भक्तिमय माहौल

खरना के दौरान तैयार किए गए प्रसाद को आसपास के श्रद्धालुओं में भी वितरित किया गया। लोगों ने श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

पूरे क्षेत्र में छठी मैया के गीत और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। घर-घर में पूजा-अर्चना और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

आगे की पूजा विधि

छठ महापर्व के अगले चरण में व्रती मंगलवार की संध्या को डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे। इसके बाद बुधवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन होगा।

यह पर्व सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है और इसकी मान्यता अत्यंत व्यापक है।

आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

मान्यता है कि छठ व्रत रखने से संतान सुख, समृद्धि और जीवन की बाधाओं का निवारण होता है। विशेष रूप से खरना के दिन को अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन छठी मैया के आगमन की मान्यता है।

इस अवसर पर पूरा वातावरण श्रद्धा, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, जो इस पर्व की विशेषता है।

न्यूज़ देखो: आस्था और अनुशासन का सबसे कठिन पर्व

चैती छठ महापर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अनुशासन, तपस्या और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण भी है। आधुनिक जीवनशैली के बीच भी इस पर्व की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि परंपराएं आज भी समाज के मूल में हैं। सवाल यह भी है कि क्या हम इस आस्था के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प ले पा रहे हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ जिम्मेदारी भी निभाएं

छठ महापर्व हमें प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति सम्मान सिखाता है।

ऐसे में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम घाटों और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें।

आइए, हम सभी मिलकर इस पर्व को श्रद्धा के साथ-साथ स्वच्छता और जागरूकता के साथ मनाएं।

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Written by

खलारी, रांची

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