
#खलारी #दुर्गापूजा_विदाई : सुहागिन महिलाओं ने मांग भरकर परंपरागत रीति से माता को विदा किया।
रांची के खलारी क्षेत्र स्थित लपरा शिव मंदिर में चैती दुर्गा पूजा का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। अंतिम दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद सुहागिन महिलाओं ने सिंदूर चढ़ाकर विदाई दी। इसके बाद विसर्जन जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन में भक्ति और भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
- लपरा शिव मंदिर, मैकलुस्कीगंज में चैती दुर्गा पूजा का समापन।
- सुहागिन महिलाओं ने माता की मांग भरकर दी विदाई।
- मंदिर परिसर में खेली गई सिंदूर की होली।
- गाजे-बाजे के साथ विसर्जन जुलूस निकाला गया।
- जयप्रकाश पांडेय ने शांति अभिषिंचन कर ‘विजय जय’ उच्चारण किया।
मैकलुस्कीगंज के लपरा शिव मंदिर परिसर में चैती दुर्गा पूजा का समापन श्रद्धा, भक्ति और परंपरागत उत्साह के साथ संपन्न हुआ। नवरात्रि के अंतिम दिन मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद उन्हें भावभीनी विदाई दी गई। इस दौरान मंदिर परिसर में एक भावुक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
मांग भरकर माता को दी विदाई
विदाई के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए मां दुर्गा की मांग में सिंदूर भरा। साथ ही पान, सुपाड़ी, चूड़ा और पेड़ा का भोग अर्पित कर माता को विदा किया गया।
महिलाओं ने कहा: “माता का आशीर्वाद हमारे परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।”
इस परंपरा को अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना जाता है।
सिंदूर की होली से सजा माहौल
माता की विदाई के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर की होली खेली। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर लाल रंग से रंग गया और वातावरण में उत्सव और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
यह परंपरा महिलाओं के सौभाग्य, सुख और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
भव्य विसर्जन जुलूस का आयोजन
इसके उपरांत गाजे-बाजे के साथ विसर्जन जुलूस निकाला गया। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप और “जय माता दी” के जयकारों के साथ नगर भ्रमण करते हुए आगे बढ़े।
जुलूस में शामिल लोगों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और धार्मिक माहौल को और जीवंत बना दिया।
तालाब में हुआ विधिवत विसर्जन
नगर भ्रमण के बाद जुलूस स्थानीय विकासनगर तालाब पहुंचा, जहां विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
इस दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और सभी ने अगले वर्ष पुनः माता के आगमन की कामना की।
शांति अभिषिंचन और समापन
विसर्जन के बाद श्रद्धालु पुनः लपरा शिव मंदिर लौटे, जहां पंडित जयप्रकाश पांडेय ने शांति अभिषिंचन कराया और ‘विजय जय’ का उच्चारण किया।
यह परंपरा भविष्य में सुख, समृद्धि और विजय का आशीर्वाद मानी जाती है।
श्रद्धालुओं की रही व्यापक भागीदारी
इस पूरे आयोजन में मधुसूदन चौरसिया, विजय गुप्ता, रमेश गुप्ता, मुकेश गिरि, रूपेश चौरसिया, प्रदीप यादव, सुनील गिरि, अभिनाश पांडे, अरविंद लाल, अशोक चौरसिया, सुबोध रजक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।
सभी ने मिलकर इस आयोजन को भव्य और सफल बनाया।

न्यूज़ देखो: परंपरा और भावनाओं का अद्भुत संगम
लपरा शिव मंदिर में चैती दुर्गा पूजा का यह समापन दिखाता है कि परंपराएं आज भी लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। सिंदूर की होली और मांग भरने की रस्में न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपराओं को सहेजें, संस्कृति को आगे बढ़ाएं
हमारी परंपराएं हमारी पहचान हैं, जिन्हें हमें संजोकर रखना चाहिए।
ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम अपनी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं।
आइए, हम सभी मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाएं।
हर पर्व को प्रेम, सम्मान और आस्था के साथ मनाएं।
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