छतरपुर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, नाबालिग लड़का-लड़की का बाल विवाह रुकवाया गया

छतरपुर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, नाबालिग लड़का-लड़की का बाल विवाह रुकवाया गया

author Niranjan Kumar
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#छतरपुर #बाल_विवाह : बीडीओ और पुलिस की तत्परता से नाबालिगों की शादी रोकी गई।

पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक बाल विवाह रुकवा दिया। हुलसम पंचायत के पाटादोहर गांव में नाबालिग लड़का और लड़की की शादी कराए जाने की सूचना मिलने पर बीडीओ और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जांच में दोनों बच्चों की उम्र कम पाए जाने के बाद विवाह प्रक्रिया तत्काल रोक दी गई और परिजनों को जिला बाल संरक्षण कार्यालय के सुपुर्द किया गया।

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  • हुलसम पंचायत के पाटादोहर गांव में रुकवाया गया बाल विवाह।
  • सूचना मिलते ही बीडीओ आशीष कुमार साहू पहुंचे मौके पर।
  • पुलिस बल के साथ प्रशासन ने तत्काल रोकी विवाह प्रक्रिया।
  • जांच में लड़का और लड़की दोनों पाए गए नाबालिग।
  • दोनों बच्चों और परिजनों को भेजा गया जिला बाल संरक्षण कार्यालय।
  • प्रशासन ने लोगों से बाल विवाह रोकने में सहयोग की अपील की।

पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड में प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए एक बाल विवाह को रुकवा दिया। यह मामला हुलसम पंचायत अंतर्गत ग्राम पाटादोहर (मंझौली) का है, जहां बुधवार को नाबालिग लड़का और लड़की का विवाह कराया जा रहा था।

सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तत्काल कार्रवाई करते हुए विवाह प्रक्रिया को रुकवा दिया। इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और लोगों ने प्रशासन की तत्परता की सराहना की है।

सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन

प्राप्त जानकारी के अनुसार 07 मई 2026 को प्रशासन को सूचना मिली थी कि गांव में एक नाबालिग लड़का और लड़की की शादी कराई जा रही है।

सूचना मिलते ही बीडीओ आशीष कुमार साहू पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर विवाह की प्रक्रिया को तत्काल रोक दिया।

जांच के दौरान दोनों बच्चों की उम्र से संबंधित जानकारी जुटाई गई।

जांच में दोनों बच्चे पाए गए नाबालिग

प्रशासन द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि लड़के की उम्र लगभग 13 वर्ष 7 महीना जबकि लड़की की उम्र करीब 13 वर्ष है।

दोनों की उम्र कानूनी विवाह योग्य आयु से काफी कम होने के कारण प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए शादी रुकवा दी।

इसके बाद दोनों नाबालिगों तथा लड़की के माता-पिता को आगे की प्रक्रिया के लिए जिला बाल संरक्षण कार्यालय के सुपुर्द कर दिया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा: “बाल विवाह कानूनन अपराध है और बच्चों के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदायक भी।”

बाल विवाह को लेकर प्रशासन की अपील

कार्रवाई के बाद प्रशासन ने आम लोगों से अपील की कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को रोकने में सहयोग करें।

अधिकारियों ने कहा कि यदि कहीं भी नाबालिग बच्चों की शादी कराए जाने की सूचना मिले तो तुरंत प्रशासन या पुलिस को जानकारी दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

बाल विवाह से बच्चों का भविष्य प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। कम उम्र में विवाह होने से लड़कियों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जबकि बच्चों का भविष्य और करियर भी प्रभावित होता है।

सरकार और प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।

कानून में है सख्त प्रावधान

बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत लड़कियों की न्यूनतम विवाह योग्य आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की गई है।

कानून के तहत बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या आयोजन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।

न्यूज़ देखो: बाल विवाह रोकने में समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी

बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। प्रशासन की तत्परता से एक बड़ी सामाजिक कुप्रथा को रोका जा सका, लेकिन स्थायी समाधान के लिए समाज को भी जागरूक होना होगा। शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी से ही बाल विवाह जैसी बुराइयों को समाप्त किया जा सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों का बचपन और शिक्षा सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी

हर बच्चे को पढ़ने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार है।
कम उम्र में विवाह बच्चों के भविष्य को प्रभावित करता है।
समाज और परिवार दोनों को मिलकर ऐसी कुप्रथाओं के खिलाफ खड़ा होना होगा।

यदि कहीं बाल विवाह जैसी घटना दिखे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
इस जागरूकता भरी खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।
बच्चों के अधिकार और बेहतर भविष्य के लिए अपनी आवाज जरूर उठाएं।

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Written by

छतरपुर, पलामू

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