
#लातेहार #सड़क_हादसा : महुआडांड़–ओरसा दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को आर्थिक राहत की घोषणा।
लातेहार जिले के महुआडांड़–ओरसा सड़क पर हुए भीषण हादसे में 10 लोगों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा मानवीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सभी मृतक छत्तीसगढ़ के निवासी थे, जो एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इस फैसले से शोकाकुल परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
- महुआडांड़–ओरसा घाटी में हुई बस दुर्घटना में 10 लोगों की मौत।
- मृतकों के परिजनों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से ₹5-5 लाख की सहायता।
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने व्यक्त किया गहरा शोक।
- सभी मृतक छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के निवासी।
- झारखंड सरकार की ओर से अब तक मुआवजे की घोषणा नहीं।
लातेहार जिले के महुआडांड़–ओरसा मार्ग पर हाल ही में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में एक बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी, जिसमें 10 लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे की भयावहता और मृतकों की संख्या ने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को गहरे सदमे में डाल दिया।
छत्तीसगढ़ सरकार का मानवीय फैसला
हादसे के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को ₹5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा:
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा: “यह हादसा अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। छत्तीसगढ़ सरकार इस कठिन घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सहायता राशि मृतकों के परिजनों को शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे इस अपूरणीय क्षति के बाद आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट न जाएं।
वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे मृतक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी 10 मृतक छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के निवासी थे। वे एक रिजर्व बस से झारखंड के महुआडांड़ प्रखंड के लोध गांव में आयोजित वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे थे। ओरसा घाटी के पास बस का संतुलन बिगड़ गया और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
हादसे में मृतकों में महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे। अचानक हुई इस घटना ने कई परिवारों से उनका एकमात्र कमाने वाला सदस्य छीन लिया, जिससे उनके सामने जीवन यापन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
पीड़ित परिवारों के लिए राहत की उम्मीद
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मुआवजे की घोषणा के बाद पीड़ित परिवारों को कुछ राहत जरूर मिली है। हालांकि, परिजन यह भी कह रहे हैं कि किसी भी रकम से अपने प्रियजनों की कमी पूरी नहीं की जा सकती, लेकिन यह सहायता उनके बच्चों की पढ़ाई, इलाज और भविष्य की योजनाओं में सहायक हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार का यह कदम मानवीय संवेदना को दर्शाता है और संकट की घड़ी में राज्य की जिम्मेदारी को सामने लाता है।
झारखंड सरकार की चुप्पी पर सवाल
जहां एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए मुआवजे की घोषणा कर दी है, वहीं दूसरी ओर झारखंड सरकार की ओर से अब तक किसी प्रकार की आर्थिक सहायता की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसको लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
लोगों का कहना है कि हादसा झारखंड की सीमा में हुआ और वहां की सड़क व्यवस्था एवं सुरक्षा मानकों पर भी सवाल उठ रहे हैं, ऐसे में झारखंड सरकार को भी आगे आकर पीड़ितों के लिए मुआवजे और सहायता की घोषणा करनी चाहिए।
सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी
इस दुर्घटना के बाद एक बार फिर पहाड़ी और घाटी वाले क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ओरसा घाटी जैसे मार्गों पर ढलान, ब्रेक फेल जैसी घटनाएं बार-बार सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की तकनीकी खामियों को दूर किया जाता, तो शायद इतना बड़ा हादसा टल सकता था।
प्रशासनिक स्तर पर भी यह अपेक्षा की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, जैसे—ढलानों का सुधार, सुरक्षा बैरियर, नियमित वाहन जांच और ओवरलोडिंग पर सख्ती।
न्यूज़ देखो: संवेदनशीलता बनाम जवाबदेही
महुआडांड़–ओरसा हादसे में छत्तीसगढ़ सरकार का मुआवजा निर्णय मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा करता है कि झारखंड सरकार की भूमिका क्या होगी। क्या राज्य सरकार सड़क सुरक्षा और पीड़ितों की सहायता को लेकर समान संवेदनशीलता दिखाएगी? इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही और अंतरराज्यीय समन्वय की जरूरत को फिर से उजागर किया है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हादसों से सबक लेने का समय
दुर्घटनाओं के बाद केवल मुआवजा काफी नहीं होता, जरूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
सड़क सुरक्षा, तकनीकी सुधार और प्रशासनिक सतर्कता पर सामूहिक चर्चा जरूरी है।
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