झारखंड के कर्मचारियों की 25 सूत्री मांगों पर मुख्य सचिव सहमत: जल्द बनेगी उच्च स्तरीय कमेटी

झारखंड के कर्मचारियों की 25 सूत्री मांगों पर मुख्य सचिव सहमत: जल्द बनेगी उच्च स्तरीय कमेटी

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#रांची #कर्मचारी_मांग : राज्य कर्मचारियों की 25 सूत्री मांगों पर मुख्य सचिव ने उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का दिया भरोसा।

झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के शिष्टमंडल ने सोमवार को मुख्य सचिव अविनाश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान कर्मचारियों की 25 सूत्री मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने मांगों के समाधान के लिए कार्मिक और वित्त विभाग के सचिव स्तर की एक विशेष कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया। इससे हजारों कर्मचारियों में खुशी की लहर है।

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  • झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के उच्च स्तरीय शिष्टमंडल ने मुख्य सचिव अविनाश कुमार से की औपचारिक मुलाकात।
  • कर्मचारियों की 25 सूत्री मांग-पत्र पर मुख्य सचिव ने जताई सहमति, त्वरित समाधान के लिए बनेगी उच्च स्तरीय कमेटी
  • कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग एवं वित्त विभाग के सचिव स्तर पर किया जाएगा इस विशेष कमेटी का गठन।
  • उच्च स्तरीय कमेटी मांग-पत्र के सभी बिंदुओं की गंभीरता से समीक्षा कर सरकार को सौंपेगी अपनी विस्तृत रिपोर्ट
  • वार्ता के सकारात्मक परिणाम आने से राज्य के हजारों नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के समाधान की जगी उम्मीद।

झारखंड के सरकारी और अनुबंध कर्मचारियों के लिए प्रशासनिक गलियारे से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के एक उच्च स्तरीय शिष्टमंडल ने सोमवार को राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार से मुलाकात की। इस औपचारिक बैठक के दौरान महासंघ ने नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की विभिन्न लंबित समस्याओं को सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया। मुख्य सचिव ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर बेहद सकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के समाप्त होने के आसार बन गए हैं।

मुख्य सचिव से शिष्टमंडल की वार्ता और 25 सूत्री मांग-पत्र

झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का यह उच्च स्तरीय शिष्टमंडल सोमवार को सरकार के मुख्य सचिव अविनाश कुमार से मिलने प्रोजेक्ट भवन पहुंचा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के नियमित और अनुबंध पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान ढूंढना था। महासंघ ने मुख्य सचिव को एक विस्तृत 25 सूत्री मांग-पत्र सौंपा। इस मांग-पत्र में कर्मचारियों की पदोन्नति, वेतन विसंगतियां, सेवा नियमितीकरण, चिकित्सा भत्ता और अनुबंध कर्मियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़े कई अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे। बैठक के दौरान महासंघ के प्रतिनिधियों ने एक-एक कर सभी बिंदुओं पर मुख्य सचिव के साथ बिंदुवार विस्तृत चर्चा की और कर्मचारियों की व्यावहारिक दिक्कतों से उन्हें अवगत कराया।

सचिव स्तर की विशेष कमेटी करेगी मांगों की व्यापक समीक्षा

वार्ता के दौरान मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने कर्मचारियों की समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना और उनके त्वरित व विधि सम्मत निष्पादन के लिए एक व्यावहारिक रास्ता निकाला। उन्होंने महासंघ को आश्वस्त किया कि सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और नियमों के तहत उनकी जायज मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। नौकरशाही के स्तर पर इस मामले को गति देने के लिए उन्होंने तुरंत एक उच्च स्तरीय विशेष कमेटी बनाने का निर्णय लिया।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने कहा: “इन मांगों के त्वरित और विधि सम्मत समाधान के लिए कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग एवं वित्त विभाग के सचिव स्तर पर एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा।”

यह उच्च स्तरीय कमेटी महासंघ द्वारा सौंपे गए मांग-पत्र में शामिल सभी 25 बिंदुओं की गहराई से और विधिक दायरे में रहकर समीक्षा करेगी। कमेटी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करे। इसके बाद कमेटी अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट और प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की ठोस और अंतिम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में उपस्थित रहे महासंघ के वरिष्ठ पदाधिकारी

इस महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक में कर्मचारी हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए महासंघ के कई शीर्ष पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इन पदाधिकारियों ने मुख्य सचिव के समक्ष कर्मचारियों की जमीनी समस्याओं को आंकड़ों के साथ रखा। बैठक में मुख्य रूप से महासंघ के मुख्य संरक्षक तारणी प्रसाद कामत, राज्याध्यक्ष गोपाल शरण सिंह, महासचिव व पेंशनर समाज के वरिष्ठ नेता महेश कुमार सिंह और चन्द्रदीप ठाकुर उपस्थित थे।

मुख्य सचिव के साथ हुई इस सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वार्ता के बाद महासंघ के सभी पदाधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्य सचिव की इस त्वरित पहल की सराहना की है। महासंघ के नेताओं को पूरी उम्मीद है कि इस कमेटी के माध्यम से राज्य के हजारों नियमित और अनुबंध कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों का जल्द ही कोई स्थायी, सम्मानजनक और न्यायसंगत समाधान निकल सकेगा।

न्यूज़ देखो: कर्मचारी हितों के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता और समयबद्ध समाधान की आवश्यकता

मुख्य सचिव और कर्मचारी महासंघ के बीच हुई यह सकारात्मक वार्ता राज्य के प्रशासनिक तंत्र में एक स्वागत योग्य कदम है। किसी भी राज्य के विकास और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की असली धुरी उसके नियमित और अनुबंध कर्मचारी ही होते हैं, इसलिए उनकी जायज समस्याओं का समय पर समाधान होना बेहद आवश्यक है। मुख्य सचिव द्वारा कार्मिक और वित्त विभाग के सचिव स्तर की कमेटी बनाने का निर्णय यह दिखाता है कि प्रशासन मामले को लेकर गंभीर है। हालांकि, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह नवगठित कमेटी अपनी रिपोर्ट तय समय सीमा के भीतर सौंपती है या यह मामला केवल फाइलों और नौकरशाही की लालफीताशाही में उलझकर रह जाता है। कर्मचारियों के भरोसे को बनाए रखने के लिए इस कमेटी की रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों के लिए एकजुटता ही लाती है समाज में सकारात्मक बदलाव

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने अधिकारों और न्यायसंगत मांगों के लिए आवाज उठाना हर नागरिक और कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार है। जब कर्मचारी संगठन और प्रशासनिक तंत्र आपस में मिलकर संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं, तो इससे न केवल शासकीय व्यवस्था मजबूत होती है बल्कि राज्य की प्रगति को भी नई गति मिलती है। सरकारी कर्मियों का कल्याण और उनके काम का सम्मान ही सुशासन की असली पहचान है। हमें हमेशा एक जागरूक समाज के रूप में सामूहिक हितों के लिए खड़े होना चाहिए और संवाद की इस संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।

यदि आप भी मानते हैं कि राज्य के विकास के लिए नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की जायज मांगों का समय पर पूरा होना आवश्यक है, तो इस महत्वपूर्ण खबर पर अपनी राय नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमारे साथ जरूर साझा करें। झारखंड के अपने सभी कर्मचारी भाइयों, मित्रों और वाट्सएप ग्रुप्स में इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि कर्मचारियों की एकजुटता और इस सकारात्मक पहल की जानकारी पूरे राज्य में फैले और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बना रहे।

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