#बोलबा #बाल_सभा : विद्यालय में शिशु भारती गठन कर छात्रों को दी गई जिम्मेदारियां।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर वनदुर्गा मालसाड़ा में बाल सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में शिशु भारती का गठन करते हुए विभिन्न विभागों के लिए छात्र-छात्राओं का चयन किया गया। चयनित विद्यार्थियों को विभागीय जिम्मेदारियों की जानकारी देने के साथ शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।
- प्रधानाचार्य जगरनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई बाल सभा।
- विद्यालय में विभिन्न विभागों के लिए शिशु भारती का चयन।
- चयनित छात्र-छात्राओं को दिलाई गई जिम्मेदारी की शपथ।
- विभाग संचालन को लेकर आचार्यों ने दिए दिशा-निर्देश।
- विद्यालय परिसर में अनुशासन और नेतृत्व क्षमता पर दिया गया जोर।
- कार्यक्रम में विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थी रहे उपस्थित।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड अंतर्गत मां वनदुर्गा मंदिर परिसर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर वनदुर्गा मालसाड़ा में बाल सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य जगरनाथ सिंह ने की। इस अवसर पर विद्यालय में शिशु भारती का गठन करते हुए विभिन्न विभागों के लिए छात्र-छात्राओं का चयन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामूहिक कार्य भावना का विकास करना था। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विभिन्न विभागों के लिए हुआ चयन
बाल सभा के दौरान विद्यालय में शिशु भारती के विभिन्न पदों एवं विभागों के लिए छात्र-छात्राओं का चयन किया गया।
चयनित पदाधिकारियों में अध्यक्ष पद पर रवि बड़ाईक, उपाध्यक्ष पद पर पल्लवी कुमारी, सचिव पद पर एलियास कालो, सह सचिव पद पर रुद्र बड़ाईक, सेनापति पद पर साक्षी कुमारी, सह सेनापति पद पर राजन सिंह एवं प्रभात सिंह का चयन किया गया।
इसी प्रकार कोषाध्यक्ष पद पर मनीष कुमार सिंह, सह कोषाध्यक्ष पद पर मुनिया कुमारी को जिम्मेदारी दी गई।
अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई
विद्यालय में वंदना विभाग के लिए राहुल सिंह, नरेंद्र सिंह, सुमित्रा कुमारी, रूपा कुमारी, विनायक सिंह, बजरंग सिंह, लता कुमारी, संजना कुमारी और आरती कुमारी का चयन किया गया।
शारीरिक प्रमुख के रूप में जयदीप सिंह और मनोज सिंह, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख के रूप में संजय बाघवार एवं उर्मिला कुमारी को जिम्मेदारी सौंपी गई।
स्वच्छता प्रमुख के रूप में रितेश बड़ाईक और पंकज महतो, खेल प्रमुख के रूप में रोहित कुमार सिंह एवं मोनिता कुमारी का चयन हुआ।
इसके अलावा खोया-पाया विभाग में रोहित कुमार सिंह और आनंद सिंह, वाचन प्रमुख में नवीना कुमारी एवं भारती कुमारी, जल प्रमुख के रूप में सलिल बिलुंग और धर्मराज सिंह को जिम्मेदारी दी गई।
चिकित्सा प्रमुख के रूप में सूरज कुमार सिंह और शिवानी कुमारी, भोजन मंत्र प्रमुख में राहुल कुमार एवं एलिसा बिलुंग, साइकिल स्टैंड प्रमुख में मधुबाला कुमारी, सामंती कुमारी, संजना कुमारी तथा बागवानी प्रमुख के रूप में प्रियंका कुमारी, राधिका कुमारी, मनीष सिंह और लता कुमारी का चयन किया गया।
विद्यार्थियों को दी गई विभागीय जानकारी
चयन प्रक्रिया के बाद सभी चयनित छात्र-छात्राओं को उनके विभागों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
शिशु भारती की आचार्य देवकी कुमारी ने सभी भैया-बहनों को अपने-अपने विभागों का कार्य सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दिशा-निर्देश दिए।
देवकी कुमारी ने कहा: “विद्यालय में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए प्रत्येक विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।”
शपथ ग्रहण कर दिलाई गई जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान चयनित छात्र-छात्राओं को शपथ ग्रहण भी कराया गया। उन्हें विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने, अपने विभाग की जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने और विद्यालय के विकास में सहयोग देने का संकल्प दिलाया गया।
आचार्य शंकर सिंह ने सभी चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नेतृत्व और जिम्मेदारी का यह अनुभव भविष्य में उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक होगा।
शंकर सिंह ने कहा: “विद्यालय जीवन में मिली जिम्मेदारियां बच्चों के अंदर नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करती हैं।”
विद्यालय परिवार की रही उपस्थिति
इस अवसर पर प्रधानाचार्य जगरनाथ सिंह, प्रभारी प्रधानाचार्य बिरसमनी कुमारी, देवकी कुमारी, उर्मिला कुमारी, पद्मिनी कुमारी, जानकी सिंह, शंकर सिंह सहित विद्यालय परिवार के सभी भैया-बहन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और अनुशासन का माहौल देखने को मिला।
न्यूज़ देखो: विद्यालयों में नेतृत्व विकास की सकारात्मक पहल
विद्यालयों में शिशु भारती जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे बच्चों में जिम्मेदारी, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहकर व्यवहारिक जीवन कौशल से भी जुड़नी चाहिए, और ऐसे आयोजन उसी दिशा में सकारात्मक प्रयास हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जिम्मेदारी और अनुशासन से ही बनते हैं भविष्य के बेहतर नागरिक
विद्यालय ही बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला है।
नेतृत्व और सेवा भावना बचपन से विकसित होना जरूरी है।
ऐसी गतिविधियां बच्चों को आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनाती हैं।
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