Giridih

मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कांग्रेस का जोरदार विरोध, गिरिडीह में केंद्र सरकार पर तीखा हमला

#गिरिडीह #मनरेगा_बचाओ : नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस ने आंदोलन और उपवास की चेतावनी दी।

गिरिडीह में मनरेगा बचाओ अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी ने नया परिषद भवन में प्रेस वार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार के फैसलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतीश केडिया ने मनरेगा का नाम बदले जाने को जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्णय वापस नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी। इस मुद्दे को गरीबों और मजदूरों के हित से जुड़ा बताते हुए व्यापक जनआंदोलन का संकेत दिया गया।

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  • नया परिषद भवन, गिरिडीह में कांग्रेस की प्रेस वार्ता आयोजित।
  • जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतीश केडिया ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना।
  • मनरेगा का नाम बदलने को गरीबों और मजदूरों के हितों पर चोट बताया।
  • निर्णय वापस नहीं लेने पर सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी।
  • महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष उपवास का ऐलान।
  • कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद।

मनरेगा बचाओ अभियान के तहत गिरिडीह में जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। शहर के नया परिषद भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा का नाम बदले जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। वक्ताओं ने इसे सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि गरीबों और मजदूरों की पहचान और अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया। प्रेस वार्ता के दौरान संगठन की भावी रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा भी स्पष्ट की गई।

सतीश केडिया का केंद्र सरकार पर हमला

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतीश केडिया ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलने का कार्य कर रही है।

सतीश केडिया ने कहा: “मनरेगा जैसी योजना गरीबों और मजदूरों के जीवन से जुड़ी हुई है। इसका नाम बदलना जनता की भावना के साथ खिलवाड़ है।”

उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसने लाखों परिवारों को सम्मानजनक आजीविका का सहारा दिया है।

नाम बदलने को बताया कांग्रेस के लिए आघात

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा का नाम बदला जाना कांग्रेस पार्टी और उसके विचारधारा के लिए आघात है।

उन्होंने कहा: “कांग्रेस ने इस योजना को देश के गरीब और मजदूर वर्ग के लिए बनाया था। इसके नाम से महात्मा गांधी की सोच और विचारधारा जुड़ी है।”

उनका कहना था कि किसी योजना का नाम बदलना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होता, बल्कि उससे जुड़े मूल्यों और इतिहास को भी प्रभावित करता है।

आंदोलन और उपवास की चेतावनी

सतीश केडिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार मनरेगा का नाम बदलने के फैसले को वापस नहीं लेती है, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी।

सतीश केडिया ने कहा: “कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। इसके साथ ही महात्मा गांधी और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष विरोध स्वरूप उपवास कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।”

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से विरोध दर्ज कराने का संकेत बताया।

मनरेगा का सामाजिक और आर्थिक महत्व

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उनका कहना था कि यह योजना ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्ग के लिए जीवनरेखा रही है। मनरेगा ने न केवल रोजगार उपलब्ध कराया, बल्कि गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में इसके नाम में बदलाव को लोग अपनी पहचान से जोड़कर देख रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं की एकजुटता का प्रदर्शन

इस मौके पर कांग्रेस संगठन की एकजुटता साफ नजर आई। प्रेस वार्ता में पूर्व जिला अध्यक्ष धनंजय सिंह, बलराम यादव, अशोक विश्वकर्मा, योगेश्वर महत्ता, अली खान, मोहम्मद अली खान उर्फ लड्डू खान, कृष्ण सिंह, सुलेमान अख्तर, यश सिन्हा, सरफराज अंसारी, बिलाल हुसैनी, मोहम्मद सोहेल, दिनेश विश्वकर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में केंद्र सरकार के फैसले का विरोध किया।

संगठनात्मक रणनीति पर भी हुई चर्चा

प्रेस वार्ता के दौरान यह भी संकेत दिया गया कि आने वाले दिनों में मनरेगा बचाओ अभियान को और तेज किया जाएगा। गांव-गांव जाकर लोगों को इस फैसले के प्रभाव के बारे में बताया जाएगा और जनसमर्थन जुटाया जाएगा। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़ा हुआ है।

स्थानीय स्तर पर बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी

मनरेगा के मुद्दे को लेकर गिरिडीह जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती नजर आ रही है। कांग्रेस के इस आक्रामक रुख के बाद अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर भी नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जिले की राजनीति में और गरमाने की संभावना जताई जा रही है।

न्यूज़ देखो: जनकल्याण बनाम नाम बदलने की राजनीति

मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कांग्रेस का यह विरोध केंद्र सरकार के फैसलों पर सीधा सवाल खड़ा करता है। योजना के नाम बदलने को लेकर उठी आपत्ति यह दर्शाती है कि जनकल्याणकारी योजनाएं केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ी होती हैं। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है। आंदोलन की चेतावनी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जनभावनाओं का सम्मान, लोकतंत्र की पहचान

लोकतंत्र में योजनाएं केवल नाम से नहीं, उनके उद्देश्य और असर से पहचानी जाती हैं। मनरेगा जैसे कार्यक्रमों ने लाखों परिवारों को सहारा दिया है और उनकी भावनाओं का सम्मान जरूरी है। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की आवाज को गंभीरता से सुनें।
अपनी राय खुलकर रखें, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करें और इस खबर को साझा कर जागरूकता बढ़ाएं। आपकी भागीदारी ही बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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