सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का जाल उजागर, घूस देकर भी नहीं मिला आवास तो कर्ज में डूबे गरीब

सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का जाल उजागर, घूस देकर भी नहीं मिला आवास तो कर्ज में डूबे गरीब

author Niranjan Kumar
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#छतरपुर #भ्रष्टाचार_मामला : सिल्दाग पंचायत में आवास योजना में अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए।

छतरपुर प्रखंड के सिल्दाग पंचायत में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं, जहां लाभुकों से घूस लेने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित कर्मियों पर धांधली का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। कई पीड़ितों ने कर्ज लेकर पैसे देने और अब मजदूरी कर कर्ज चुकाने की मजबूरी बताई। मामले में प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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  • सिल्दाग पंचायत में आवास योजना में बड़े स्तर पर अनियमितता के आरोप।
  • लाभुकों से 10 से 20 हजार रुपये घूस लेने की शिकायत।
  • कई परिवारों को एक से अधिक आवास, जबकि जरूरतमंद वंचित।
  • UPI के जरिए राशि वापस कराने का आरोप भी सामने आया।
  • पीड़ितों ने कर्ज लेकर घूस दी, अब मजदूरी कर रहे हैं
  • ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।

छतरपुर प्रखंड के सिल्दाग पंचायत में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और वार्ड सदस्यों ने पंचायत के मुखिया, उनके परिजनों और संबंधित कर्मियों पर धांधली और घूसखोरी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। कई जरूरतमंद परिवारों को लाभ से वंचित रखा गया, जबकि कुछ को बार-बार लाभ दिया गया। इससे लोगों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ती जा रही है।

आवास योजना में धांधली के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी अनियमितता हुई है। कई लाभुकों से 10 से 20 हजार रुपये तक की राशि लेने के बावजूद उन्हें आवास नहीं दिया गया। वहीं कुछ परिवारों को तीन-तीन बार अलग-अलग योजनाओं में आवास देने की बात सामने आई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि योजना चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं रही।

अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि एक ही परिवार को कई बार लाभ मिल रहा है, तो इसमें केवल लाभुक ही जिम्मेदार नहीं हो सकता। सत्यापन, जियो-टैगिंग और भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं है।

UPI के जरिए वसूली का आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में लाभुकों के खाते में आई सरकारी राशि को दबाव बनाकर UPI के माध्यम से वापस कराया गया। विरोध करने वाले लाभुकों को डराया-धमकाया गया और उन पर ही कार्रवाई का दबाव बनाया गया। इससे पूरा मामला संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

पीड़ितों की दर्दनाक कहानी

सिल्दाग पंचायत के कई परिवार इस मामले में पीड़ित बताए जा रहे हैं।

वार्ड संख्या 03 (अंधारीबाग) की कौशल्या देवी ने बताया:

कौशल्या देवी ने कहा: “हमने 10 प्रतिशत ब्याज पर 10,000 रुपये कर्ज लेकर दिए, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला। अब महाजन हमें धमका रहा है।”

वार्ड संख्या 07 (चौखड़ा) की प्रतिमा देवी ने कहा:

प्रतिमा देवी ने कहा: “करीब दो साल पहले पैसे दिए थे, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।”

इसी तरह लीलावती देवी ने भी अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा:

लीलावती देवी ने कहा: “कर्ज लेकर पैसे दिए, लेकिन अब तक कोई लाभ नहीं मिला। अब परिवार मजदूरी कर कर्ज चुका रहा है।”

इन घटनाओं से साफ है कि कई गरीब परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं।

ग्रामीणों का विरोध और मांग

वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों ने पंचायती राज विभाग और बीडीओ को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि:

  • पूरे मामले की जमीनी स्तर पर जांच हो
  • केवल लाभुकों पर नहीं, बल्कि सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
  • दोषियों को सख्त सजा दी जाए

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मामले को और बड़े स्तर पर उठाएंगे।

न्यूज़ देखो: क्या गरीबों का हक सिस्टम में ही दब रहा है

यह मामला सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। जब गरीबों को ही योजनाओं का लाभ पाने के लिए घूस देनी पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है। यदि जांच केवल कागजों तक सीमित रही, तो सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या दोषियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक बनें, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं

सरकारी योजनाएं आम जनता के लिए बनाई जाती हैं, न कि किसी के निजी लाभ के लिए।
यदि आपके साथ भी ऐसी कोई घटना होती है, तो चुप न रहें और आवाज उठाएं।
जागरूक नागरिक ही एक मजबूत समाज की नींव रखते हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

अपनी बात रखें, सच्चाई को सामने लाएं और दूसरों को भी जागरूक करें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और अपने क्षेत्र में जागरूकता फैलाने में योगदान दें।

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Written by

छतरपुर, पलामू

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