
#गिरिडीह #झारखंड #आम_हड़ताल : भाकपा माले ने चार लेबर कोड और केंद्र की नीतियों के विरोध में समर्थन की घोषणा की।
भाकपा माले झारखंड राज्य कमिटी ने 12 फरवरी की अखिल भारतीय आम हड़ताल को समर्थन देते हुए राज्यभर में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि चार लेबर कोड मजदूर अधिकारों पर हमला हैं। पार्टी ने मनरेगा और केंद्र की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। विभिन्न जिलों में वामदलों के साथ मिलकर व्यापक अभियान चलाने की घोषणा की गई है।
- भाकपा माले, झारखंड राज्य कमिटी ने 12 फरवरी की आम हड़ताल को समर्थन दिया।
- राज्य सचिव मनोज भक्त ने सड़कों पर उतरने का आह्वान किया।
- चार लेबर कोड को मजदूर अधिकारों पर हमला बताया।
- मनरेगा में बदलाव और नई योजना पर आपत्ति जताई।
- केंद्र की अमेरिकी डील और कृषि नीति पर भी सवाल।
- गिरिडीह समेत कई जिलों में भारत बंद के दौरान कार्यक्रम की तैयारी।
झारखंड में 12 फरवरी को प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाकपा (माले) राज्य कमिटी, झारखंड ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर हड़ताल को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी ने राज्य की जनता, मजदूरों, किसानों, नौजवानों, छात्रों, महिलाओं और जनसंगठनों से सड़कों पर उतरकर हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।
प्रेस विज्ञप्ति की जानकारी गिरिडीह मीडिया को देते हुए राजेश सिन्हा ने बताया कि राज्य सचिव मनोज भक्त के नेतृत्व में पार्टी राज्यभर में अभियान चला रही है।
राज्यभर में कार्यक्रम की तैयारी
भाकपा माले ने कहा है कि झारखंड के सभी जिलों के अलावा गिरिडीह के चतरो मोड़, मधुबन, जमुआ, बगोदर, राजधनवार, डुमरी, गांडेय और बेंगाबाद समेत कई क्षेत्रों में भारत बंद के दौरान कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे।
पार्टी ने अन्य वामदलों और जनसंगठनों के साथ मिलकर हड़ताल को व्यापक और प्रभावी बनाने की रणनीति बनाई है।
चार लेबर कोड पर कड़ा विरोध
राज्य सचिव मनोज भक्त ने चार श्रम संहिताओं को मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।
उन्होंने कहा:
मनोज भक्त ने कहा: “चार लेबर कोड मजदूरों के संगठन, एकजुटता और संघर्ष के अधिकार को कमजोर करने की साजिश हैं। स्थायी रोजगार खत्म कर ठेका और असुरक्षित रोजगार को बढ़ावा देना इनका असली उद्देश्य है।”
पार्टी का आरोप है कि इन कानूनों से काम के घंटे बढ़ेंगे और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुरक्षा कमजोर होगी।
मनरेगा और नई योजना पर सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा माले ने मनरेगा को खत्म करने और उसकी जगह नई योजना लागू करने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि इससे ग्रामीण गरीबों का कानूनी अधिकार कमजोर होगा और निर्णय लेने की शक्ति केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित हो जाएगी।
राज्य कमिटी के अनुसार इससे वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा और रोजगार व मजदूरी दोनों प्रभावित होंगे।
अमेरिकी डील और कृषि पर चिंता
भाकपा माले ने केंद्र सरकार द्वारा हाल में की गई अमेरिकी डील को देश की आर्थिक संप्रभुता पर गंभीर असर डालने वाला कदम बताया है।
पार्टी का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े समझौते भारत की स्वतंत्र आर्थिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही विदेशी कृषि उत्पादों के आयात को लेकर भी चिंता जताई गई है।
पार्टी का आरोप है कि भारी सब्सिडी प्राप्त विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसान असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करेंगे।
12 फरवरी को करारा जवाब देने की बात
राज्य कमिटी ने कहा है कि मजदूर, किसान और आम जनता 12 फरवरी की हड़ताल के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
पार्टी ने इसे जनसरोकारों और अधिकारों की लड़ाई बताया है।
न्यूज़ देखो: हड़ताल से पहले सियासी तापमान बढ़ा
12 फरवरी की आम हड़ताल को लेकर झारखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। भाकपा माले ने इसे मजदूर और किसान हितों की लड़ाई बताया है, जबकि सरकार की नीतियों को लेकर बहस जारी है। हड़ताल के दिन राज्य में जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और समर्थन दोनों की भूमिका अहम है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर संवाद जरूरी
हड़ताल और आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इनके प्रभाव पर भी विचार जरूरी है। आम नागरिकों, मजदूरों और किसानों की आवाज को समझना और समाधान की दिशा में संवाद बनाना समय की मांग है।
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