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गिरिडीह में नशाखोरी पर माले नेता राजेश सिन्हा का बड़ा बयान, अजय दास मामले के बाद समाज और प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

#गिरिडीह #नशाखोरी_मामला : अजय दास की मौत के बाद नेताओं और समाजसेवियों ने नशे के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई।

गिरिडीह के हुट्टी बाजार स्थित रविदास टोला में अजय दास की मौत के बाद नशाखोरी के मुद्दे ने एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। माले नेता राजेश सिन्हा सहित कई समाजसेवी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और घटना पर दुख व्यक्त किया। नेताओं ने जिले में बढ़ती नशाखोरी को समाज और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक बताया। प्रशासन से अवैध नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

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  • गिरिडीह के हुट्टी बाजार रविदास टोला में अजय दास की मौत के बाद नशाखोरी पर बहस तेज।
  • माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा—जिले में नशा बन रहा है कई घटनाओं का कारण।
  • पीड़ित परिवार में पत्नी और तीन छोटे बच्चे, एक बच्चा अभी गोद में।
  • नगर विकास मंत्री ने भी घटना स्थल पहुंचकर जाम हटवाने और मुआवजे की पहल की।
  • समाजसेवियों ने गांजा, टेन टेबलेट, शराब और टेंडराईट के अवैध कारोबार पर रोक की मांग की।
  • कई स्थानीय लोगों ने ड्रग विभाग और प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।

गिरिडीह जिले के हुट्टी बाजार स्थित रविदास टोला में हुई घटना के बाद नशाखोरी को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अजय दास की मौत के बाद माले नेता राजेश सिन्हा सहित कई समाजसेवी और स्थानीय लोग पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान नेताओं ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जिले में तेजी से बढ़ रही नशाखोरी को सामाजिक और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर सख्ती से कार्रवाई नहीं की गई तो समाज पर इसका और भी गहरा असर पड़ेगा।

अजय दास के परिवार से मिले माले नेता राजेश सिन्हा

माले नेता राजेश सिन्हा ने रविदास टोला पहुंचकर अजय दास के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बताया कि किसी कारणवश वे घटना की रात परिवार से नहीं मिल सके थे, इसलिए बाद में आकर उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार की स्थिति का जायजा लिया।

राजेश सिन्हा ने कहा कि अजय दास के परिवार की स्थिति बेहद संवेदनशील है। घर में उनकी पत्नी आश्रित हैं और तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें एक बच्चा अभी गोद में है। ऐसे में परिवार के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा: “अजय दास की मौत बेहद दुखद है। परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए सरकार को मुआवजे के साथ-साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया है, जो एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके अलावा भी पीड़ित परिवार की मदद के लिए स्थायी कदम उठाने की आवश्यकता है।

नगर विकास मंत्री की पहल पर प्रतिक्रिया

राजेश सिन्हा ने बताया कि मीडिया के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि नगर विकास मंत्री भी घटना के बाद मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने वहां लगे जाम को हटवाने और मुआवजे की घोषणा की दिशा में पहल की।

उन्होंने इस कदम को सराहनीय बताते हुए कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को ऐसी घटनाओं में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल मुआवजा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में ऐसी घटनाओं की जड़ बन चुकी नशाखोरी पर सख्ती से नियंत्रण जरूरी है।

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जिले में बढ़ती नशाखोरी पर उठे सवाल

इस मौके पर माले नेता राजेश सिन्हा ने गिरिडीह जिले में फैल रही नशाखोरी पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिले में गांजा, टेन टेबलेट, शराब और टेंडराईट जैसे नशे का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है।

राजेश सिन्हा ने कहा: “बहुत अफसोस होता है जब हमारा ही समाज नशे में डूब जाता है और आपसी खून-खराबा, मारपीट जैसी घटनाओं से समाज पीछे चला जाता है।”

उन्होंने कहा कि नशे के कारण जिले में हत्या, चोरी, डकैती और आपसी हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर प्रशासन और संबंधित विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासन और ड्रग विभाग की निष्क्रियता पर सवाल

राजेश सिन्हा ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार पर नियंत्रण के लिए जिम्मेदार ड्रग इंस्पेक्टर और संबंधित विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

उनका कहना था कि कभी-कभार दो-चार दिन छापेमारी जरूर होती है, लेकिन उसके बाद विभाग शांत हो जाता है और अवैध कारोबार करने वाले लोग फिर से सक्रिय हो जाते हैं।

राजेश सिन्हा ने कहा: “यदि ड्रग विभाग और जिला प्रशासन को यह भी नहीं पता कि कहां-कहां नशे का धंधा चल रहा है और कौन लोग इसमें शामिल हैं, तो यह साफ तौर पर विभाग की शिथिलता को दर्शाता है।”

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अवैध नशे के कारोबार पर सख्ती से कार्रवाई की जाए ताकि समाज को इस समस्या से बचाया जा सके।

समाजसेवियों ने भी जताई चिंता

इस घटना के बाद कई स्थानीय समाजसेवियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और नशाखोरी पर नियंत्रण की मांग की।

समाजसेवी जीवन दास ने कहा कि नगर विकास मंत्री द्वारा की गई पहल सराहनीय है, लेकिन इसके साथ ही समाज में फैल रहे नशे पर भी कड़ी पाबंदी लगाना जरूरी है।

वहीं वार्ड 25 के समाजसेवी ने कहा कि समाज में नशाखोरी तेजी से फैल रही है और इसे रोकने के लिए प्रशासन के साथ-साथ समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा।

समाजसेवी सुमित ने भी नशाखोरी को कई आपराधिक घटनाओं का कारण बताया।

समाजसेवी सुमित ने कहा: “नशे के कारण गिरिडीह में मर्डर, चोरी और आपसी मारपीट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। टाउन थाना के बगल में ही नशे का फैलना बेहद गंभीर बात है और इसकी जांच होनी चाहिए।”

पीड़ित परिवार को मिला सामाजिक समर्थन

इस दौरान समाजसेवी योगेश्वर दास भी मौके पर पहुंचे और अजय दास के परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा समाज परिवार के साथ खड़ा है।

योगेश्वर दास ने यह भी कहा कि नव निर्वाचित मेयर से इस मामले में बातचीत कर पीड़ित परिवार के लिए आवश्यक मदद सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।

नशाखोरी के सामाजिक प्रभाव पर चिंता

इस मौके पर वार्ड पार्षद प्रतिनिधि उज्ज्वल साव ने भी नशाखोरी को समाज के लिए बेहद खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि नशे के कारण समाज में कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं।

उज्ज्वल साव ने कहा: “नशाखोरी के कारण समाज में हत्या, बलात्कार और अन्य अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसलिए नशाखोरी का उन्मूलन बेहद जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर सामूहिक प्रयास नहीं किए गए तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा।

न्यूज़ देखो: नशाखोरी पर सख्ती की जरूरत

गिरिडीह में हुई यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती को उजागर करती है। नशाखोरी के कारण बढ़ते अपराध और सामाजिक विघटन के संकेत लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज को मिलकर इस समस्या से लड़ने की आवश्यकता है। अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग अवैध नशे के कारोबार पर स्थायी और प्रभावी कार्रवाई करेंगे या फिर यह समस्या यूं ही बढ़ती रहेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक समाज ही रोक सकता है नशे की बढ़ती चुनौती

नशाखोरी केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि यह समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। जब युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आती है तो उसका असर पूरे परिवार और समुदाय पर पड़ता है। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह नशे के खिलाफ आवाज उठाए और अपने आसपास जागरूकता फैलाए।

यदि आपके आसपास भी नशे का अवैध कारोबार हो रहा है तो इसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंचाना जरूरी है। समाज तभी सुरक्षित बन सकता है जब हम सब मिलकर गलत के खिलाफ खड़े हों।

जागरूक बनें, जिम्मेदार बनें।
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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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