
#गिरिडीह #सदस्यता_अभियान : माले ने हर बूथ तक संगठन विस्तार का लक्ष्य तय किया।
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में माले ने सदस्यता अभियान को तेज करते हुए हजारों नए मेंबर जोड़ने का लक्ष्य रखा है। माले नेता राजेश सिन्हा ने शास्त्रीनगर स्थित आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रणनीति बनाई। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया है। संगठन विस्तार और कैडर मजबूती को लेकर लगातार गतिविधियां चल रही हैं।
- राजेश सिन्हा ने गिरिडीह में हजारों सदस्य जोड़ने का लक्ष्य रखा।
- हर बूथ पर माले कैडर बनाने की रणनीति तैयार।
- शहरी क्षेत्र में राजेश सिन्हा, ग्रामीण में कन्हाई पांडेय, पीरटांड़ में अजीत राय सक्रिय।
- शास्त्रीनगर आवास पर नए-पुराने कार्यकर्ताओं का लगातार आना-जाना।
- सदस्यता के साथ रिन्यूअल अभियान भी जारी।
- संगठन को गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग से जोड़ने पर जोर।
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में माले (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए व्यापक सदस्यता अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी नेता राजेश सिन्हा ने बताया कि इस अभियान के तहत हजारों नए सदस्यों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है।
बूथ स्तर तक संगठन विस्तार की योजना
माले ने गिरिडीह विधानसभा के लगभग सभी बूथों पर अपना कैडर तैयार करने की रणनीति बनाई है। इस अभियान के तहत हर क्षेत्र में स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ा जा सके।
शहरी क्षेत्रों में राजेश सिन्हा, मुफ्फसिल क्षेत्रों में कन्हाई पांडेय और पीरटांड़ क्षेत्र में अजीत राय के नेतृत्व में अभियान चलाया जा रहा है।
शास्त्रीनगर में बना सदस्यता का केंद्र
राजेश सिन्हा के शास्त्रीनगर स्थित आवास पर इन दिनों सदस्यता और रिन्यूअल अभियान को लेकर कार्यकर्ताओं का लगातार आना-जाना लगा हुआ है। यहां नए सदस्य जुड़ रहे हैं, वहीं पुराने कार्यकर्ता अपने सदस्यता का नवीनीकरण करवा रहे हैं।
राजेश सिन्हा ने कहा: “हम संघर्ष करने वाले लोग हैं, हर दिन जनता के साथ तालमेल में रहते हैं और उनकी आवाज को मजबूत करते हैं।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि जो भी पार्टी से जुड़ना चाहते हैं, वे आगे आएं और संगठन को मजबूत करें।
गरीब और वंचित वर्ग को जोड़ने पर जोर
राजेश सिन्हा ने कहा कि माले का मुख्य आधार गरीब, किसान, मजदूर और वंचित वर्ग है। उन्होंने दावा किया कि समाज के 70 प्रतिशत लोग अगर संगठित हो जाएं, तो बड़ा बदलाव संभव है।
उन्होंने कहा: “यहां सत्ता या पैसा नहीं, बल्कि स्वाभिमान और संघर्ष की पहचान मिलती है।”
पार्टी संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी
माले पार्टी में सदस्यता प्रक्रिया पूरे साल चलती है, जबकि रिन्यूअल साल में एक बार होता है। पार्टी में शामिल होने के लिए फॉर्म भरना होता है और शपथ लेनी होती है। इसके बाद सदस्य को एक पहचान पत्र दिया जाता है।
पार्टी में ब्रांच कमिटी और लोकल कमिटी का गठन भी लगातार होता रहता है। किसी भी ब्रांच कमिटी में कम से कम 7 सदस्य होते हैं, जो मिलकर एक सचिव का चयन करते हैं।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर आधारित निर्णय
पार्टी में सभी निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाते हैं। जिला कमिटी, राज्य कमिटी और केंद्रीय कमिटी के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया संचालित होती है। इसमें वोटिंग और बहुमत का भी प्रावधान है।
माले का दावा है कि किसी भी पद पर किसी को थोपने की परंपरा नहीं है और सभी फैसले लोकतांत्रिक तरीके से लिए जाते हैं।
फंडिंग और पारदर्शिता पर भी जोर
पार्टी की फंडिंग मुख्य रूप से सदस्यों के योगदान और शुभचिंतकों से होती है। राजेश सिन्हा ने बताया कि माले ने इलेक्ट्रोल बॉन्ड के जरिए कोई चंदा नहीं लिया है और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
सीमित संसाधनों के बावजूद सक्रियता
उन्होंने कहा कि माले के कार्यकर्ता मुख्य रूप से गरीब और मेहनतकश वर्ग से आते हैं, जो अपनी आजीविका के साथ-साथ संगठन के लिए भी समय निकालते हैं। इसके बावजूद पार्टी लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय बनी हुई है।
न्यूज़ देखो: संगठन विस्तार से बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता
गिरिडीह में माले का यह सदस्यता अभियान बताता है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। गरीब और वंचित वर्ग को जोड़ने की रणनीति राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितनी प्रभावी ढंग से लागू होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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