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नगर निगम चुनाव में, माले का समर्थन तीसरी ताकत के साथ, कहा जीत और हार चुनाव का एक पार्ट है लेकिन बेहतर उमीदवार है गौरव कुमार -पूरन महतो माले के वरिष्ठ नेता

#गिरिडीह #नगरनिगम_चुनाव : माले नेताओं ने रोड शो कर गौरव कुमार के पक्ष में मांगा समर्थन।

गिरिडीह नगर निगम चुनाव में माले नेताओं ने मेयर उम्मीदवार गौरव कुमार को समर्थन देते हुए शहर में रोड शो किया। वरिष्ठ नेता पूरन महतो की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने विभिन्न वार्डों में जनसंपर्क अभियान चलाया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि चुनाव गैरदलीय है और पार्टी केवल समर्थन दे रही है। इस दौरान चुनाव आयोग से राजनीतिक दलों द्वारा ‘पार्टी समर्थित’ लिखने पर संज्ञान लेने की मांग भी उठाई गई।

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  • माले ने मेयर उम्मीदवार गौरव कुमार को दिया समर्थन।
  • वरिष्ठ नेता पूरन महतो ने रोड शो में पहनाई फूल माला।
  • राजेश सिन्हा, कन्हाई पांडेय, मसूदन कोल, किशोर राय रहे मौजूद।
  • पहाड़ीडीह, कमलजोर और मुफ्फसिल क्षेत्र में चलाया जनसंपर्क अभियान।
  • चुनाव आयोग से ‘पार्टी समर्थित’ लिखने पर संज्ञान लेने की मांग।

गिरिडीह नगर निगम चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच माले नेताओं ने मेयर उम्मीदवार गौरव कुमार के समर्थन में खुलकर मैदान संभाल लिया है। शहर की सड़कों पर रोड शो निकालकर कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं से संपर्क किया और चुनाव चिन्ह ‘छ नंबर बिस्किट छाप’ पर वोट देने की अपील की। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला और पुरुष समर्थक भी शामिल रहे।

पूरन महतो की अगुवाई में रोड शो

माले के वरिष्ठ नेता पूरन महतो की अगुवाई में आयोजित रोड शो में पार्टी के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। रोड मार्च के दौरान पूरन महतो ने गौरव कुमार को फूल माला पहनाकर समर्थन का सार्वजनिक ऐलान किया।

इस मौके पर राजेश सिन्हा, कन्हाई पांडेय, मसूदन कोल और किशोर राय समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। जुलूस शहर की विभिन्न सड़कों से होकर गुजरा, जहां समर्थकों ने लोगों से सीधे संवाद कर समर्थन मांगा।

पूरन महतो ने कहा: “जीत और हार चुनाव का एक हिस्सा है, लेकिन बेहतर उम्मीदवार गौरव कुमार हैं और जनता उन्हें समर्थन दे रही है।”

उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसमें जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है।

गैरदलीय चुनाव में ‘पार्टी समर्थित’ लिखने पर आपत्ति

रोड शो और जनसंपर्क के दौरान माले नेताओं ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि नगर निगम और नगर पंचायत चुनाव गैरदलीय होते हैं, इसलिए किसी भी उम्मीदवार द्वारा ‘पार्टी समर्थित’ लिखना गलत है।

राजेश सिन्हा और कन्हाई पांडेय ने कहा: “नगर निगम चुनाव पार्टी विशेष का चुनाव नहीं है, इसलिए किसी को बौखलाने की जरूरत नहीं है। यदि हम समर्थन दे रहे हैं तो उसे समर्थन ही लिखा जाना चाहिए, पार्टी का जिक्र करना गलत है।”

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नेताओं ने चुनाव आयोग से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की। उनका कहना था कि यदि आयोग चाहे तो इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई कर सकता है।

विभिन्न वार्डों में जनसंपर्क तेज

माले की टीम ने गिरिडीह के पहाड़ीडीह, कमलजोर और मुफ्फसिल क्षेत्र के कई वार्डों में लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया। कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की और मेयर उम्मीदवार गौरव कुमार को ‘छ नंबर बिस्किट छाप’ पर वोट देने की अपील की।

दोपहर के समय गौरव कुमार स्वयं भी रोड मार्च में शामिल हुए और समर्थकों के साथ शहर की सड़कों पर जनसंपर्क किया। नेताओं ने दावा किया कि आने वाले दिनों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जनता अभियान से जुड़ेगी।

नगर कमिटी और प्रखंड कमिटी भी सक्रिय

माले की नगर कमिटी और प्रखंड कमिटी के सदस्यों ने भी समर्थन अभियान को तेज कर दिया है। नेताओं के अनुसार सभी समर्थित कार्यकर्ता क्षेत्रवार जिम्मेदारी लेकर मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से ही नगर निगम चुनाव में कई तरह के राजनीतिक प्रश्न उठने लगे थे, लेकिन अब समर्थन अभियान खुलकर सामने आ गया है।

इस दौरान सैकड़ों महिला और पुरुष समर्थक रोड शो में शामिल रहे। राजद के युवा नेता जिला अध्यक्ष इरफान जी की उपस्थिति भी चर्चा का विषय रही।

राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल

नगर निगम चुनाव में माले के इस समर्थन के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे तीसरी ताकत के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं। हालांकि माले नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल समर्थन है और चुनाव गैरदलीय प्रक्रिया के तहत ही लड़ा जा रहा है।

समर्थकों का कहना है कि गौरव कुमार का प्रचार अब तेज गति से आगे बढ़ेगा और आने वाले दिनों में जनसंपर्क अभियान और व्यापक होगा।

न्यूज़ देखो: समर्थन की राजनीति और चुनावी मर्यादा का सवाल

गिरिडीह नगर निगम चुनाव में माले का खुला समर्थन यह संकेत देता है कि भले ही चुनाव गैरदलीय हो, लेकिन राजनीतिक प्रभाव पूरी तरह से खत्म नहीं होता। नेताओं द्वारा ‘पार्टी समर्थित’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति चुनावी मर्यादा और नियमों की ओर ध्यान खींचती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और प्रचार अभियान किस दिशा में आगे बढ़ता है। जनता का फैसला ही अंततः सभी दावों की कसौटी होगा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सोच-समझकर करें मतदान, शहर का भविष्य आपके हाथ

नगर निगम चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि शहर के विकास की दिशा तय करने का अवसर है।
प्रचार, समर्थन और दावों के बीच मतदाता की जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है।
उम्मीदवारों के कार्य, दृष्टि और नीतियों को परखें और फिर अपना निर्णय लें।
लोकतंत्र की ताकत आपकी भागीदारी से ही मजबूत होती है।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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