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नल जल योजना पर करोड़ों खर्च फिर भी बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण, कामता पंचायत में गहराया पेयजल संकट

#लातेहार #पेयजल_संकट : खराब नल जल योजनाओं और ठेकेदारों की लापरवाही से कामता पंचायत के कई गांव प्रभावित।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत कामता पंचायत में नल जल योजना के विफल होने से गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। पंचायत समिति सदस्य द्वारा किए गए निरीक्षण में पाइप लीकेज, खराब मोटर और अधूरे कनेक्शन जैसी गंभीर खामियां सामने आई हैं। यह स्थिति ग्रामीणों के दैनिक जीवन और सरकारी योजनाओं की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।

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  • कामता पंचायत में नल जल योजना बनी शोपीस, कई गांवों में पानी की किल्लत।
  • पाइप लीकेज, खराब मोटर और अधूरे कनेक्शन से योजनाएं निष्क्रिय।
  • पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने किया प्रभावित गांवों का निरीक्षण।
  • भुसाढ़, भंडारगढ़ा, चटुआग, कामता, हिसरी, अंबादोहर सहित कई गांव प्रभावित।
  • बीडीओ और उपायुक्त से दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत कामता पंचायत इन दिनों गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीण इलाकों में नल जल योजना को हर घर पानी पहुंचाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। पंचायत के कई गांवों में योजना या तो पूरी तरह बंद पड़ी है या फिर अधूरी हालत में छोड़ दी गई है, जिससे सैकड़ों ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पंचायत समिति सदस्य ने किया जमीनी हकीकत का खुलासा

कामता पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने भुसाढ़, भंडारगढ़ा, चटुआग, ठुठाबर टोला, कामता, हिसरी एवं अंबादोहर सहित कई गांवों का दौरा कर नल जल योजनाओं की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कई स्थानों पर ठेकेदारों द्वारा लापरवाहीपूर्वक कार्य कराया गया है, जिसके कारण योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ चुकी है।

भुसाढ़ गांव में एक साल से बंद नल जल योजना

भुसाढ़ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के समीप स्थापित नल जल योजना बीते एक वर्ष से खराब पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब छह माह पूर्व मोटर खोलकर ले जाई गई थी, लेकिन अब तक उसे वापस नहीं लगाया गया। इससे दर्जनों परिवारों को पानी के लिए पुराने और कमजोर चापानल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

चापानल और नल जल दोनों बेकार

कई गांवों में पुराने चापानल पर ही नल जल योजना को फिट कर दिया गया है। इससे न तो चापानल से पर्याप्त पानी निकल रहा है और न ही नल जल योजना सुचारू रूप से चल पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अव्यवस्थित कार्य से दो-दो योजनाएं एक साथ बेकार हो गई हैं।

पाइप लीकेज से सड़कों पर बह रहा पानी

निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर पाइप लाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। लीकेज के कारण पानी सड़कों और खेतों में बह रहा है, लेकिन घरों तक नहीं पहुंच पा रहा। भंडारगढ़ा के बांड़ी सीमर टोला, चटुआग के विभिन्न टोले, कामता परसाही, हिसरी और अंबादोहर गांवों में यह समस्या आम हो चुकी है।

अधूरी योजनाएं, बिना नल कनेक्शन के घर

कुछ गांवों में नल जल योजना की संरचना तो खड़ी कर दी गई, लेकिन आज तक एक भी घर में नल कनेक्शन नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि योजना कागजों में पूरी दिखा दी गई, जबकि वास्तविकता में पानी की एक बूंद भी नहीं मिल रही।

हैंडपंप पर निर्भर ग्रामीण

नल जल योजना से पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीण आज भी पुराने हैंडपंप पर निर्भर हैं। कई जगहों पर हैंडपंप भी खराब स्थिति में हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।

प्रशासन से की गई लिखित शिकायत

पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने बताया कि उन्होंने प्रखंड स्तरीय पंचायत समिति की बैठक में पेयजल से जुड़ी सभी समस्याओं की विस्तृत लिखित सूची बीडीओ को सौंपी है। साथ ही उपायुक्त से भी हस्तक्षेप की मांग की गई है ताकि दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई हो और नल जल योजनाओं की तत्काल मरम्मत कराई जा सके।

अयुब खान ने कहा: “नल जल योजना का उद्देश्य हर घर तक पानी पहुंचाना था, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही से यह योजना ग्रामीणों के लिए शोपीस बन गई है।”

ग्रामीणों की नाराजगी और मांग

दौरे के दौरान नजरु तुरी, द्वारिका ठाकुर, महेश उरांव, बंधवा देवी, फुलदेव लोहरा, नमीया देवी, दीपक लोहरा सहित कई ग्रामीण मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में शीघ्र पेयजल संकट दूर करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

न्यूज़ देखो: कागजों में योजना, जमीन पर संकट

कामता पंचायत की स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी की भारी कमी है। करोड़ों खर्च के बावजूद पानी नहीं मिलना प्रशासन और ठेकेदार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संकट को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पानी जीवन है, इसे उपेक्षा नहीं सहनी चाहिए

पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही पूरे समाज को प्रभावित करती है। यदि आप भी अपने क्षेत्र में ऐसी समस्या झेल रहे हैं, तो आवाज उठाएं। इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और जवाबदेही तय करने में भागीदार बनें।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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