
#खलारीरांची #सरहुलपर्व : पारंपरिक पूजा और शोभायात्रा से क्षेत्र में दिखा आदिवासी संस्कृति का उल्लास।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र में सरहुल पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। महावीर नगर कमाती धौड़ा स्थित सरना स्थल पर पाहन द्वारा पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस आयोजन में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी रही। यह पर्व आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
- खलारी क्षेत्र में सरहुल पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया।
- पाहन विनोद मुंडा और सुरजन मुंडा ने सरना स्थल पर विधिवत पूजा की।
- महावीर नगर से चदरा धौड़ा तक निकली भव्य शोभायात्रा।
- अंचलाधिकारी प्रणव अम्बष्ट सहित कई जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित।
- मांदर, ढोल, नगाड़ों के साथ नृत्य और अबीर-गुलाल से सजी शोभायात्रा।
- विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग।
रांची जिले के खलारी में सरहुल पर्व को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। यह पर्व आदिवासी समाज के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे प्रकृति और पेड़-पौधों की पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ सरना स्थल पर जुटनी शुरू हो गई थी।
सरना स्थल पर पारंपरिक पूजा से हुई शुरुआत
महावीर नगर कमाती धौड़ा स्थित सरना स्थल पर पाहन विनोद मुंडा एवं सुरजन मुंडा ने पारंपरिक विधि-विधान से सरहुल पूजा संपन्न कराई। पूजा के दौरान प्रकृति, जल, जंगल और जमीन की समृद्धि की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने सरना स्थल पर एकत्र होकर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में भाग लिया।
विनोद मुंडा ने कहा: “सरहुल पर्व प्रकृति के प्रति हमारी आस्था और परंपरा का प्रतीक है, जिसे हम सदियों से निभाते आ रहे हैं।”
भव्य शोभायात्रा में झलकी सांस्कृतिक विरासत
पूजा के बाद महावीर नगर से चदरा धौड़ा तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा में मांदर, ढोल और नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। रास्ते भर अबीर-गुलाल उड़ाकर खुशी का इजहार किया गया, जिससे पूरा वातावरण रंगीन और उल्लासपूर्ण हो गया।
शोभायात्रा में शामिल युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने एक साथ मिलकर सांस्कृतिक एकता और परंपरा का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही सक्रिय उपस्थिति
इस अवसर पर कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें अंचलाधिकारी प्रणव अम्बष्ट, इंस्पेक्टर जयदीप टोप्पो, विधायक प्रतिनिधि मोनु रजक, जिला परिषद सदस्य सरस्वती देवी, कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी शामिल थे।
इसके अलावा विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि जैसे मुखिया पुतुल देवी, मुखिया सुनीता देवी, मुखिया दीपमाला कुमारी, मुखिया ललिता देवी, मुखिया शिवरत मुंडा, मुखिया संतोष महली, मुखिया पारसनाथ उरांव, मुखिया मलका मुंडा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों में झामुमो प्रखंड अध्यक्ष श्यामजी महतो और मजदूर नेता रतिया गंझू की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने निभाई सहभागिता
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से राजकुमार उरांव, रंथू उरांव, अमृत भोगता, रामलखन गंझु, प्रभाकर गंझू, शशि मुंडा, सुभाष उरांव, रमेशर भोगता, वीरू नायक, मनोज भुइयां, शिवलाल मुंडा सहित कई लोग मौजूद रहे।
सभी ने मिलकर इस पर्व को सफल बनाने में योगदान दिया और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
सरहुल पर्व का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
सरहुल पर्व आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जो प्रकृति पूजा और नए साल के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग साल वृक्ष की पूजा करते हैं और प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह पर्व समाज में भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
न्यूज़ देखो: सरहुल से दिखी संस्कृति और एकता की झलक
खलारी में सरहुल पर्व का आयोजन यह दर्शाता है कि आज भी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाज समाज में जीवंत हैं। इस तरह के आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत बनाते हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपस्थिति इस आयोजन के महत्व को और बढ़ाती है। भविष्य में ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की आवश्यकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी संस्कृति से जुड़ें और परंपराओं को आगे बढ़ाएं
सरहुल जैसे पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करने का अवसर देते हैं। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं।






