गढ़वा में सीआरपीएफ का 87वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया, शौर्य और बलिदान को किया गया नमन

गढ़वा में सीआरपीएफ का 87वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया, शौर्य और बलिदान को किया गया नमन

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #CRPF : फिट इंडिया अभियान के तहत साइकिल रैली से हुई शुरुआत—शहीदों को श्रद्धांजलि और वीरता की गाथाओं का हुआ स्मरण
  • गढ़वा स्थित 172 बटालियन परिसर में सीआरपीएफ का 87वां स्थापना दिवस मनाया गया।
  • कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6 बजे साइकिल रैली से हुई।
  • शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।
  • मुख्य अतिथि द्वितीय कमान अधिकारी कुलदीप कुमार ने सैनिक सम्मेलन को संबोधित किया।
  • सीआरपीएफ की ऐतिहासिक वीरता और बलिदानों का उल्लेख कर जवानों का उत्साह बढ़ाया गया।

गढ़वा: सीआरपीएफ का 87वां स्थापना दिवस बुधवार को गढ़वा स्थित 172 बटालियन के परिसर में बड़े ही उत्साह और सम्मान के साथ मनाया गया। यह समारोह देशभक्ति और शौर्य की प्रेरणा से सराबोर रहा।

फिट इंडिया के तहत साइकिल रैली से हुआ आगाज

सुबह 6 बजे फिट इंडिया और खेलो इंडिया अभियान के तहत साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में बटालियन के सभी अधिकारी और जवानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रैली का उद्देश्य जवानों को फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था।

शहीदों को श्रद्धांजलि और सैनिक सम्मेलन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, 172वीं बटालियन के द्वितीय कमान अधिकारी कुलदीप कुमार ने शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद सैनिक सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में उन्होंने बल के इतिहास, वीरता, बलिदान और शौर्य की गाथाएं साझा कीं।

कुलदीप कुमार ने कहा: “सीआरपीएफ सदैव देश सेवा और कर्तव्यपथ पर अग्रसर है। हजारों जवानों ने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।”

ऐतिहासिक वीरता की कहानियां साझा

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख में चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए सीआरपीएफ के 10 जवानों ने प्राण न्योछावर किए, जिसकी याद में हर वर्ष पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। उन्होंने रण ऑफ कच्छ में पाकिस्तानी हमले, अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद, और संसद भवन पर हुए आतंकी हमलों में सीआरपीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।

स्थापना दिवस पर जवानों में दिखा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान जवानों में गजब का उत्साह नजर आया। इस अवसर पर बल की गौरवशाली परंपरा को स्मरण करने के साथ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का संदेश दिया गया।

न्यूज़ देखो: शौर्य की अमर गाथा

गढ़वा में मनाया गया यह समारोह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि देश सेवा की उस भावना का प्रतीक है जो हर जवान को प्रेरित करती है। सीआरपीएफ के त्याग और समर्पण को सम्मान देना हमारी जिम्मेदारी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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ऐसे आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा में जवानों का योगदान सर्वोपरि है। आइए, इस संदेश को और फैलाएं। अपनी राय कमेंट करें और इसे अधिक से अधिक साझा करें।

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गढ़वा

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