समाहरणालय की बंजर जमीन को डीसी सिमडेगा ने बनाया हरियाली का मॉडल खेतों में उतरकर रचा बदलाव

समाहरणालय की बंजर जमीन को डीसी सिमडेगा ने बनाया हरियाली का मॉडल खेतों में उतरकर रचा बदलाव

author Satyam Kumar Keshri
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#सिमडेगा #प्रशासनिक_पहल : डीसी के नेतृत्व में समाहरणालय परिसर की बंजर जमीन पर खेती कर हरियाली विकसित की गई।

सिमडेगा समाहरणालय परिसर की वर्षों से बंजर पड़ी जमीन को जिला प्रशासन ने हरियाली में बदलने की पहल की है। उपायुक्त सिमडेगा के नेतृत्व में इस जमीन पर खेती शुरू कर गेहूं और सरसों जैसी फसलें उगाई गई हैं। अधिकारियों ने खुद खेतों में उतरकर काम किया, जिससे यह पहल एक मॉडल के रूप में उभरी है। यह बदलाव संसाधनों के बेहतर उपयोग और सकारात्मक प्रशासनिक सोच का उदाहरण बन रहा है।

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  • सिमडेगा समाहरणालय परिसर की बंजर जमीन को हरियाली में बदला गया।
  • डीसी सिमडेगा ने खुद खेतों में उतरकर रोपाई कार्य किया।
  • करीब दो एकड़ जमीन पर गेहूं और सरसों की खेती शुरू हुई।
  • परिसर में फूलों के गार्डन और हरी फसलें लहलहा रही हैं।
  • यह पहल संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक सोच का उदाहरण बनी।

सिमडेगा समाहरणालय परिसर में अब वह पुराना दृश्य नहीं दिखता, जहां सरकारी दफ्तरों के पीछे की जमीन अक्सर झाड़ियों और कबाड़ से भरी रहती थी। आज यह परिसर हरियाली और खेती का एक सुंदर उदाहरण बन चुका है। जिला प्रशासन की पहल से यहां की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर खेती शुरू की गई है, जिससे न केवल परिसर की सुंदरता बढ़ी है बल्कि एक सकारात्मक संदेश भी गया है।

बंजर जमीन को पहचान कर शुरू की गई पहल

समाहरणालय परिसर किसी भी जिले का प्रमुख केंद्र होता है, लेकिन अक्सर इसके पीछे की जमीनों का सही उपयोग नहीं हो पाता। सिमडेगा में भी यह जमीन वर्षों से खाली और अनुपयोगी पड़ी थी।

उपायुक्त ने इस स्थिति को बदलने का निर्णय लिया और इस जमीन में संभावनाएं तलाशीं। उन्होंने यह समझा कि यदि सही योजना और प्रयास किया जाए, तो इस जमीन का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

अधिकारियों ने खुद संभाली जिम्मेदारी

इस पहल की सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन ने केवल निर्देश देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि खुद मैदान में उतरकर काम किया।

प्रशासनिक पहल से जुड़े अधिकारियों ने कहा: “सही सोच और सामूहिक प्रयास से किसी भी बेकार जमीन को उपयोगी बनाया जा सकता है।”

उपायुक्त सहित अन्य अधिकारियों ने खुद खेतों में उतरकर रोपाई और अन्य कृषि कार्यों में हिस्सा लिया। इससे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में भी उत्साह का माहौल बना।

दो एकड़ में लहलहाई फसलें

आज समाहरणालय परिसर की करीब दो एकड़ जमीन पर गेहूं और सरसों जैसी फसलें लहलहा रही हैं। इसके साथ ही परिसर में सुंदर फूलों के गार्डन भी विकसित किए गए हैं, जो पूरे वातावरण को आकर्षक बना रहे हैं।

यह दृश्य न केवल प्रशासनिक परिसर की छवि को बेहतर बना रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि थोड़े प्रयास से बड़े बदलाव संभव हैं।

विकास की नई सोच का उदाहरण

यह पहल यह साबित करती है कि विकास केवल बड़े बजट या योजनाओं का मोहताज नहीं होता। सही दृष्टिकोण और नेतृत्व के बल पर छोटे स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

जिस जमीन को पहले बेकार समझा जाता था, वही अब हरियाली और उत्पादन का केंद्र बन गई है। यह बदलाव प्रशासनिक सोच में आए सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।

अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा

सिमडेगा की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है। यदि हर जिले में इस तरह की सोच अपनाई जाए, तो सरकारी परिसरों की बेकार जमीनों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण और उत्पादन दोनों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

न्यूज़ देखो: छोटी पहल से बड़ा बदलाव प्रशासनिक सोच का नया उदाहरण

सिमडेगा में समाहरणालय परिसर की बंजर जमीन को हरियाली में बदलना यह दर्शाता है कि यदि नेतृत्व मजबूत हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा परिवर्तन संभव है। यह पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि संसाधनों के सही उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। अब सवाल यह है कि क्या इस मॉडल को अन्य जिलों में भी अपनाया जाएगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हरियाली से बदलाव की शुरुआत आप भी कर सकते हैं

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की भागीदारी जरूरी है।
छोटी-छोटी पहल जैसे घर या आसपास खाली जमीन पर पौधे लगाना बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है।

सिमडेगा की यह पहल हमें सिखाती है कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी जमीन बेकार नहीं होती।
आइए हम भी अपने आसपास हरियाली बढ़ाने का संकल्प लें।

प्रकृति को बचाना है तो आज से ही कदम उठाएं।
अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को शेयर करें और हरियाली बढ़ाने के इस संदेश को आगे फैलाएं।

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Written by

सिमडेगा नगर क्षेत्र

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