
#खलारी #सरहुल_रामनवमी : ग्रामीणों की बैठक में मेला, शोभायात्रा और लाठी खेल प्रतियोगिता आयोजित करने का फैसला।
रांची जिले के खलारी प्रखंड अंतर्गत राय पंचायत भवन में आयोजित ग्रामीणों की बैठक में इस वर्ष सरहुल और रामनवमी पूजा धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से सरहुल मेला समिति और रामनवमी मेला समिति का गठन किया गया। कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां भी तय की गईं।
- राय पंचायत भवन में ग्रामीणों की बैठक में पूजा आयोजन को लेकर निर्णय।
- 23 मार्च को अंबेडकर मैदान राय में सरहुल मेला और शोभायात्रा निकलेगी।
- 26 मार्च को शिव मंदिर राय में रामनवमी मेला, शोभायात्रा और लाठी खेल प्रतियोगिता।
- नई समिति में विजय उर्फ बैलून पाहन अध्यक्ष और दुर्गा प्रसाद महतो सचिव बनाए गए।
- आयोजन को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकारिणी और संरक्षक मंडल का गठन।
खलारी प्रखंड के राय पंचायत भवन में शुक्रवार को ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस वर्ष सरहुल और रामनवमी पूजा को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता विजय पाहन ने की, जबकि संचालन प्रदीप उरांव ने किया। बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दोनों पर्वों का आयोजन पारंपरिक तरीके से और भव्य रूप में किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि सरहुल और रामनवमी दोनों ही पर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन पर्वों को मिलजुल कर मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाना जरूरी है।
23 मार्च को निकलेगी सरहुल शोभायात्रा
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 23 मार्च को अंबेडकर मैदान राय में सरहुल मेला का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी और गांव में भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया कि सरहुल पर्व प्रकृति और आदिवासी संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है। इस दिन गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर उत्सव को सामूहिक रूप से मनाते हैं। मेले में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी रहती है।
रामनवमी पर मेला और लाठी खेल प्रतियोगिता
बैठक में यह भी तय किया गया कि 26 मार्च को शिव मंदिर राय में रामनवमी मेला का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
रामनवमी के अवसर पर पारंपरिक लाठी खेल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के युवा भाग लेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रतियोगिता लंबे समय से क्षेत्र की परंपरा का हिस्सा रही है और इसे बनाए रखना जरूरी है।
नई मेला समिति का गठन
आयोजन को सफल बनाने के लिए बैठक में सरहुल मेला समिति एवं रामनवमी मेला समिति राय का गठन किया गया। समिति के पदाधिकारियों का चयन सर्वसम्मति से किया गया।
समिति में अध्यक्ष विजय उर्फ बैलून पाहन, सचिव दुर्गा प्रसाद महतो, कोषाध्यक्ष रूपेश कुमार महतो, उपाध्यक्ष भुवनेश्वर महतो, संयुक्त सचिव हरीश कुमार महतो, उप कोषाध्यक्ष विजय कुमार महतो तथा मीडिया प्रभारी गणेश कुमार महतो को जिम्मेदारी दी गई।
संरक्षक और कार्यकारिणी सदस्य भी चुने गए
समिति के संरक्षक मंडल में नागेश्वर महतो, लालेश्वर महतो, प्रदीप उरांव, एतवारा महतो, राजू गुप्ता, रामकुमार भुइया, दीपक कुमार महतो, राम अवतार राम, राजेश महतो, मनोज महतो और बालेश्वर महतो को शामिल किया गया।
इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के रूप में सोनू महतो, संतोष प्रजापति, हबु महतो, सरवन मद्रासी, हरि महतो, कालेश्वर महतो, रीतेश कुमार, सुलेन्द्र महतो, अमन मुंडा, प्रकाश महतो, नरेश महतो, संजय कुमार महतो, रितेश महतो, रंजीत महतो, लक्कू महतो, सुरेश महतो, लखन महतो, पारस महतो, टिकेश्वर महतो, राहुल महतो, संदीप महतो, राजीव कुमार साहनी, भूगलू उरांव, रामू उरांव, चंदन महतो, प्रेम कुमार महतो, जयप्रकाश महतो, कृष्णा कुमार साहनी और विजय महतो को जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने सभी पदाधिकारियों को बधाई दी और भरोसा जताया कि समिति के नेतृत्व में इस वर्ष दोनों पर्वों का आयोजन भव्य और सफल तरीके से किया जाएगा।
न्यूज़ देखो: संस्कृति और एकता का प्रतीक हैं ऐसे आयोजन
ग्रामीण क्षेत्रों में सरहुल और रामनवमी जैसे पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक भी होते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से गांव के लोग एक मंच पर आते हैं और पारंपरिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं।
राय में आयोजित बैठक यह दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को लेकर कितने सजग हैं। सामूहिक प्रयास से होने वाले ऐसे आयोजन समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे को भी मजबूत बनाते हैं।
मिलजुल कर मनाए जाने वाले पर्व बढ़ाते हैं सामाजिक एकता
जब समाज के लोग मिलकर त्योहारों और मेलों का आयोजन करते हैं, तो इससे नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। यही सामूहिक भावना किसी भी समाज को मजबूत बनाती है।
जरूरी है कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाए, ताकि समाज की पहचान और परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकें।
आपके क्षेत्र में भी यदि कोई सांस्कृतिक या सामाजिक कार्यक्रम हो रहा है, तो उसकी जानकारी हमें जरूर दें। ‘न्यूज़ देखो’ आपके क्षेत्र की हर महत्वपूर्ण खबर को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है।






