रांची के मोराबादी मैदान में स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला 2026 में ग्रामीण महिलाओं का हुनर चमका, डब्ल्यूसीएसएफ फाउंडेशन का स्टॉल बना आकर्षण

रांची के मोराबादी मैदान में स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला 2026 में ग्रामीण महिलाओं का हुनर चमका, डब्ल्यूसीएसएफ फाउंडेशन का स्टॉल बना आकर्षण

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#रांची #हैंडलूमसरसमेला : मोराबादी मैदान में लगे मेले में ग्रामीण महिलाओं के हस्तनिर्मित परिधानों और उत्पादों को मिल रही सराहना

रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला 2026 में झारखंड की पारंपरिक कला और ग्रामीण महिलाओं के कौशल की झलक देखने को मिल रही है। झारक्राफ्ट द्वारा आयोजित इस मेले में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन का स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और प्रशिक्षण प्राप्त युवतियों द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है।

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  • झारक्राफ्ट द्वारा आयोजित स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला 2026 में लगा डब्ल्यूसीएसएफ फाउंडेशन का स्टॉल।
  • स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और प्रशिक्षण प्राप्त युवतियों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी।
  • स्टॉल पर पेटीकोट, नाइटी, ब्लाउज़, कुर्ती सहित कई उपयोगी परिधान उपलब्ध।
  • स्टॉल संचालन में सबिता, अनीता, जयसिंता और गुड़िया सहित कई महिलाएँ सक्रिय।
  • ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार, कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक पहल।

रांची के मोराबादी मैदान में इन दिनों राज्य की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों की समृद्ध झलक देखने को मिल रही है। झारक्राफ्ट द्वारा आयोजित स्टेट हैंडलूम एंड सरस मेला 2026 में झारखंड के विभिन्न जिलों से आए कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संस्थाओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और उन्हें बाजार से जोड़ने का अवसर दिया गया है।

इसी मेले में डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन का स्टॉल भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टॉल के माध्यम से संस्था से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और सिलाई प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही युवतियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है।

महिलाओं के हुनर से तैयार आकर्षक उत्पाद

फाउंडेशन के स्टॉल पर महिलाओं के दैनिक उपयोग से जुड़े कई प्रकार के परिधान और वस्तुएँ उपलब्ध हैं। इनमें पेटीकोट, नाइटी, ब्लाउज़, कुर्ती सहित अन्य आकर्षक कपड़े और उपयोगी सामान शामिल हैं। इन सभी वस्तुओं को ग्रामीण महिलाओं और प्रशिक्षण प्राप्त युवतियों ने अपने कौशल, मेहनत और रचनात्मकता के साथ तैयार किया है।

मेले में आने वाले आगंतुक इन उत्पादों को काफी पसंद कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार इन वस्तुओं की गुणवत्ता, डिजाइन और उपयोगिता की लोग सराहना कर रहे हैं। यही कारण है कि स्टॉल पर लगातार लोगों की भीड़ देखी जा रही है।

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी

इस स्टॉल के संचालन और उत्पादों की बिक्री में संस्था से जुड़ी महिलाएँ सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं। स्टॉल पर सबिता, अनीता, जयसिंता और गुड़िया सहित अन्य महिलाएँ पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ आगंतुकों को उत्पादों की जानकारी दे रही हैं।

वे न केवल उत्पादों की विशेषताओं के बारे में बता रही हैं बल्कि ग्राहकों को यह भी समझा रही हैं कि इन वस्तुओं को किस प्रकार स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया है। उनकी सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि जब महिलाओं को प्रशिक्षण और अवसर मिलता है तो वे अपने कौशल के बल पर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

डब्ल्यूसीएसएफ चैरिटीस्पिरिट फाउंडेशन का यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संस्था का उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

जब महिलाओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने का अवसर मिलता है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होती हैं। इस प्रकार के मंच महिलाओं को अपने कार्य को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं।

मेले से बढ़ रहा आत्मविश्वास और आय

स्टेट हैंडलूम और सरस मेले जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने का मौका मिलता है। इससे वे सीधे ग्राहकों से जुड़ पाती हैं और बाजार की मांग को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं।

इससे उनकी आय में वृद्धि होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूती के साथ आगे बढ़ पाती हैं। यही कारण है कि ऐसे मेले ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

न्यूज़ देखो : कौशल विकास और बाजार से जुड़ाव जरूरी

झारखंड जैसे राज्यों में जहां बड़ी संख्या में महिलाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं, वहां कौशल विकास और बाजार से जुड़ाव बेहद जरूरी है। स्टेट हैंडलूम और सरस मेला जैसे आयोजन इन महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं। यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे तो ग्रामीण महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त बनकर राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

हुनर को मंच मिले तो बदल सकती है जिंदगी

हर महिला के भीतर एक हुनर छिपा होता है, जरूरत होती है उसे सही मंच और अवसर मिलने की। जब समाज और संस्थाएँ मिलकर महिलाओं को प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ती हैं तो वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज का भविष्य बदल सकती हैं।

अगर आपको भी ऐसे प्रयास प्रेरित करते हैं तो इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और ग्रामीण महिलाओं के हुनर को समर्थन दें।

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