
#जमशेदपुर #रक्षा_बजट : रिकॉर्ड वृद्धि के साथ सैन्य आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत पर सरकार का फोकस।
भारत सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया जाना अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट है। इस बजट में 15 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा हालातों के बीच भारत की सैन्य प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कैपिटल बजट में 22 प्रतिशत की वृद्धि से तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बल मिला है। यह बजट भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति और आत्मनिर्भरता के संकल्प को रेखांकित करता है।
- 7.85 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट।
- कुल बजट में 15 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज।
- 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल बजट, जिसमें 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
- तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर।
- ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को मिला नया संबल।
भारत सरकार द्वारा घोषित 7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट केवल एक वित्तीय घोषणा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा नीति और रणनीतिक सोच का स्पष्ट संकेत है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, क्षेत्रीय अस्थिरता और बदलते युद्ध स्वरूप के बीच यह बजट यह दर्शाता है कि भारत अपनी सैन्य तैयारियों में किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।
रक्षा बजट में ऐतिहासिक वृद्धि का महत्व
इस वर्ष रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह वृद्धि उस समय सामने आई है जब भारत को दो सक्रिय सीमाओं पर लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति को मजबूत करता है।
कैपिटल बजट से सैन्य आधुनिकीकरण को गति
रक्षा बजट का सबसे अहम हिस्सा 2.19 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल बजट है, जिसमें 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि सीधे तौर पर थल सेना, नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी हुई है।
इस बजट से:
- नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों
- उन्नत ड्रोन तकनीक
- एयर डिफेंस सिस्टम
- अत्याधुनिक युद्धपोत और सबमरीन
- आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम
- नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताओं
में बड़े स्तर पर निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
आधुनिक युद्ध और तकनीकी सुदृढ़ीकरण
आज का युद्ध केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीक, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लड़ा जाता है। ऐसे में कैपिटल बजट में वृद्धि भारतीय सेनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा
बढ़ा हुआ रक्षा बजट ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई ऊर्जा देगा। इस बजट से:
- सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों
- निजी रक्षा कंपनियों
- स्टार्टअप्स
- MSME सेक्टर
को रक्षा उत्पादन में अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के भीतर रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
सैनिकों के मनोबल और आधारभूत ढांचे पर प्रभाव
रक्षा बजट केवल हथियारों और मशीनों तक सीमित नहीं होता। इसका सीधा असर:
- सैनिकों के प्रशिक्षण
- लॉजिस्टिक्स सिस्टम
- सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें और हवाई पट्टियां
- संचार नेटवर्क
- सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर
पर भी पड़ता है। बढ़ा हुआ बजट यह भरोसा देता है कि देश अपने सैनिकों की जरूरतों और उनके मनोबल को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वरुण कुमार, संस्थापक अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, ने कहा:
“7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत के रणनीतिक संकल्प और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों का प्रतिबिंब है। कैपिटल बजट में 22 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि सरकार दीर्घकालिक सैन्य क्षमताओं के निर्माण को लेकर गंभीर है।”
कूटनीतिक और वैश्विक प्रभाव
मजबूत सैन्य क्षमता केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह कूटनीतिक प्रभाव को भी बढ़ाती है। यह बजट मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को नई गति दे सकता है और भारत की वैश्विक भूमिका को और सशक्त बना सकता है।
न्यूज़ देखो: सुरक्षा के साथ आत्मनिर्भरता का संतुलन
यह रक्षा बजट दिखाता है कि भारत सुरक्षा, तकनीक और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच यह बजट भारत की स्पष्ट रणनीतिक सोच को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में इसके परिणाम रक्षा क्षमता और घरेलू उद्योग दोनों में दिखाई देंगे।
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मजबूत भारत की नींव, सुरक्षित भविष्य की ओर कदम
रक्षा बजट देश की सुरक्षा का आधार है।
सजग नागरिक ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं।
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