
#बरवाडीह #रविदास_जयंती : ग्रामीण सहभागिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ गूंजा समरसता का संदेश।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत ग्राम कुचिला अम्बेडकर नगर में एक फरवरी रविवार को संत शिरोमणी रविदास जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। स्थानीय युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। समारोह में संत रविदास के विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोजन ने क्षेत्र में भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूती प्रदान की।
- ग्राम कुचिला अम्बेडकर नगर में संत शिरोमणी रविदास जयंती का आयोजन।
- कार्यक्रम में ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों की बड़ी भागीदारी।
- निजामुद्दीन अंसारी रहे मुख्य अतिथि, मिठू कुमार ने की अध्यक्षता।
- संत रविदास के जीवन, विचार और समरसता संदेश पर हुआ विमर्श।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भक्ति गीतों से माहौल हुआ भक्तिमय।
बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के ग्राम कुचिला अम्बेडकर नगर में आयोजित संत शिरोमणी रविदास जयंती समारोह सामाजिक एकता और धार्मिक श्रद्धा का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। एक फरवरी, रविवार को हुए इस आयोजन में गांव के हर वर्ग की सहभागिता देखने को मिली। स्थानीय युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से हुए कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत संत रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने श्रद्धा भाव से संत शिरोमणी को नमन किया और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
संत रविदास के विचारों पर हुआ विमर्श
समारोह में वक्ताओं ने संत रविदास के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज को समानता, प्रेम और भाईचारे का मार्ग दिखाया। उनके विचार आज भी सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने और मानवता को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं।
मुख्य अतिथि निजामुद्दीन अंसारी ने अपने संबोधन में कहा:
“संत रविदास का जीवन हमें यह सिखाता है कि समाज का उत्थान तभी संभव है जब हम जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे को अपनाएं।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मिठू कुमार ने कहा कि संत रविदास केवल एक संत नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के प्रतीक थे, जिनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
आयोजन समिति की भूमिका
आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सचिव अनुज राम और कोषाध्यक्ष मनीष कुमार ने आयोजन की सफलता के लिए सभी सहयोगियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।
समिति के संरक्षक प्रमोद कुमार ने कहा:
“संत रविदास का जीवन समाज में समानता, प्रेम और भाईचारे की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का कार्य करते हैं।”
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। बच्चों और युवाओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। ग्रामीणों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
मीडिया प्रभारी मधुरेंद्र कुमार ने कार्यक्रम की समस्त गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोजन का उद्देश्य केवल जयंती मनाना नहीं, बल्कि संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
समारोह में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें
डॉक्टर रामशनेही राम, शिक्षक तपनरायण राम, कमलेश राम, अरविंद कुमार, मुकेश कुमार रवि, उपेन्द्र कुमार, अभियंता आदित्य कुमार, बिरेंद्र कुमार, दिनेश कुमार (डीजे), नरेश राम सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।
इसके अलावा वार्ड सदस्या दीपा कुमारी की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। ग्रामीणों ने उनके सामाजिक योगदान की सराहना की।
सामाजिक एकता का संदेश
पूरे आयोजन के दौरान एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि संत रविदास जयंती केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक चेतना का पर्व बन चुकी है। ग्रामीणों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाते हुए समाज में भाईचारे का संदेश दिया।

न्यूज़ देखो: गांव से उठती समरसता की आवाज
कुचिला अम्बेडकर नगर में आयोजित यह कार्यक्रम बताता है कि ग्रामीण स्तर पर भी सामाजिक समरसता और समानता के विचार कितनी मजबूती से जीवित हैं। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य करते हैं। प्रशासन और समाज दोनों को ऐसे प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित करना चाहिए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संत रविदास के विचारों से मजबूत होगा समाज
समानता और भाईचारे की राह ही प्रगति का मार्ग है।
ऐसे आयोजनों में भाग लेकर सामाजिक एकता को मजबूत करें।
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