#गिरिडीह #पुस्तकालय_मांग : वार्ड 18 स्थित बंद पुस्तकालय को पुनः चालू कराने को लेकर शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने उठाई आवाज।
गिरिडीह के वार्ड 18 स्थित सिद्धू कान्हु सह सावित्री बाई फुले पुस्तकालय को फिर से शुरू करने की मांग तेज हो गई है। शिक्षा जगत से जुड़े करियर कैंपस के निदेशक राजेश सिन्हा ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से हस्तक्षेप कर पुस्तकालय को पुनः चालू कराने की अपील की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुस्तकालय बंद रहने से छात्रों का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। साथ ही भवन निर्माण की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।
- सिद्धू कान्हु सह सावित्री बाई फुले पुस्तकालय को पुनः खोलने की मांग।
- शिक्षा क्षेत्र से जुड़े राजेश सिन्हा ने मंत्री से की अपील।
- वार्ड 18 में स्थित पुस्तकालय करीब सवा साल से बंद।
- छात्रों के बेहतर शैक्षणिक माहौल पर जताई गई चिंता।
- पुस्तकालय का उद्घाटन 1 फरवरी 2025 को हुआ था।
- भवन निर्माण की जांच कराने की भी उठी मांग।
गिरिडीह नगर क्षेत्र के वार्ड संख्या 18 स्थित सिद्धू कान्हु सह सावित्री बाई फुले पुस्तकालय को पुनः शुरू करने की मांग एक बार फिर उठने लगी है। शिक्षा जगत से जुड़े करियर कैंपस के निदेशक राजेश सिन्हा ने झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से इस पुस्तकालय को दोबारा चालू कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय बंद रहने से क्षेत्र के छात्रों और युवाओं को नुकसान हो रहा है।
राजेश सिन्हा ने बताया कि यह पुस्तकालय उद्घाटन के बाद केवल तीन से चार महीने तक बेहतर तरीके से संचालित हो सका, लेकिन उसके बाद पिछले लगभग सवा साल से बंद पड़ा है। इससे स्थानीय छात्रों में निराशा का माहौल है।
उद्घाटन के बाद बंद हो गया पुस्तकालय
जानकारी के अनुसार, इस पुस्तकालय का उद्घाटन 1 फरवरी 2025 को मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के हाथों किया गया था। उद्घाटन के बाद शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में छात्र पुस्तकालय पहुंचते थे और पढ़ाई का माहौल बना हुआ था।
लेकिन कुछ महीनों बाद पुस्तकालय संचालन से जुड़े कर्मियों के हटने या चले जाने के बाद यह व्यवस्था ठप हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पीछे क्या कारण रहा, इसकी जानकारी जिला प्रशासन ही बेहतर तरीके से दे सकता है।
पिछड़े इलाके के छात्रों के लिए जरूरी है पुस्तकालय
राजेश सिन्हा ने कहा कि वार्ड 18 एक पिछड़ा इलाका माना जाता है और यहां छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यदि पुस्तकालय नियमित रूप से संचालित हो, तो आसपास के बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के लिए एक सकारात्मक वातावरण मिलेगा। इससे शिक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी और युवाओं को गलत गतिविधियों से दूर रखने में मदद मिलेगी।
राजेश सिन्हा ने कहा: “पुस्तकालय अच्छे उद्देश्य से शुरू किया गया था, इसे फिर से बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तकालय का प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए, जो समय पर व्यवस्था संभालने और संचालन को नियमित बनाए रखने की क्षमता रखते हों।
महान विभूतियों के नाम पर है पुस्तकालय
राजेश सिन्हा ने कहा कि पुस्तकालय का नाम जिन महान विभूतियों पर रखा गया है, उनका इतिहास प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि सिद्धू-कान्हु संथाल विद्रोह के महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष कर इतिहास रचा। वहीं सावित्री बाई फुले भारत में महिलाओं की शिक्षा की अग्रदूत मानी जाती हैं और उन्होंने महिलाओं के लिए पहला स्कूल खोलकर समाज में नई चेतना जगाई थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों और समाज सुधारकों के नाम पर बने पुस्तकालय को बंद रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
भवन निर्माण की जांच की भी मांग
पुस्तकालय को पुनः शुरू करने की मांग के साथ-साथ भवन निर्माण की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। राजेश सिन्हा ने कहा कि प्रशासन को इस पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुस्तकालय का संचालन पारदर्शी और नियमित तरीके से हो।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार सकारात्मक पहल करें, तो यह पुस्तकालय फिर से छात्रों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र बन सकता है।
छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
स्थानीय लोगों का मानना है कि पुस्तकालय दोबारा शुरू होने से न केवल वार्ड 18 बल्कि आसपास के कई क्षेत्रों के छात्रों को लाभ मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी यह पुस्तकालय काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा और जागरूकता का केंद्र बन सकते हैं सार्वजनिक पुस्तकालय
सार्वजनिक पुस्तकालय केवल किताबों तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज में शिक्षा, जागरूकता और सकारात्मक माहौल तैयार करने का माध्यम भी बनते हैं। यदि सिद्धू कान्हु सह सावित्री बाई फुले पुस्तकालय को फिर से नियमित रूप से संचालित किया जाता है, तो इससे क्षेत्र के सैकड़ों छात्रों को लाभ मिल सकता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा का दीपक बुझने न दें
जब किसी क्षेत्र में पुस्तकालय और शिक्षा केंद्र सक्रिय रहते हैं, तब वहां के युवाओं का भविष्य मजबूत होता है। किताबें समाज को नई दिशा देती हैं और युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करती हैं।
आइए, शिक्षा और ज्ञान के ऐसे केंद्रों को बचाने और मजबूत करने के लिए आवाज उठाएं।
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