Palamau

कड़ाके की ठंड में उपमुखिया सतबीर सिंह बने गरीबों की ढाल, 100 कंबल बांटकर निभाया जनसेवा का फर्ज

#पलामू #कंबल_वितरण : मुसीखाप पंचायत में उपमुखिया की पहल से जरूरतमंदों को मिली ठंड से राहत।

पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत मुसीखाप पंचायत में कड़ाके की ठंड के बीच उपमुखिया सतबीर सिंह ने मानवीय पहल करते हुए 100 जरूरतमंद परिवारों के बीच कंबल का वितरण किया। ठंड से जूझ रहे गरीब और असहाय लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपमुखिया ने इसे जनप्रतिनिधि का कर्तव्य बताते हुए सरकार से पंचायत स्तर पर व्यापक सहायता की मांग भी रखी। यह पहल ठंड के मौसम में सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनी।

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  • मुसीखाप पंचायत में उपमुखिया सतबीर सिंह द्वारा 100 कंबलों का वितरण।
  • कड़ाके की ठंड से जूझ रहे गरीब व असहाय परिवारों को मिली राहत।
  • उपमुखिया ने सरकार से प्रत्येक पंचायत को 500 कंबल देने की मांग की।
  • कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरों पर दिखी मुस्कान और संतोष
  • ग्रामीणों ने पहल को बताया सच्ची जनसेवा का उदाहरण

झारखंड के पलामू जिले में इन दिनों ठंड अपने चरम पर है। रात के समय तापमान तेजी से गिरने के कारण गरीब, वृद्ध और असहाय परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके पास ठंड से बचने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। ऐसे हालात में पाण्डु प्रखंड अंतर्गत मुसीखाप पंचायत के उपमुखिया सतबीर सिंह ने आगे बढ़कर मानवीय जिम्मेदारी निभाई और जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण कर ठिठुरती जिंदगी को राहत पहुंचाई।

यह कंबल वितरण कार्यक्रम पंचायत क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हुए। उपमुखिया सतबीर सिंह के नेतृत्व में 100 कंबलों का वितरण किया गया, जिसमें वृद्ध, महिलाएं, बच्चे और बेहद गरीब परिवार शामिल थे। ठंड से कांपते लोगों को जब कंबल मिला, तो उनके चेहरों पर राहत साफ झलक रही थी।

संकट की घड़ी में जनप्रतिनिधि की भूमिका

कंबल वितरण के दौरान उपमुखिया सतबीर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनप्रतिनिधि का असली धर्म केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में साथ खड़ा रहना है। उन्होंने कहा—

उपमुखिया सतबीर सिंह ने कहा: “ठंड में किसी गरीब को ठिठुरते देखना अमानवीय है। समाज के सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए और सरकार को भी इस दिशा में गंभीर पहल करनी होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर सीमित संसाधनों के बावजूद जितना संभव हो सका, उतनी मदद करने का प्रयास किया गया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

सरकार से बड़ी पहल की मांग

उपमुखिया सतबीर सिंह ने राज्य सरकार से मांग की कि ठंड के मौसम को देखते हुए हर पंचायत को कम से कम 500 कंबल उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना था कि पंचायत क्षेत्र में जरूरतमंदों की संख्या कहीं अधिक है और 100 कंबल से सभी को कवर करना संभव नहीं हो पाता।

उन्होंने कहा कि कई बार अत्यधिक ठंड के कारण गरीब और बेसहारा लोगों की जान तक चली जाती है, जो बेहद दुखद है। यदि समय रहते पर्याप्त व्यवस्था हो, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

जरूरतमंदों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

कंबल पाकर लाभुकों के चेहरे पर राहत और संतोष देखने लायक था। कई बुजुर्गों और महिलाओं ने उपमुखिया को दुआएं दीं और कहा कि इस ठंड में कंबल उनके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना था कि जब अपने ही क्षेत्र का जनप्रतिनिधि इस तरह साथ खड़ा होता है, तो भरोसा और मजबूत होता है।

एक बुजुर्ग लाभुक ने बताया कि ठंड के कारण रात काटना मुश्किल हो गया था, लेकिन कंबल मिलने से अब कुछ राहत महसूस हो रही है।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

ग्रामीणों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की। उनका कहना था कि ऐसे जनप्रतिनिधि ही वास्तव में ज़मीन से जुड़े नेता होते हैं, जो केवल भाषण नहीं देते, बल्कि जरूरत के समय जनता के लिए खड़े रहते हैं। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि हर पंचायत में इस तरह की पहल हो, तो गरीबों की समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।

सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

मुसीखाप पंचायत में हुआ यह कंबल वितरण कार्यक्रम केवल राहत वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी था। संदेश यह कि जब हालात कठिन हों, तब इंसानियत सबसे ऊपर होनी चाहिए। ठंड, भूख या किसी भी आपदा में समाज के सक्षम लोगों और जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए।

उपमुखिया सतबीर सिंह की यह पहल अन्य जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

न्यूज़ देखो: ठंड में राहत की पहल, लेकिन क्या यह काफी है?

मुसीखाप पंचायत में हुआ कंबल वितरण यह दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर संवेदनशील जनप्रतिनिधि क्या बदलाव ला सकते हैं। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या सरकारी स्तर पर पर्याप्त तैयारी है। जब ठंड हर साल जानलेवा बनती है, तो स्थायी समाधान क्यों नहीं? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

इंसानियत जिंदा है, बस आगे आने की जरूरत है

कड़ाके की ठंड में एक कंबल किसी के लिए जीवन रेखा बन सकता है।
आज मदद का एक कदम किसी को रात काटने की ताकत दे सकता है।
अगर आप सक्षम हैं, तो आगे आइए और जरूरतमंदों का सहारा बनिए।
अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और समाज में संवेदना का संदेश फैलाएं।

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Tirthraj Dubey

पांडु, पलामू

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