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निलंबन के बावजूद बरवाडीह सीएचसी में फार्मासिस्ट पद पर सक्रिय, प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना

#लातेहार #स्वास्थ्यप्रशासन : बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निलंबन आदेश के बावजूद फार्मासिस्ट आलोक तिवारी ड्यूटी करते पाए गए
  • बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (मुगईडीह) में फार्मासिस्ट आलोक तिवारी निलंबन आदेश के बावजूद ड्यूटी पर सक्रिय।
  • उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निलंबित कर्मी को किसी भी सरकारी सेवा में शामिल नहीं किया जाए।
  • स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की निर्देश पालन में लापरवाही सामने आई।
  • ग्रामीणों ने बताया कि आलोक तिवारी नियमित रूप से ड्यूटी कर रहे थे और किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई।
  • मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निलंबन आदेश के बावजूद फार्मासिस्ट आलोक तिवारी का पद पर सक्रिय रहना प्रशासनिक सख्ती की असली तस्वीर को उजागर करता है। उपायुक्त द्वारा स्पष्ट निर्देश के बावजूद फार्मासिस्ट का लगातार ड्यूटी करते रहना केवल आदेश उल्लंघन ही नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत की संभावना को भी सामने लाता है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने इस पर सवाल उठाए कि जब शीर्ष अधिकारी के लिखित आदेशों का पालन नहीं हो रहा, तो प्रशासनिक सख्ती की वास्तविकता पर कैसे भरोसा किया जा सकता है।

आदेश और अवहेलना

पिछले दिनों जब उपायुक्त ने अस्पताल का निरीक्षण किया, तो निलंबन आदेश की कॉपी मंगाई गई और अस्पताल प्रबंधन से जवाब-तलब किया गया। इसके बावजूद आलोक तिवारी अस्पताल परिसर में सक्रिय पाए गए। स्थानीय लोग इसे नियमों की सीधी अवहेलना और प्रशासनिक आदेशों का मज़ाक उड़ाने जैसा मान रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने कहा: “यह केवल आदेश उल्लंघन नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरियों और विभागीय मिलीभगत का स्पष्ट उदाहरण है।”

ग्रामीणों ने बताया कि फार्मासिस्ट की नियमित ड्यूटी और अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी ने लोगों में निराशा पैदा की है। उन्हें संदेह है कि निलंबन आदेश के बावजूद कर्मी किसके संरक्षण में कार्य कर रहा था।

विभागीय लापरवाही और सवाल

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि निलंबन आदेश के बाद भी आलोक तिवारी को ड्यूटी पर कैसे रखा गया। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारी अपने ही आदेशों का पालन नहीं कर सकते, तो अन्य सरकारी कर्मचारियों में अनुशासन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

एक ग्रामीण ने कहा: “जब जिले के सबसे ऊंचे अधिकारी के निर्देश भी लागू नहीं होते, तो आम नागरिक कैसे भरोसा करें कि प्रशासन सख्ती दिखा पाएगा।”

स्थानीय लोगों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और कहा कि भविष्य में निलंबन जैसे आदेश कागज़ों तक सीमित न रहकर वास्तविक रूप में लागू किए जाएँ।

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न्यूज़ देखो: प्रशासनिक आदेशों का पालन और जवाबदेही जरूरी

बरवाडीह सीएचसी का यह मामला यह दिखाता है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पालन और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है। प्रशासनिक स्तर पर निवारक कार्रवाई और जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि सरकारी आदेश सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहें।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सरकारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करें और जवाबदेही बढ़ाएं

स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे न केवल आदेश जारी करें, बल्कि उनका पालन सुनिश्चित करें। नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए और ऐसे मामलों की जानकारी अधिकारियों तक पहुँचाना चाहिए। अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और सुनिश्चित करें कि सरकारी आदेश केवल कागज़ों तक सीमित न रहें बल्कि वास्तविक रूप में लागू हों।

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