जर्जर स्कूल भवन बना खतरे का घर, बच्चों और शिक्षकों की जान पर मंडरा रहा संकट

जर्जर स्कूल भवन बना खतरे का घर, बच्चों और शिक्षकों की जान पर मंडरा रहा संकट

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #विद्यालय_संकट : केड़ स्कूल भवन जर्जर — हादसे का बढ़ता खतरा।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के केड़ पंचायत स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय का भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। दीवारों में दरार और छत से गिरते प्लास्टर के कारण बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा खतरे में है। हाल ही में प्रधानाध्यापक जॉन मिंज बाल-बाल हादसे से बचे। अभिभावकों और ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत की मांग उठाई है।

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  • राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, केड़ का भवन पूरी तरह जर्जर।
  • छत से गिरता प्लास्टर, दीवारों में दरार से बढ़ा हादसे का खतरा।
  • प्रधानाध्यापक जॉन मिंज बाल-बाल बचे, बड़ा हादसा टला।
  • अभिभावक और विद्यालय अध्यक्ष ललन यादव ने मरम्मत की मांग उठाई।
  • समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ी दुर्घटना की आशंका

बरवाडीह प्रखंड के केड़ पंचायत स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय इन दिनों खस्ताहाल भवन के कारण चर्चा में है। विद्यालय का ढांचा इस कदर जर्जर हो चुका है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों की जान पर हर दिन खतरा मंडरा रहा है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और छत से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है, जिससे कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

जर्जर भवन बना खतरे की वजह

विद्यालय भवन की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। कई जगहों पर दीवारें कमजोर होकर अलग होने लगी हैं, जबकि छत का प्लास्टर लगातार गिर रहा है। इससे कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करना बच्चों के लिए जोखिम भरा हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है, जब पानी के रिसाव से भवन की कमजोरी और बढ़ जाएगी।

बाल-बाल बचे प्रधानाध्यापक

शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक जॉन मिंज जब अपने कार्यालय कक्ष में प्रवेश कर रहे थे, तभी अचानक छत का प्लास्टर गिर पड़ा।

जॉन मिंज ने कहा: “भवन की स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, इसलिए जल्द से जल्द मरम्मत जरूरी है।”

इस घटना ने विद्यालय की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है और सभी को चिंता में डाल दिया है।

अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी

विद्यालय के अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, लेकिन यहां तो जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

विद्यालय अध्यक्ष ललन यादव ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

ललन यादव ने कहा: “अगर समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो किसी बड़ी घटना के लिए विभाग और प्रशासन जिम्मेदार होंगे।”

विभाग को भेजा जाएगा आवेदन

प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग को लिखित आवेदन भेजा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करेगा।

बच्चों की पढ़ाई पर असर

भवन की खराब स्थिति का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई बार शिक्षक और छात्र डर के माहौल में पढ़ाई करते हैं, जिससे उनका ध्यान भटकता है और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में ही बेहतर शिक्षा संभव है, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के मंदिर में असुरक्षा क्यों?

यह खबर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। जहां एक ओर सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे जर्जर भवन बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं। क्या प्रशासन समय रहते इस खतरे को समझेगा? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? अब जरूरी है कि संबंधित विभाग तुरंत कार्रवाई करे और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब वक्त है आवाज उठाने का, बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले

बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। अगर हम आज चुप रहे, तो कल किसी बड़ी दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है। जरूरत है कि हम सभी मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएं।

स्थानीय लोग, अभिभावक और समाज के हर वर्ग को आगे आकर प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचानी चाहिए। सुरक्षित विद्यालय हर बच्चे का अधिकार है, इसे सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

आप भी इस मुद्दे पर अपनी राय जरूर रखें। खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि जिम्मेदारों तक आवाज पहुंचे और जल्द कार्रवाई हो सके।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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