#खलारी #श्रम_विवाद : सीसीएल परियोजना में समस्याएं लंबित—यूनियन ने प्रबंधन को अंतिम नोटिस दिया।
रांची के खलारी स्थित केडीएच परियोजना में कर्मचारियों की लंबित समस्याओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। संयुक्त ट्रेड यूनियन ने प्रबंधन को अंतिम नोटिस जारी कर 25 अप्रैल से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है। यूनियन ने प्रबंधन पर लापरवाही और नियम उल्लंघन का आरोप लगाया है। मामले में औद्योगिक अशांति की आशंका जताई जा रही है।
- केडीएच परियोजना, खलारी में विवाद गहराया।
- यूनियन ने फाइनल लीगल नोटिस जारी किया।
- 25 अप्रैल से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी।
- सेवा रिकॉर्ड, पेंशन और आवास मुद्दे प्रमुख।
- प्रबंधन पर उदासीनता और नियम उल्लंघन का आरोप।
रांची जिले के खलारी क्षेत्र स्थित सीसीएल के एन.के. एरिया अंतर्गत केडीएच परियोजना में कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर विवाद गंभीर रूप लेता जा रहा है। संयुक्त ट्रेड यूनियन ने परियोजना प्रबंधन को अंतिम विधिक नोटिस जारी करते हुए 25 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।
यूनियन का कहना है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्रबंधन पर उदासीनता का आरोप
संयुक्त ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की वैध मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
यूनियन नेता प्रमोद कुमार पाल ने कहा: “समस्याओं के समाधान में देरी से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है।”
प्रमुख समस्याएं
नोटिस में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है, जिनमें—
- सेवा अभिलेखों में नाम और आयु सुधार
- चिकित्सा प्रतिपूर्ति में देरी
- पेंशन से जुड़े पुराने मामलों का निपटारा
- आवास आवंटन के बाद वास्तविक आवास उपलब्ध कराना
शामिल हैं।
वेलफेयर मीटिंग नहीं होने पर सवाल
यूनियन ने आरोप लगाया कि लंबे समय से वेलफेयर मीटिंग आयोजित नहीं की गई, जो औद्योगिक संबंधों की स्थापित परंपरा के खिलाफ है।
अधिकारियों के व्यवहार पर भी आरोप
नोटिस में सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) के व्यवहार को असहयोगात्मक और पक्षपातपूर्ण बताया गया है।
कर्मचारियों ने कहा: “इससे कार्यस्थल पर तनाव और असंतोष बढ़ रहा है।”
कानूनों का हवाला
यूनियन ने अपने नोटिस में औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, कोयला खदान स्थायी आदेश और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का हवाला देते हुए प्रबंधन पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
आंदोलन की चेतावनी
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो 25 अप्रैल से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रमोद कुमार पाल ने कहा: “अब आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है।”
प्रबंधन को दी गई जिम्मेदारी
यूनियन ने कहा कि आंदोलन के दौरान यदि उत्पादन प्रभावित होता है या विधि-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
उच्च अधिकारियों को भेजी गई सूचना
इस संबंध में नोटिस की प्रतिलिपि—
- महाप्रबंधक (एन.के. क्षेत्र)
- महाप्रबंधक (मानव संसाधन)
- अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक
- निदेशक (मानव संसाधन)
- श्रमायुक्त (केंद्रीय)
सहित अन्य अधिकारियों को भेजी गई है।
औद्योगिक अशांति की आशंका
इस विवाद के चलते परियोजना क्षेत्र में औद्योगिक अशांति की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।
न्यूज़ देखो: संवाद से ही सुलझेंगे विवाद
खलारी का यह मामला दिखाता है कि समय पर समस्याओं का समाधान न होने से औद्योगिक विवाद बढ़ सकते हैं। अब जरूरी है कि प्रबंधन और यूनियन के बीच संवाद हो और समाधान निकले। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकार और जिम्मेदारी दोनों जरूरी
कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जरूरी है।
साथ ही संवाद और सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
संघर्ष से पहले समाधान की कोशिश होनी चाहिए।
आइए, हम संतुलित और सकारात्मक सोच अपनाएं।
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